Rajasthan: कांग्रेस की सोशल इंजीनियरिंग पर तंज, गोपाल केशावत बोले- जाट और अन्य पिछड़ा वर्ग का दबदबा बढ़ रहा
'नई महिला कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष सारिका सिंह इसी वर्ग से, पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा इसी वर्ग से, युवा कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष भी इसी वर्ग से...क्या राजस्थान कांग्रेस अब जाट कांग्रेस हो चुकी है?'
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राजस्थान कांग्रेस में जातीय संतुलन को लेकर एक बार फिर सवाल उठे हैं। कांग्रेस सरकार में राज्य मंत्री का दर्जा प्राप्त नेता गोपाल केशावत ने महिला कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष सारिका सिंह की नियुक्ति पर सवाल खड़े करते हुए कांग्रेस की सोशल इंजीनियरिंग पर तंज कसा है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि राजस्थान कांग्रेस में जाट और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) का दबदबा बढ़ता जा रहा है, जिससे पार्टी का जातीय संतुलन बिगड़ रहा है। केशावत ने लिखा, नई महिला कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष सारिका सिंह इसी वर्ग से, पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा इसी वर्ग से, युवा कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष भी इसी वर्ग से...क्या राजस्थान कांग्रेस अब जाट कांग्रेस हो चुकी है?
केशावत ने स्पष्ट किया कि वह किसी जाति-धर्म के विरोधी नहीं हैं, लेकिन संवैधानिक अधिकारों की बात होने पर इस मुद्दे को उठाना जरूरी समझते हैं। उन्होंने कांग्रेस में जातीय संतुलन को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए लिखा कि किसान, मजदूर, युवा, दलित और अल्पसंख्यक केवल "दरी बिछाने" तक सीमित रह गए हैं, जबकि प्रमुख पदों पर कुछ खास जातियों का ही वर्चस्व बढ़ता जा रहा है।
कांग्रेस पर आरोप: दलित-अल्पसंख्यकों की अनदेखी?
केशावत के बयान के बाद यह सवाल खड़ा हो गया है कि क्या राजस्थान कांग्रेस में अन्य वर्गों, विशेषकर दलितों और अल्पसंख्यकों को नजरअंदाज किया जा रहा है? उन्होंने तर्क दिया कि पार्टी में अब सत्ता के प्रमुख केंद्र कुछ ही खास जातियों तक सिमट गए हैं, जबकि अन्य समुदाय केवल कार्यकर्ता स्तर पर ही सीमित रह गए हैं।
राजनीतिक हलकों में हलचल
केशावत के इस बयान के बाद राजस्थान की राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। उनके बयान से कांग्रेस में भीतरखाने नाराजगी पनप सकती है, क्योंकि यह मुद्दा पहले भी कई बार उठ चुका है। हालांकि, कांग्रेस पार्टी की ओर से अभी तक इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। राजस्थान में कांग्रेस लंबे समय से जातीय संतुलन साधने का प्रयास करती रही है, लेकिन केशावत के बयान ने यह संकेत दे दिया है कि अंदरूनी असंतोष अभी भी बरकरार है। अब देखना होगा कि पार्टी इस मसले पर क्या रुख अपनाती है और क्या केशावत के बयान से कोई नई राजनीतिक बहस जन्म लेती है?