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राजस्थान के 16 जिलों में सूखे का संकट: 16 हजार से अधिक गांवों में पानी-चारे की किल्लत, कब मिलेगी विशेष राहत?

Fri, 02 Oct 2026 10:41 AM IST
हिमांशु सिंह बघेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: हिमांशु सिंह बघेल Updated Fri, 02 Oct 2026 10:41 AM IST
सार

राजस्थान के 16 जिलों में सूखे और अकाल की स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार विशेष राहत योजना तैयार कर रही है। करीब 16,400 गांवों और 52 शहरों में पेयजल, चारे और रोजगार का संकट सामने आया है।

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Rajasthan Drought Crisis Water and Fodder Scarcity in Over 16000 Villages Across 16 Districts
सूखा - फोटो : AI Generated

विस्तार

राज्य सरकार पश्चिमी और मध्य राजस्थान के विस्तृत क्षेत्रों में गंभीर अकाल और सूखे से निपटने के लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार कर रही है। प्रदेश के 16 जिलों के करीब 16,400 गांवों और 52 शहरों में पेयजल, चारा और रोजगार के गंभीर संकट को देखते हुए चार वरिष्ठ भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी विशेष एक्शन प्लान तैयार कर रहे हैं। अगले 15 दिनों में इस विस्तृत राहत योजना को सामने लाया जाएगा। इसके बाद सूखा प्रभावित क्षेत्रों के लिए विशेष वित्तीय पैकेज की घोषणा हो सकती है।
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सूखे की चपेट में 16 जिले
सूखे की मार सबसे अधिक पश्चिमी राजस्थान के नौ और मध्य राजस्थान के दो जिलों सहित कुल 16 जिलों पर पड़ी है। इन इलाकों के अधिकतर हिस्सों में सामान्य से 33 प्रतिशत बारिश भी नहीं हुई है। अत्यधिक प्रभावित क्षेत्रों में बाड़मेर के 2,460 गांव, जोधपुर के 1,838 गांव, नागौर के 1,589 गांव और जयपुर के 1,400 गांव शामिल हैं। इसके अलावा बालोतरा के 1,216 गांव, जालोर के 1,117 गांव, अजमेर के 1,134 गांव, पाली के 1,030 गांव, फलोदी के 1,064 गांव, जैसलमेर के 961 गांव, चूरू के 934 गांव, बीकानेर के 919 गांव, ब्यावर के 787 गांव और सिरोही के 530 गांव अकाल की चपेट में हैं।
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राहत कार्यों के लिए पहला कदम
आपदा प्रबंधन, जलदाय, जल संसाधन तथा ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभागों के अधिकारी मिलकर इस संकट से निपटने के लिए एक्शन प्लान तैयार कर रहे हैं। सरकार ने पेयजल संकट दूर करने के लिए 650 वाहन और 3,200 श्रमिक तैनात किए हैं। बंद पड़े हैंडपंपों की तत्काल मरम्मत के लिए 150 वाहनों की स्वीकृति दी गई है। स्थानीय स्तर पर त्वरित कार्यवाही के लिए जिला कलेक्टर को आपातकालीन मद से 75 लाख रुपये तक खर्च करने का अधिकार दिया गया है। साथ ही जिला कलेक्टर अपने स्तर पर जल व्यवस्था के लिए 25 लाख रुपये स्वीकृत कर सकते हैं।
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राज्य स्तरीय जल प्रबंधन रणनीति
मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने बताया है कि उपलब्ध जल और अतिरिक्त आवश्यकता का आकलन करते हुए राज्य स्तरीय एक्शन प्लान तैयार किया जा रहा है। इंदिरा गांधी नहर परियोजना से जुड़े जिलों के लिए अलग योजना बनाई जाएगी। प्रभावित क्षेत्रों में जल वितरण की नियमित मॉनिटरिंग को और सख्त किया जाएगा, ताकि आमजन और पशुधन के लिए पर्याप्त पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके।
 
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