कोटा कोचिंग: ढाई लाख छात्रों पर एक मनोवैज्ञानिक अपर्याप्त, एनएमसीएच ने एक साल पहले भेजा था प्रस्ताव
प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई और कुशल मनोवैज्ञानिकों के साथ परामर्श केंद्र की स्थापना की घोषणा की गई। हालांकि, एमफिल पाठ्यक्रम की शुरुआत और नैदानिक मनोवैज्ञानिकों की नियुक्ति अब भी लंबित है।
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डॉक्टर-इंजीनियर बनाने की फैक्टरी कहे जाने वाले राजस्थान के शहर कोटा में करीब 2.50 लाख छात्र कोचिंग सेंटरों में पढ़ते हैं। इन छात्रों के मन की दुविधाएं दूर करने के लिए कम से कम पांच मनोवैज्ञानिकों की जरूरत है। लेकिन, राजस्थान सरकार की 2023 की बजट घोषणा के मुताबिक कोटा स्थित न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल (एनएमसीएच) में स्थापित मनोवैज्ञानिक परामर्श केंद्र में एक ही नैदानिक मनोवैज्ञानिक उपलब्ध है। कोटा में इस साल प्रतियोगी प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी करने वाले 26 छात्रों ने तनाव के चलते आत्महत्या कर ली।
उचित मनोवैज्ञानिक मार्गदर्शन मिलना बेहद जरूरी
इस लिहाज से उन्हें उचित मनोवैज्ञानिक मार्गदर्शन मिलना बेहद जरूरी होता है। एनएमसीएच के मनोविज्ञान विभाग के प्रोफेसर (एमडी) डॉ. विनोद कुमार दरिया ने कहा कि राज्य के सरकारी संस्थानों में नैदानिक मनोविज्ञान में एमफिल पाठ्यक्रम के लिए एक प्रस्ताव तैयार किया था और पिछले साल जनवरी में इसे राज्य सरकार को भेजा था।
प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई और कुशल मनोवैज्ञानिकों के साथ परामर्श केंद्र की स्थापना की घोषणा की गई। हालांकि, एमफिल पाठ्यक्रम की शुरुआत और नैदानिक मनोवैज्ञानिकों की नियुक्ति अब भी लंबित है।