फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Rajasthan ›   Jaipur News ›   Rajasthan UCC Bill: Common Rules for Marriage, Divorce, Succession and Live-in Relationships

राजस्थान UCC बिल: कहीं भी रहें; राजस्थानी हैं तो लगेगा यूसीसी; शादी, तलाक और लिव-इन का एक समान कानून; बिल पेश

Fri, 21 Aug 2026 03:53 PM IST
Sourabh Bhatt न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: Sourabh Bhatt Updated Fri, 21 Aug 2026 03:53 PM IST
सार

राजस्थान सरकार ने 399 पन्नों वाला UCC बिल विधानसभा में पेश किया। इसमें विवाह-पंजीकरण, समान तलाक व उत्तराधिकार नियम, वसीयत और लिव-इन संबंधों के पंजीकरण का प्रावधान है। खास बात ये है कि अगर आपका जन्म राजस्थान में हुआ है तो आप बिल के दायरे में आएंगे। चाहे आप राजस्थान में रहें या नहीं। 

विज्ञापन
Rajasthan UCC Bill: Common Rules for Marriage, Divorce, Succession and Live-in Relationships
राजस्थान विधानसभा में यूसीसी बिल पेश किया गया - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजस्थान सरकार ने शुक्रवार को विधानसभा में राजस्थान समान नागरिक संहिता विधेयक, 2026 पेश किया। 399 पन्नों और 403 धाराओं वाले इस विधेयक में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, वसीयत और लिव-इन रिलेशनशिप के लिए एक समान कानूनी व्यवस्था प्रस्तावित की गई है। इसका उद्देश्य इन विषयों से जुड़े अलग-अलग कानूनों, प्रथाओं और परंपराओं की जगह एक समान व्यवस्था लागू करना है।

विज्ञापन

प्रस्तावित कानून पूरे राजस्थान के साथ राज्य के बाहर रहने वाले राजस्थान के निवासियों पर भी लागू होगा। हालांकि, संविधान के तहत संरक्षित अनुसूचित जनजातियों और कुछ अन्य ऐसे समूहों को इसके दायरे से बाहर रखा गया है, जिन्हें संवैधानिक रूप से विशेष प्रथागत अधिकार प्राप्त हैं। कानून की प्रभावी तारीख राज्य सरकार की ओर से अलग से अधिसूचित की जाएगी।

विज्ञापन

विवाह का पंजीकरण अनिवार्य

विधेयक में विवाह के लिए समान शर्तें निर्धारित की गई हैं। किसी भी पक्ष का जीवित जीवनसाथी होने पर दूसरा विवाह नहीं किया जा सकेगा। पुरुषों के लिए न्यूनतम विवाह आयु 21 वर्ष और महिलाओं के लिए 18 वर्ष ही रहेगी। विवाह धार्मिक या मान्य प्रथागत रीति-रिवाजों के अनुसार किया जा सकेगा, लेकिन उसका पंजीकरण अनिवार्य होगा। संहिता लागू होने के बाद होने वाले विवाहों के लिए सामान्यतः 60 दिन के भीतर पंजीकरण ज्ञापन प्रस्तुत करना होगा। पंजीकरण नहीं कराने पर 10 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। नोटिस के बाद भी अनुपालन नहीं करने पर यह जुर्माना बढ़कर 25 हजार रुपये तक हो सकता है। सरकार विवाह पंजीकरण के लिए रजिस्ट्रार जनरल, स्थानीय रजिस्ट्रार, इलेक्ट्रॉनिक रजिस्टर और ऑनलाइन पोर्टल की व्यवस्था कर सकेगी।

विज्ञापन
विज्ञापन


यह भी पढें- जयपुर में स्पा सेंटरों पर पुलिस का शिकंजा: नौ महिलाओं समेत 11 गिरफ्तार, नियमों की अनदेखी पर कार्रवाई

