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जयपुर: जिस दुकान को पिता-दादा ने बनाया, उसे तोड़ रहे व्यापारी; सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली तो बढ़ी चिंता

Thu, 08 Oct 2026 10:30 AM IST
जयपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: जयपुर ब्यूरो Updated Thu, 08 Oct 2026 10:30 AM IST
सार

जयपुर के न्यू सांगानेर रोड पर अतिक्रमण के खिलाफ जयपुर विकास प्राधिकरण की कार्रवाई जारी है। राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश के बाद चल रही कार्रवाई में प्रभावित व्यापारियों ने सुप्रीम कोर्ट से राहत मांगी थी, लेकिन शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।

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न्यू सांगानेर रोड के पीड़ित व्यापारी एवं उनके परिवार - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कभी जिन दुकानों को पिता ने खड़ा किया था और जिनकी दीवारों में दादा की मेहनत की यादें जुड़ी थीं, अब उन्हीं दुकानों के हिस्से व्यापारी अपने हाथों से तोड़ने को मजबूर हैं। जयपुर के न्यू सांगानेर रोड पर अतिक्रमण के खिलाफ चल रही कार्रवाई के बीच कई व्यापारियों की आंखों के सामने उनकी वर्षों पुरानी दुकानें टूट रही हैं। व्यापारियों को उम्मीद थी कि सुप्रीम कोर्ट से राहत मिल सकती है, लेकिन वहां से भी राहत नहीं मिलने के बाद उनकी चिंता और बढ़ गई है।

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हाईकोर्ट के आदेश के बाद जारी है कार्रवाई

न्यू सांगानेर रोड पर अतिक्रमण के खिलाफ जयपुर विकास प्राधिकरण की कार्रवाई राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश के बाद जारी है। कार्रवाई से प्रभावित व्यापारियों ने राहत के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।

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इसके बाद फिलहाल व्यापारियों के सामने अदालत के जरिए राहत पाने का रास्ता बंद होता नजर आ रहा है। अब वे सरकार से मानवीय आधार पर समाधान की उम्मीद कर रहे हैं।

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कार्रवाई से पहले खुद तोड़ रहे दुकानों का हिस्सा

अदालती राहत नहीं मिलने के बाद कई व्यापारी कार्रवाई से पहले अपनी दुकानों का वह हिस्सा खुद तोड़ रहे हैं, जिसे अतिक्रमण के दायरे में बताया गया है। किसी दुकान का बड़ा हिस्सा पहले ही टूट चुका है, जबकि कुछ व्यापारियों का कहना है कि उनकी दुकान का करीब 80 प्रतिशत हिस्सा कार्रवाई की जद में आ रहा है। व्यापारियों का कहना है कि अगर वे खुद यह हिस्सा नहीं हटाएंगे तो कार्रवाई के दौरान और ज्यादा नुकसान हो सकता है।

50 साल से कारोबार, अब रोजी-रोटी का संकट

प्रभावित व्यापारियों के मुताबिक, वे न्यू सांगानेर रोड पर करीब 50 वर्षों से रहकर कारोबार कर रहे हैं। कई दुकानें उनके पिता और दादा ने अपने हाथों से खड़ी की थीं। वर्षों की मेहनत और कमाई से तैयार कारोबार अब उनकी आंखों के सामने खत्म होता दिखाई दे रहा है। व्यापारियों का कहना है कि इन दुकानों से केवल उनका कारोबार नहीं चलता था, बल्कि परिवार का पूरा खर्च इसी आय पर निर्भर था। बच्चों की पढ़ाई से लेकर घर की जरूरतें तक इसी कमाई से पूरी होती थीं।

दीपावली से पहले दुकानें टूटने की चिंता

व्यापारियों की सबसे बड़ी चिंता दीपावली को लेकर है। उनका कहना है कि त्योहार से ठीक पहले दुकानें टूटने से कारोबार पूरी तरह प्रभावित हो गया है। ऐसे समय में जब बाजार में व्यापार बढ़ने की उम्मीद रहती है, उनकी रोजी-रोटी पर ही संकट खड़ा हो गया है। एक बुजुर्ग व्यापारी भावुक होकर कहते हैं कि परिवार इसी दुकान के सहारे चलता था। अब दुकान ही नहीं रहेगी तो परिवार का खर्च कैसे चलेगा, यही चिंता उन्हें परेशान कर रही है। वहीं, युवा व्यापारियों का सवाल है कि सरकार उनकी समस्या का कोई ऐसा मानवीय समाधान क्यों नहीं निकाल सकती, जिससे कार्रवाई भी हो और उनका कारोबार भी पूरी तरह खत्म न हो।

व्यापारियों की सरकार से आखिरी उम्मीद

व्यापारियों का कहना है कि वे सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हैं। उनका विरोध अदालत के निर्णय को लेकर नहीं है, बल्कि वे सरकार से अपनी स्थिति को मानवीय नजरिए से देखने की अपील कर रहे हैं। उनकी मांग है कि सरकार ऐसा कोई रास्ता निकाले, जिससे दशकों से चल रहे उनके कारोबार और परिवारों की रोजी-रोटी को बचाया जा सके।

एक तरफ अदालत का फैसला, दूसरी ओर पीढ़ियों की मेहनत

न्यू सांगानेर रोड पर अब मामला सिर्फ अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई तक सीमित नहीं रह गया है। एक तरफ अदालत का फैसला है, तो दूसरी ओर दशकों से कारोबार कर रहे परिवारों की आजीविका का सवाल खड़ा है। कार्रवाई आगे बढ़ रही है और उसके बीच व्यापारी अपनी पीढ़ियों की मेहनत को बचाने की आखिरी कोशिश करते नजर आ रहे हैं। उनके लिए टूटती दुकानें सिर्फ ईंट-पत्थर की इमारतें नहीं, बल्कि परिवार की कई पीढ़ियों की मेहनत और रोजी-रोटी का सहारा हैं।

 

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