Exclusive: राजस्थान में मेहरबान अधिकारी, बेलगाम जालसाज...एक हजार से अधिक अवैध पैथोलॉजी लैबों पर किसकी मेहरबानी
आम लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराने के लिए सरकार द्वारा भले ही लाख दावे किए जा रहे हों, लेकिन हकीकत यह है कि आज भी राजस्थान के झुंझुनूं में संचालित अधिकांश पैथोलॉजी लैब्स बिना निबंधन यानी रजिस्ट्रेशन के ही संचालित हो रहे हैं। अमर उजाला की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में आज हम इसी बात का खुलासा कर रहे हैं।
विस्तार
झुंझुनूं जिले का आलम यह है कि यहां अधिकांश जांच घरों में अप्रशिक्षित कर्मियों द्वारा ही मरीजों का खून और पेशाब सहित अन्य जांच की जा रही है। हैरानी की बात यह है कि इसी आधार पर चिकित्सकों द्वारा मरीजों को दवा भी लिखी जा रही है।
ऐसे में अब सवाल उठता है कि जिन मरीजों के खून, पेशाब और अन्य समस्याओं से संबंधित जांच ऐसे पैथोलॉजी लैब में की जाती है, जिसका न तो विभाग द्वारा निबंधन किया गया है और न ही उस जांच घर में प्रशिक्षित टेक्नीशियन द्वारा जांच की गई है। ऐसी स्थिति में उनके द्वारा दी गई रिपोर्ट भी सवालों के घेरे में आती है, जिसका खामियाजा बिना निबंधन व अप्रशिक्षित टेक्नीशियन द्वारा संचालित जांच घरों में जांच कराने वाले मरीजों को भुगतना पड़ता है।
इन गलत जांचों की चाहे जिम्मेदारी भले ही कोई न ले, लेकिन इसका खामियाजा मरीजों को आर्थिक, शारीरिक और मानसिक रूप से झेलना पड़ता है। सबसे ज्यादा नुकसान तो गरीबी रेखा से नीचे गुजर-बसर करने वालों को ही झेलना पड़ता है, जिनके बेहतर इलाज के लिए बाहर अन्यत्र जांच संभव नहीं होती है। बावजूद आज धड़ल्ले से ऐसे जांच घर खुल रहे हैं, जिसकी खोज खबर लेने वाला कोई नहीं है।
इनका क्या कहना है
जानकार बताते हैं कि पैथोलॉजी लैब संचालक के लिए राज्य सरकार द्वारा पूर्व में ही नियम कायदे तैयार किए गए हैं, जिसके लागू होने से सरकार को काफी राजस्व की प्राप्ति होगी। साथ ही अवैध और मानकों का उल्लंघन करने वाले पैथोलॉजी केंद्रों के संचालन के विरुद्ध कार्रवाई भी सुनिश्चित हो सकेगी। लेकिन स्वास्थ्य विभाग को न तो मरीजों की चिंता दिख रही है और न ही राजस्व के नुकसान का मलाल है। यही कारण है कि केंद्रों के पंजीयन को लेकर विभाग भी उदासीन दिख रहा है।
इतने पैथोलॉजी लैब का रजिस्ट्रेशन
विभाग की गंभीरता का अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि अब तक झुंझुनूं में मात्र 76 पैथोलॉजी लैब और डायग्नोस्टिक सेंटर्स का निबंधन किया गया है। जबकि हजारों की तादात में लैब का संचालन जिले में हो रहा है। निर्धारित प्रावधानों के अनुसार, किसी भी पैथोलॉजी केंद्र के संचालन के लिए मूलभूत सुविधाओं का होना आवश्यक है। वहीं, यहां प्रत्येक जांच के लिए रेट चार्ट भी लगाने का स्पष्ट निर्देश है। इसके पीछे मूल उद्देश्य है कि जांच के नाम पर मरीजों से निर्धारित राशि ही वसूल की जाए और इनमें मनमानी न हो। लेकिन जिले में अधिकतर जांच केंद्रों पर शुल्क तालिका नहीं लगी है। एक ही जांच के लिए अलग-अलग मरीजों से अलग-अलग राशि की वसूली हो रही है।
