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Rajasthan: सरकारी नौकरी का झांसा, लाखों की ठगी! 100-150 बेरोजगारों को बनाया शिकार, दो मुख्य आरोपी गिरफ्तार
Mon, 10 Aug 2026 01:02 PM IST
झालावाड़ ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, झालावाड़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, झालावाड़
Published by: झालावाड़ ब्यूरो
Updated Mon, 10 Aug 2026 01:02 PM IST
सार
झालावाड़ में सरकारी नौकरी, संविदा पर रोजगार और सरकारी विभागों में तबादला कराने का झांसा देकर बेरोजगार युवाओं से लाखों रुपये की ठगी करने वाले गिरोह का कोतवाली पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने गिरोह के दो मुख्य आरोपियों अब्दुल रउफ और सद्दाम को गिरफ्तार किया है।
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पुलिस ने आरोपी को किया गिरफ्तार
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
सरकारी नौकरी, संविदा पर रोजगार और सरकारी विभागों में तबादला कराने का झांसा देकर बेरोजगार युवाओं से लाखों रुपये की ठगी करने वाले गिरोह का कोतवाली पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए गिरोह के दो मुख्य सदस्यों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से मिले डिजिटल साक्ष्यों में कई अभ्यर्थियों के शैक्षणिक दस्तावेज और कथित फर्जीवाड़े से जुड़े साक्ष्य मिले हैं। पुलिस के अनुसार, गिरोह अब तक करीब 100 से 150 अभ्यर्थियों से लाखों रुपये की ठगी कर चुका है। कार्रवाई में जिला स्पेशल टीम की भी अहम भूमिका रही।
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सरकारी नौकरी का झांसा देकर बनाते थे बेरोजगारों को निशाना
पुलिस अधीक्षक अमित कुमार ने बताया कि जिले में संगठित अपराध और फर्जीवाड़े के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत यह कार्रवाई की गई। 7 अगस्त को कोतवाली थाने में शिकायत मिली थी कि झालावाड़ और आसपास के क्षेत्रों में एक गिरोह सक्रिय है, जो गांव-गांव जाकर सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे गरीब और मध्यम वर्गीय बेरोजगार युवाओं को अपना निशाना बना रहा है।
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30 से 50 हजार रुपये तक लेते थे एडवांस
आरोपी विभिन्न सरकारी विभागों, अस्पतालों और स्कूलों में पक्की अथवा संविदा पर नौकरी लगवाने का झांसा देकर प्रत्येक अभ्यर्थी से 30 से 50 हजार रुपये तक एडवांस लेते थे। इसके अलावा सरकारी विभागों में तबादला कराने का भी भरोसा दिलाया जाता था।
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शिकायत की जांच एसआई विजय सिंह को सौंपी गई। जांच के दौरान सादा कपड़ों में पुलिसकर्मियों ने संदिग्धों की गतिविधियों पर नजर रखी। स्थानीय स्तर पर जानकारी जुटाने पर संदिग्धों के घरों पर दूर-दराज से बेरोजगार युवाओं के लगातार आने-जाने की बात सामने आई।
डिजिटल साक्ष्यों ने खोला फर्जीवाड़े का राज
मामले की गंभीरता को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक भागचंद्र के निर्देशन और वृत्ताधिकारी झालावाड़ हर्षराज सिंह खरेड़ा के सुपरविजन में कोतवाली थाना पुलिस के नेतृत्व में विशेष टीम गठित की गई। टीम ने संभावित ठिकानों पर दबिश देकर अब्दुल रउफ निवासी पायगा मोहल्ला, झालावाड़ और सद्दाम निवासी दिलावरा, पीड़ावा को हिरासत में लिया। पूछताछ और डिजिटल साक्ष्यों की जांच में कई अभ्यर्थियों के शैक्षणिक दस्तावेज तथा कथित फर्जीवाड़े से जुड़े साक्ष्य मिले।
मेरिट से चयनित अभ्यर्थियों से भी वसूलते थे रकम
जांच में सामने आया कि गिरोह का तरीका बेहद शातिर था। जो अभ्यर्थी अपनी योग्यता और मेरिट के आधार पर स्वयं चयनित हो जाते थे, उनसे भी आरोपी नौकरी लगवाने का दावा करते हुए बकाया पूरी रकम वसूल लेते थे। वहीं, जिन अभ्यर्थियों का चयन नहीं होता था, उनसे लिया गया एडवांस भी वापस नहीं किया जाता था। पुलिस पूछताछ में अब तक करीब 100 से 150 अभ्यर्थियों से लाखों रुपये की ठगी किए जाने की जानकारी सामने आई है।
पहले भी ऐसे मामलों में गिरफ्तार हो चुके हैं गिरोह के सदस्य
पुलिस के अनुसार, गिरोह के कुछ सदस्य पूर्व में भी इसी तरह के मामलों में गिरफ्तार हो चुके हैं। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है। वहीं, मामले में शामिल फरार आरोपियों की तलाश के लिए पुलिस टीमें संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दे रही हैं। इस कार्रवाई में कोतवाली थानाधिकारी मुकेश कुमार, एसआई विजय सिंह, कांस्टेबल धर्मेंद्र सहित जिला स्पेशल टीम प्रभारी रोहित कुमार और टीम के जवान शामिल रहे। इसके अलावा रायपुर थाना, झालरापाटन थाना और साइबर टीम के पुलिसकर्मियों ने भी कार्रवाई में सहयोग किया।