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Rajasthan: स्कीम बनाम स्कैम पर टिका चुनाव, भाजपा ने राज बदलने के लिए लगाया जोर, गहलोत भी कर रहे संघर्ष

Sat, 04 Nov 2023 05:54 AM IST
जलज मिश्रा प्रेम प्रताप सिंह, जयपुर
प्रेम प्रताप सिंह, जयपुर Published by: जलज मिश्रा Updated Sat, 04 Nov 2023 05:54 AM IST
सार

सीएम अशोक गहलोत साहब की बहुत सारी योजनाओं से लोगों को फायदा भी मिल रहा है, लेकिन विधायकों से बहुत नाराजगी है। बस अपना और अपने लोगों का काम कर रहे थे। मिनी सीएम बने हुए थे।

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Rajasthan Assembly Election BJP And congress focusing on win
Rajasthan Election 2023 - फोटो : AMAR UJALA

विस्तार

राजस्थान का राज बदलने के लिए भाजपा ने रणनीति बदली है। पहली बार यहां बिना किसी स्थानीय चेहरे के चुनाव लड़ने जा रही है। चुनाव के केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे को रखा गया है। जबकि प्रदेश में  25 साल से एक बार कांग्रेस और एक बार भाजपा की सरकार बनाने का रिवाज चल रहा है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपना राज कायम रखने और इस रिवाज को बदलने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा दी है। उनकी कोशिश है कि इस बार हर हाल में अपनी योजनाओं के दम पर सरकार रिपीट करा लेंगे, लेकिन उन्हें इस बार न तो राहुल गांधी का साथ मिल रहा है और न ही युवा नेता सचिन पायलट की सक्रियता  है। ऐसे में चुनाव में राज और रिवाज बदलने के बीच दिलचस्प संघर्ष देखने को मिल रहा है।
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कांग्रेस विधायकों से नाराजगी
जयपुर के गांधी नगर रेलवे स्टेशन के बाहर निकलते ही होर्डिंग सियासी तस्वीर दिखाने लगते हैं। कांग्रेस के हर होर्डिंग में केवल पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और सीएम अशोक गहलोत के चेहरे को हाइलाइट किया गया है, जिस पर लिखा है काम किया दिल से, कांग्रेस फिर से। जबकि भाजपा के होर्डिंग के बीच में पीएम मोदी का राजस्थानी साफा पहने तस्वीर। उनके एक ओर वसुंधरा राजे-राजेंद्र राठौड़ तो दूसरी ओर जेपी नड्डा और प्रदेश अध्यक्ष सीपी जोशी का चेहरा है। इस पर लिखा है खुशहाल राजस्थान बनाएंगे, भाजपा को लाएंगे। इन होर्डिंग को देखने को बाद उबर चालक बिजेंद्र सिंह से पूछा-इस बार किसकी सरकार आ रही है? इस पर बिजेंद्र सिंह ने कहा, कुछ ज्यादा पता ही नहीं चल रहा है। सीएम अशोक गहलोत साहब की बहुत सारी योजनाओं से लोगों को फायदा भी मिल रहा है, लेकिन विधायकों से बहुत नाराजगी है। बस अपना और अपने लोगों का काम कर रहे थे। मिनी सीएम बने हुए थे। मालवीय नगर इलाके मंे बत्रा मेडिकल स्टोर चलाने वाले रवि बत्रा कहते है कि पहले गहलोत की मुफ्त योजनाओं की चर्चा हो रही थी, लेकिन अब माहौल बदल गया है। पार्टी ने दूसरी सूची में वसुंधरा समर्थकों को टिकट देकर बड़ा मैसेज दे दिया है। इससे टकराव वाली स्थिति खत्म होती नजर आ रही है।
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विधानसभा की कुल सीट 200
पार्टी 2018 2013
कांग्रेस 100 21
बीजेपी 73 163
आरएलपी 03 00
बसपा 06 03
सीपीआईएम 02 00
बीटीपी   02 00
निर्दलीय/अन्य 14 13
कुल 200 200


ओपीएस ठीक, लेकिन वेतन विसंगति दूर नहीं
अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी महसंघ एकीकृत के प्रदेश अध्यक्ष गजेंद्र सिंह राठौड़ कहते हैं कि ओपीएस को लेकर कर्मचारी खुश है। लेकिन कांग्रेस ने 2018 के चुनावी घोषणा में किए गए वादों को पूरा नहीं कर पाई। वेतन विसंगतियां दूर करने का वादा था और ग्रेड पे रिवाइज करने के लिए कहा था, लेकिन उस पर आज तक एक्शन नहीं किया गया। इससे कर्मचारी हताश और निराश है।
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कर्नाटक की तर्ज पर गारंटी
विधायकों के प्रति लोगों में नाराजगी दूर कर सरकार की सकारात्मक छवि बनाने की कोशिश में कनार्टक कांग्रेस की तर्ज पर राजस्थान में भी कांग्रेस ने गारंटी दी है। इसमें महिलाओं को 500 रुपये में गैस सिलिंडर, 25 लाख रुपये की स्वास्थ्य चिरंजीवी योजना, 10 लाख रुपये की दुर्घटना बीमा चिरंजीवी योजना, 100 यूनिट बिजली फ्री, किसानों को दो हजार यूनिट फ्री बिजली, कामधेनू पशु बीमा योजना के तहत पशुपालकों को दो पशुओं तक 40 हजार रुपये की बीमा, मनरेगा और शहरी रोजगार गारंटी योजना के तहत 125 दिन का रोजगार और पेंशन योजनाओं की रकम बढ़ाकर एक हजार रुपये की थी।  

भाजपा ने भ्रष्टाचार को बनाया हथियार
भाजपा के पास पेपर लीक (स्कैम) का सबसे बड़ा मुद्दा है । पार्टी के मुताबिक, 17 परीक्षाओं के पेपर लीक हुए, जिससे राज्य के 50 लाख से अधिक युवाओं का भविष्य का नुकसान हुआ है। कांग्रेस ने साढ़े तीन हजार रुपये बेरोजगारी भत्ता देने का वादा भी पूरा नहीं किया। जल जीवन घोटाला सहित अन्य मामलों को उठा रही है।


कन्हैयालाल हत्याकांड
जयपुर बम ब्लास्ट के हत्यारे बरी होने, कन्हैया लाल हत्याकांड जैसे मामलों को प्रमुखता से उठाया जा रहा है। अलवर के तिजारा से भाजपा प्रत्याशी के नामांकन के दौरान यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने कन्हैयालाल हत्याकांड को हवा दी। कहा कि ऐसी घटना यूपी में हुआ होता तो आपको पता है ....क्या हुआ होता। भाजपा मान रही है कि गहलोत और पायलट आपस में ही पांच साल तक लड़ते रहे, जिससे प्रदेश के लोगों में नाराजगी है।
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