साठ-गाठ कर हो रहा है मरीजों का शोषण
स्वास्थ्य विभाग की उदासीनता के कारण झुंझनूं में अवैध पैथोलॉजी धड़ल्ले से चलाए जा रहे हैं। इतना ही नहीं लैब संचालकों द्वारा चिकित्सकों से साठ-गाठ कर मरीजों का शोषण किया जा रहा है। दरअसल, प्रावधानों के अनुसार प्रशिक्षण लैब टेक्नीशियन को ही मरीजों की पैथोलॉजी जांच का अधिकार है। लेकिन जिले में संचालित अधिकतर पैथोलॉजी लैब में टेक्नीशियन है ही नहीं, अप्रशिक्षित कर्मियों द्वारा ही मरीजों की जांच की जा रही है।
बिना निबंधन जुर्माने का प्रावधान
बिना निबंधन के जांच घर चलाने पर जुर्माने का प्रावधान किया गया है। लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि यहां 76 के अलावा एक भी जांच कर निबंधन में नहीं है, जिनकी संख्या हजारों में है। जांच घरों का निबंधन नहीं होने की वजह विभागीय स्तर पर इसकी सुनवाई करने वाला भी कोई नहीं है। प्रावधानों के अनुसार, बिना निबंधन जांच घर संचालित करने पर पांच लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
बताते चलें, झुंझुनूं जिले में केवल 76 पैथोलॉजी लैब व डायग्नोस्टिक सेंटर ही पंजीकृत हैं। जिला मुख्यालय में ही 300 से ज्यादा लैब कलेक्शन सेंटर की आड़ में चल रहे हैं। जिले भर में यह आंकड़ा करीब एक हजार बताया जा रहा है। इन लैब्स का संचालन धड़ल्ले से किया जा रहा है और लोगों के सैंपल लेकर जांच की जा रही है।
न योग्यता न रजिस्ट्रेशन
लैब संचालक के लिए शासन द्वारा विधिवत नियम लागू किए गए हैं, लेकिन जिले में आश्चर्यजनक रूप से डीएमएलटी व उनके सहयोगी तक लैब संचालित कर रहे हैं। जबकि लैब संचालक एमबीबीएस, एमडी पैथोलॉजिस्ट होना चाहिए। इतना ही नहीं अवैध तरीके से संचालित हो रही लैब के पास न ही नियमानुसार पॉल्यूशन बोर्ड का रजिस्ट्रेशन है और न ही पंजीकृत मेडिकल वेस्ट फर्म का पंजीयन है।
स्वास्थ्य विभाग के कर्मियों ने बढ़ा दी संख्या
अवैध पैथोलॉजी लैब के संचालन के पीछे कार्यालय में पदस्थ अमले की मिली भगत बताई जा रही है। इनके फलने-फूलने के पीछे ऐसे चिकित्सकों की भी कम भूमिका नहीं है, जो अधिक कमीशन के चक्कर में चिकित्सक इन लैबों में अपने मरीज को जांच के लिए भेज रहे हैं। कई डॉक्टर्स तो अपने क्लीनिक में ही सैंपल लेकर उन्हें लैब तक पहुंचा रहे हैं।
क्या बोले अधिकारी
चीफ मेडिकल ऑफिसर राजकुमार डांगी के मुताबिक, हमारे पास संचालित पैथोलॉजी लैब और विकर्ण सैंटर्स की संख्या कुल 76 है। इनके अलावा अवैध संचालित पैथोलॉजी लैब्स और डायग्नोस्टिक सेंटर्स की जल्द ही जांच की जाएगी। जहां-जहां भी अवैध संचालन होता पाया जाएगा, उनके खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।