तलाक के लिए समान आधार

विधेयक में तलाक के लिए समान आधार तय किए गए हैं। इनमें व्यभिचार, क्रूरता, दो साल तक परित्याग, धर्म परिवर्तन, कुछ निर्धारित मानसिक या शारीरिक स्थितियां, संन्यास लेना, सात साल तक लापता रहना और भरण-पोषण संबंधी आदेश का उल्लंघन शामिल हैं। आपसी सहमति से तलाक का भी प्रावधान है। इसके लिए पति-पत्नी का कम से कम एक साल से अलग रहना और विवाह समाप्त करने पर दोनों की सहमति जरूरी होगी। असाधारण कठिनाई या गंभीर परिस्थितियों में अदालत प्रतीक्षा अवधि में छूट दे सकेगी। विवाह संबंधी मुकदमे के दौरान भरण-पोषण और स्थायी गुजारा भत्ता देने का भी प्रावधान है। इसके लिए दोनों पक्षों की आय, संपत्ति और परिस्थितियों को ध्यान में रखा जाएगा। विधेयक में मेहर, दहेज संबंधी अधिकार, स्त्रीधन और पत्नी की संपत्ति को भरण-पोषण के अतिरिक्त संरक्षित किया गया है।

बेटे-बेटियों को विरासत में समान व्यवस्था

वसीयत के बिना मृत्यु होने की स्थिति में विधेयक एक समान उत्तराधिकार व्यवस्था प्रस्तावित करता है। प्रथम श्रेणी के उत्तराधिकारियों में बेटे, बेटियां, पति या पत्नी और माता-पिता के साथ पूर्व-मृत संतान के निर्धारित वंशज शामिल होंगे। प्रत्येक जीवित पति या पत्नी और संतान को निर्धारित व्यवस्था के अनुसार हिस्सा मिलेगा, जबकि दोनों माता-पिता को मिलकर एक हिस्सा माना जाएगा। विधेयक में वसीयत, प्रोबेट और संपत्ति के प्रशासन से जुड़े प्रावधान भी शामिल हैं। स्वस्थ मस्तिष्क वाला वयस्क व्यक्ति वसीयत कर सकेगा। धोखे, दबाव या अनुचित प्रभाव से तैयार कराई गई वसीयत को अमान्य माना जाएगा। किसी व्यक्ति की हत्या करने या हत्या के लिए उकसाने वाला व्यक्ति मृतक की संपत्ति में उत्तराधिकार का हकदार नहीं होगा। वहीं, केवल बीमारी, दिव्यांगता या शारीरिक विकृति के आधार पर किसी व्यक्ति को उत्तराधिकार से वंचित नहीं किया जा सकेगा।

लिव-इन रिलेशनशिप का भी पंजीकरण अनिवार्य

विधेयक का सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर है। इसमें ऐसे संबंध को पुरुष और महिला के साझा घर में विवाह जैसी प्रकृति में साथ रहने के रूप में परिभाषित किया गया है। ऐसे जोड़ों को रजिस्ट्रार के समक्ष संयुक्त रूप से हस्ताक्षरित घोषणा प्रस्तुत करनी होगी। संबंध समाप्त होने की स्थिति में उसकी सूचना और पंजीकरण का भी प्रावधान है। लिव-इन रिलेशनशिप से जन्मे बच्चों को दंपती की वैध संतान माना जाएगा।

यदि कोई जोड़ा एक महीने से अधिक समय तक आवश्यक घोषणा दिए बिना लिव-इन रिलेशनशिप में रहता है तो तीन महीने तक की जेल और/या 10 हजार रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। गलत जानकारी देने पर तीन महीने तक की जेल और 25 हजार रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है। रजिस्ट्रार के नोटिस के बाद भी नियमों का पालन नहीं करने पर छह महीने तक की जेल और 25 हजार रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। बल, दबाव या धोखे से लिव-इन रिलेशनशिप के लिए सहमति हासिल करने के मामलों में भी कड़े दंड का प्रावधान किया गया है।

लिव-इन पार्टनर से छोड़ी गई महिला को भरण-पोषण का अधिकार

विधेयक में लिव-इन पार्टनर द्वारा छोड़ी गई महिला को सक्षम अदालत में भरण-पोषण का दावा करने का अधिकार दिया गया है। ऐसे मामलों में वैवाहिक संबंधों से जुड़े भरण-पोषण के प्रावधान आवश्यक बदलावों के साथ लागू किए जा सकेंगे। इस तरह राजस्थान का प्रस्तावित UCC विवाह से लेकर तलाक, उत्तराधिकार, वसीयत और लिव-इन संबंधों तक एक समान कानूनी ढांचा तैयार करने की दिशा में बड़ा कदम है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed