LokSabha: किसकी बनेगी हैट्रिक, कौन होगा हिट विकेट ? जानिए क्या कहती है राजस्थान की 10 हॉट सीटों पर सियासी गणित
LokSabha: राजस्थान में मौसम के मिजाज की तरह लोकसभा चुनावों में भी सियासी पारा दिन ब दिन बढ़ते जा रहा है। बीजेपी ने राजस्थान में पिछले दो लोकसभा चुनावों में सभी 25 सीटें जीती है और इस बार हैट्रिक बनाने का दावा कर रही है। कांग्रेस के भी अपने दावे हैं, लेकिन मेवाड़ से मारवाड़ और हाड़ौती से ढूंढ़ाड़ तक करीब 10 सीटें ऐसी हैं, जहां मुकाबला कांटे का कहा जा सकता है। जानिए कौन सी हैं ये सीटें और क्या हैं यहां के समीकरण।
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जिन हॉट सीटों की बात की जा रही है। उनमें बाड़मेर, जोधपुर, बांसवाड़ा-डूंगरपुर, कोटा, नागौर, चूरू, झुंझुनू, सीकर, दौसा और टोंक-सवाई माधोपुर शामिल हैं। कांग्रेस की बात करें तो पार्टी से ज्यादा यहां प्रत्याशी के चेहरे पर दारोमदार है। वहीं बीजेपी मोदी और संगठन के दम पर चुनाव लड़ रही है। चुनाव आगे बढ़ने के साथ-साथ यहां सियासी बयानों के भी तीर चल रहे हैं।
सीकर-कांग्रेस-सीपीएम में गठजोड़ पर वोट ट्रांसफर बड़ी चुनौती
सीकर सीट से इंडिया गठबंधन में शामिल सीपीआई के अमराराम चुनाव मैदान में है। बीजेपी ने यहां से अपने सिटिंग सांसद सुमेधानंद सरस्वती को उम्मीदवार बनाया है। विधानसभा चुनावों में भले ही सीकर में कांग्रेस भारी रही है। लेकिन पिछले 5 लोकसभा चुनावों की बात करें तो यहां 4 बार बीजेपी जीती है। हालांकि सीपीएम का यहां अपना वोट भी है, लेकिन कांग्रेस का वोट भी अगर उन्हें ट्रांसफर हो जाता है तो मुकाबला बेहद रोचक होगा।
नागौर- यहां पार्टी नहीं, लड़ाई हनुमान और ज्योति के बीच
नागौर सीट से राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के संयोजक हनुमान बेनीवाल इंडिया गठबंधन के प्रत्याशी के तौर पर चुनाव मैदान में हैं। बेनीवाल 2019 में बीजेपी गठबंधन प्रत्याशी के तौर पर सांसद चुने गए थे। बीजेपी ने यहां ज्योति मिर्धा को उम्मीदवार बनाया है, जो पहले कांग्रेस में थीं। बीजेपी ने नागौर में अपनी मजबूती के लिए यहां के कांग्रेस के कई नेताओं को पार्टी में शामिल किया है। पिछले पांच लोकसभा चुनावों में से बीजेपी यहां 2 बार जीती है। एक बार बीजेपी के समर्थन से आरएलपी के हनुमान बेनीवाल जीते और दो बार कांग्रेस।
चूरू-कस्वां की बगावत ने मुकाबले को रोचक बनाया
चूरू सीट से कांग्रेस ने राहुल कस्वां को मैदान में उतारा है। वह पिछले दो चुनाव में वह बीजेपी के टिकट पर जीते थे, लेकिन इस बार कांग्रेस पार्टी से मैदान में है। उनका सीधा मुकाबला पैरालंपिक खिलाड़ी देवेंद्र झाझड़िया से है, लेकिन यहां कस्वां का असल मुकाबला बीजेपी नेता राजेंद्र राठौड़ से है। राठौड़ से अदावत के बाद बीजेपी ने उनका टिकट काट दिया और इसके चलते इस सीट पर मुकाबला जाट और राजपूत पर चला गया।
जैसलमेर- सिर्फ यहीं त्रिकोणीय मुकाबला
