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Janmashtami 2022: राजस्थान के कुड़की में हुआ था कृष्ण भक्त मीरा का जन्म, चमत्कारिक है उनके महल का यह स्थान

Sat, 20 Aug 2022 12:16 AM IST
वीरेंद्र शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पाली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पाली Published by: वीरेंद्र शर्मा Updated Sat, 20 Aug 2022 12:16 AM IST
सार

पाली के कुड़की गांव में 'मीरा कुड़की फोर्ट' आज भी मौजूद है। यहीं मीराबाई का जन्म हुआ। शादी के कुछ समय बाद ही उनके पति की मौत हो गई थी।

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Krishna devotee Meera was born in Kudki,  this place of her palace is miraculous
राजस्थान के पाली के कुड़की गांव में मीरा कुड़की फोर्ट - फोटो : amar ujala

विस्तार

राजस्थान के पाली जिले के गांव कुड़की में कृष्ण भक्त मीराबाई का जन्म हुआ था। आज भी उनसे जुड़ी हुई कई निशानियां मौजूद है। पाली से करीब 130 किलोमीटर दूर कुड़की गांव में 'मीरा कुड़की फोर्ट' मौजूद है। कृष्ण भक्ति से समर्पित हिंदी साहित्य की महान कवयित्री मीराबाई का जन्म 1556 में अक्षय तृतीया को कुड़की गांव निवासी रत्नसिंह के घर हुआ था। मीराबाई बचपन से ही कृष्ण भक्ति में लीन रही। 
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मां से पूछा मेरा दूल्हा कहां है
मीरा बाई के वंशज ठाकुर पुष्पेंद्र सिंह ने बताया कि गांव में आई एक बारात को देखकर मीरा ने अपनी माता से पूछा था कि मेरा दूल्हा कहां है, उनकी माता ने भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति की तरफ इशारा करते हुए कहा कि यह तेरा दूल्हा है, उसी दिन से मीरा कृष्ण की दीवानी हो गई।
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महाराणा सांगा के पुत्र के साथ हुआ था मीरा का विवाह
ठाकुर पुष्पेंद्र सिंह राठौड ने बताया कि मीरा का विवाह महाराणा सांगा के बेटे भोजराज के साथ हुआ था। शादी के कुछ समय बाद ही उनके पति की मौत हो गई थी। अब ज्यादातर समय उनका साधु-संतों के साथ हरिकीर्तन में बीतता था। उन्होंने बताया कि साधु-संतों से उनकी संगति भोजराज के परिजनों को अच्छी नहीं लगती थी। कई बार उन्हें मारने का प्रयास किया गया, लेकिन श्रीकृष्ण की भक्ती में लीन मीरा को कोई नहीं मार सका। 
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मेवाड़ छोड़ चली गईं थीं द्वारका 
ठाकुर पुष्पेंद्र सिंह राठौड ने बताया कि रोज-रोज ससुरालवालों के व्यवहार से परेशान होकर मीरा बाई ने मेवाड़ छोड़ दिया और वृंदावन चली गईं। यहां से द्वारका गईं और मंदिर की सीढ़ियों पर मीराबाई का प्राणांत हो गया। कृष्ण भक्ति की वजह से उन्हें खूब सम्मान भी मिला। यहां तक की हिंदी काव्य में मीराबाई का महत्वपूर्ण योगदान रहा हैं।

कुड़की आज भी मीरा भक्ति का है साक्षी
जैतारण उपखंड के इस गांव में श्रीकृष्ण मंदिर मीराबाई की भक्ति का साक्षी है। मीराबाई द्वारा स्थापित इस मंदिर में उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति की थी। आज भी उनके वंशज भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करते है।

कुड़की में मीरा बाई की कई निशानियां है मौजूद 
ठाकुर पुष्पेंद्र सिंह राठौड ने बताया कि कुड़की के महल में मीराबाई का जन्म हुआ। देखभाल न होने की वजह से अब यह महल जर्जर हो चुका है। इसी के ठीक सामने मीरा द्वारा बनवाया गया श्रीकृष्ण भगवान का मंदिर है। मीराबाई की आखरी निशानियों के तौर पर मंदिर में उनके कमंडल, खड़ाऊ, रुद्राक्ष की मालाएं, शंख आदि धरोहर मौजूद है।


चमत्कारिक है यह स्थान  
महल के आसपास बड़ी संख्या में तुलसी के पौधे हैं। बताया जाता है कि अपने आप यहां तुलसी के पौधे उगते हैं। साथ ही पौधे पूरे साल हरे-भरे रहते हैं। हर साल यहां श्रीकृष्ण जन्माष्ट्रमी बड़े ही धूमधाम के साथ मनाई जाती है। 
 
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