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LPG Crisis: गैस संकट का जायके पर बड़ा असर; कोटा-सीकर की मेस थाली से गायब हो गए पकवान; मिल रहा सूखा नाश्ता
Thu, 12 Mar 2026 04:25 PM IST
Sourabh Bhatt
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: Sourabh Bhatt
Updated Thu, 12 Mar 2026 04:25 PM IST
सार
LPG Crisis: गैस सिलिंडरों की किल्लत का असर कोटा-सीकर की मेसों की थालियों तक पहुंच गई है। पहले जहां छात्रों को सुबह शाम गर्मा गर्म नाश्ता परोसा जाता था, वहां अब उन्हें सूखा नाश्ता परोसा जा रहा है।
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एलपीजी सिलिंडर की कमी
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
राजस्थान में एलपीजी गैस की सप्लाई गड़बड़ाने से होस्टल का जायका बदलने लगा है। यहां की होस्टलों में रहने वाले छात्र-छात्राओं को सूखा नाश्ता मिल रहा है। इसके अलावा दोपहर और रात के भोजन की थाली से पकवान भी गायब हो गए हैं। ऐसी चीजें बनाई जा रही हैं, जो कम ईंधन में जल्दी बन जाएं।
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सरकारी दावे फेल; हॉस्टल्स की मैस पर भी जबरदस्त असर
कोटा-सीकर में हॉस्टल मेस पर भी गैस सिलिंडर की कमी असर देखने को मिला है। कोटा हॉस्टल्स एसोसिएशन के अध्यक्ष नवीन मित्तल का कहना है कि सिलिंडरों की भारी किल्लत ने हॉस्टल्स की थाली खराब हो चुकी है। उन्हाेंने कहा कि कोटा में करीब 500 मेस हैं जिनमें प्रति दिन करीब 25 से 30 हजार छात्र खाना खा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने भले ही शैक्षणिक संस्थानों के लिए पर्याप्त आपूर्ति का दावा कर रही है लेकिन ऐसा धरातल पर नहीं हो रहा है। उन्होंने बताया कि हॉस्टल में पहले छात्रों को तीन डिश दी जाती थी जिसे घटाकर अब एक कर दिया गया है। सुबह-शाम भी अब ड्राई नाश्ता ही दिया जा रहा है।
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ये भी पढ़ें : कोटा में कॉमर्शियल सिलेंडर की कमी से छात्रों के खाने पर संकट, हॉस्टल-मैस संचालकों के सामने चुनौती
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वहीं कोटा में रोजाना छात्रों को भोजन करानी वाली कई अस्थाई मेस बंद कर दी गई हैं। यहां खाना खाने वाले छात्र अन्य जगह भोजन के लिए बुकिंग करा रहे हैं। उनकी निर्भरता ऑनलाइन एप पर ज्यादा हो गई है। वहां पर भी खाद्य पदार्थों की कीमते बढ़ गई हैं। वहीं कुछ मेसों में भोजन तैयार करने के लिए लकड़ी और कोयले का सहारा लिया जा रहा है।
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