जैसलमेर-बाड़मेर सीट पर इस बार त्रिकोणीय मुकाबला तय है। निर्दलीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी यहां आज नामांकन भरेंगे। बीजेपी ने यहां दो बार के सांसद और केंद्रीय मंत्री कैलाश चौधरी को फिर से उतारा है। कांग्रेस के उम्मेदाराम बेनीवाल हैं जो विधानसभा में आरएलपी के टिकट पर बाड़मेर की बायतू सीट से चुनाव लड़े थे। कहा जा सकता है कि बाड़मेर इस बार राजस्थान की सबसे हॉट सीट होने वाली है।
सवाईमाधोपुर: पायलट के प्रभाव वाली सीट
सवाईमाधोपुर सीट पर कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव सचिन पायलट की साख दांव पर लगी हुई है। पार्टी ने यहां से पायलट के समर्थक माने जाने वाले हरीश मीना को मैदान में उतारा है। वहीं, बीजेपी ने यहां से सुखबीर सिंह जौनपुरिया को टिकट दिया है। हालांकि टिकट बंटवारे से पहले जौनपुरिया की जगह सुनीता बैंसला का नाम तेजी से चला, लेकिन अंत में पार्टी ने टिकट रिपीट करने का ही फैसला लिया।
दौसा- यहां कांग्रेस का सबसे मजबूत प्रत्याशी
दौसा सीट पर इस बार कांग्रेस के मुरारीलाल मौना और बीजेपी के कन्हैयालाल मीणा का मुकाबला होना है। मुरारीलाल मीणा सचिन पायलट के करीबी माने जाते हैं। मुरारी लाल मीणा यहां दौसा लोकसभा में ही आने वाली दौसा विधानसभा सीट से विधायक हैं। कांग्रेस इस सीट पर खुद को सबसे ज्यादा मजबूत मानकर चल रही है।
झुंझुनूं- ना, ना करते ओला मैदान में उतरे
झुंझुनूं सीट पर कांग्रेस के ओला परिवार का लंबे समय तक दबदबा रहा है। कांग्रेस ने यहां से बृजेन्द्र ओला को चुनाव मैदान में उतारा है। हालांकि ओला लोकसभा चुनाव नहीं लड़ना चाहते थे। यह बात उन्होंने सार्वजनिक रूप से कही भी। उनका मुकाबला बीजेपी के शुभकरण चौधरी से है। जाट बाहुल्य इस सीट पर 20 लाख से ज्यादा वोटर्स हैं। यहां जाटों का रुख जिस तरफ जीत उस तरफ चल पड़ती है।
कोटा- बिड़ला ही हैट्रिक या हिट विकेट
कोटा सीट पर बीजेपी के बागी प्रहलाद गुंजल अब कांग्रेस के प्रत्याशी हैं और उनका मुकाबला बीजेपी के ओम बिड़ला से है। बिड़ला ने 2003, 2008, 2013 का विधानसभा चुनाव में जीत की हैट्रिक लगाई। 2014 व 2019 का लोकसभा चुनाव जीतने के बाद 2024 में लोकसभा में जीत की हैट्रिक की तैयारी। इधर प्रहलाद गुंजल भी हाड़ौती के बड़े नेता माने जाते हैं। उनकी छवि यहां तेज-तर्रार नेता की है। हालांकि यहां जीत उसी की होती है जो भितरघात से निपटना जानता है।
बांसवाड़ा- कांग्रेस का दावं BAP पर
बांसवाड़ा सीट से कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए महेंद्रजीत सिंह मालवीया को टिकट मिला है। मालवीय के साथ यहां कांग्रेस के कई और नेता भी बीजेपी में आए हैं। वहीं कांग्रेस ने यहां रणनीतिक पहल करते हुए बीएपी को ही अपना समर्थन दे दिया। हालांकि कांग्रेस ने बीएपी से गठबंधन का ऐलान नहीं किया, लेकिन अपना प्रत्याशी भी नहीं उतारा जिसका फायदा बीएपी को ही मिलेगा।