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Jhalawar School Collapsed: झालावाड़ हादसे पर प्रशासन ने दी खुद को क्लीन चिट, जिम्मेदारी ग्राम पंचायत पर डाली
Sat, 26 Jul 2025 08:50 PM IST
आशुतोष प्रताप सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,झालावाड़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,झालावाड़
Published by: आशुतोष प्रताप सिंह
Updated Sat, 26 Jul 2025 08:50 PM IST
सार
झालावाड़ के पिपलोदी गांव के राजकीय प्राथमिक विद्यालय में दीवार गिरने से एक छात्रा की मौत और तीन बच्चों के घायल होने के 24 घंटे के भीतर जिला शिक्षा प्रशासन ने खुद को क्लीन चिट दे दी है। प्राथमिक जांच रिपोर्ट में हादसे की जिम्मेदारी 1997 में ग्राम पंचायत द्वारा बनाए गए कक्षों पर डाल दी गई, जबकि शिक्षा विभाग ने अपने निर्माणों को पूरी तरह सुरक्षित बताया है।
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झालावाड़ स्कूल हादसे पर शिक्षा विभाग की क्लीन चिट
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
झालावाड़ जिले के पिपलोदी गांव स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय में दीवार गिरने से एक छात्रा की मौत और तीन बच्चों के घायल होने की घटना के महज 24 घंटे के भीतर शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन ने खुद को क्लीन चिट दे दी है। शुक्रवार को जारी प्राथमिक जांच रिपोर्ट में हादसे की सीधी जिम्मेदारी ग्राम पंचायत पर डाल दी गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, जो कमरे हादसे का शिकार हुए, वे वर्ष 1997 में ग्राम पंचायत द्वारा बनवाए गए थे। प्रशासन का दावा है कि शिक्षा विभाग द्वारा बाद में निर्मित कक्ष पूरी तरह सुरक्षित हैं और वे तय मानकों के अनुसार बने हैं।
1997 का निर्माण, 2024 में हादसा — लेकिन जवाबदेही कौन लेगा?
प्रशासन ने बताया कि हादसे वाले दो कमरे 1997 में ग्राम पंचायत ने बनवाए थे। इन्हीं में से एक कमरे की दीवार गिरने से छात्रा की जान चली गई और तीन अन्य घायल हो गए। चौंकाने वाली बात यह है कि यह भवन न तो जर्जर भवनों की सूची में शामिल था और न ही हाल के वर्षों में इसकी कोई मरम्मत हुई थी।
जिम्मेदारी से पीछे हटा विभाग, पंचायत पर आरोप तय
रिपोर्ट में स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि हादसे वाले पुराने भवन की जिम्मेदारी ग्राम पंचायत की थी। शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने दावा किया है कि विभाग द्वारा बनाए गए भवन सुरक्षित हैं और इंजीनियरिंग के मानकों पर खरे उतरते हैं। इससे साफ संकेत मिलता है कि विभाग पुराने निर्माण से पल्ला झाड़ना चाहता है।
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ये भी पढ़ें: पीड़ित परिजनों से मिलीं वसुंधरा राजे, कहा- मैं भी एक मां हूं, आपका दर्द समझती हूं
प्रशासन ने खुद को बताया बेकसूर, लेकिन उठे कई सवाल
रिपोर्ट में खुद को निर्दोष बताने की कोशिश की गई है, लेकिन कई गंभीर सवाल उठ रहे हैं—
गांववालों का गुस्सा: "मरने के बाद रिपोर्टें क्यों बनती हैं?"
गांव के लोगों का कहना है कि स्कूल भवन की खराब स्थिति को लेकर पहले भी कई बार प्रशासन को सूचित किया गया था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। एक ग्रामीण ने कहा, "अगर समय रहते कार्रवाई होती, तो बच्ची की जान बचाई जा सकती थी। अब सब अपनी जिम्मेदारी से बचने में लगे हैं।" हादसे के बाद सियासत भी गरमा गई है। पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने रिपोर्ट को "रूटीन क्लीन चिट प्रक्रिया" करार दिया और कहा कि यदि शिक्षा विभाग ने समय रहते कदम उठाया होता, तो यह घटना टाली जा सकती थी। उन्होंने कहा, "प्रशासन केवल कागजों में नहीं, ज़मीन पर जवाबदेह बने, तभी ऐसी घटनाएं रुकेंगी।"
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1997 का निर्माण, 2024 में हादसा — लेकिन जवाबदेही कौन लेगा?
प्रशासन ने बताया कि हादसे वाले दो कमरे 1997 में ग्राम पंचायत ने बनवाए थे। इन्हीं में से एक कमरे की दीवार गिरने से छात्रा की जान चली गई और तीन अन्य घायल हो गए। चौंकाने वाली बात यह है कि यह भवन न तो जर्जर भवनों की सूची में शामिल था और न ही हाल के वर्षों में इसकी कोई मरम्मत हुई थी।
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जिम्मेदारी से पीछे हटा विभाग, पंचायत पर आरोप तय
रिपोर्ट में स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि हादसे वाले पुराने भवन की जिम्मेदारी ग्राम पंचायत की थी। शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने दावा किया है कि विभाग द्वारा बनाए गए भवन सुरक्षित हैं और इंजीनियरिंग के मानकों पर खरे उतरते हैं। इससे साफ संकेत मिलता है कि विभाग पुराने निर्माण से पल्ला झाड़ना चाहता है।
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ये भी पढ़ें: पीड़ित परिजनों से मिलीं वसुंधरा राजे, कहा- मैं भी एक मां हूं, आपका दर्द समझती हूं
प्रशासन ने खुद को बताया बेकसूर, लेकिन उठे कई सवाल
रिपोर्ट में खुद को निर्दोष बताने की कोशिश की गई है, लेकिन कई गंभीर सवाल उठ रहे हैं—
- क्या 27 वर्षों में कभी इन कमरों की स्थिति की समीक्षा नहीं की गई?
- क्या शिक्षा विभाग या पंचायत ने कभी इन कक्षों को बंद करने या सुरक्षित करने की कोशिश की?
- क्या हादसे से पहले स्कूल प्रशासन या ग्रामीणों द्वारा कोई शिकायत नहीं दी गई थी?
गांववालों का गुस्सा: "मरने के बाद रिपोर्टें क्यों बनती हैं?"
गांव के लोगों का कहना है कि स्कूल भवन की खराब स्थिति को लेकर पहले भी कई बार प्रशासन को सूचित किया गया था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। एक ग्रामीण ने कहा, "अगर समय रहते कार्रवाई होती, तो बच्ची की जान बचाई जा सकती थी। अब सब अपनी जिम्मेदारी से बचने में लगे हैं।" हादसे के बाद सियासत भी गरमा गई है। पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने रिपोर्ट को "रूटीन क्लीन चिट प्रक्रिया" करार दिया और कहा कि यदि शिक्षा विभाग ने समय रहते कदम उठाया होता, तो यह घटना टाली जा सकती थी। उन्होंने कहा, "प्रशासन केवल कागजों में नहीं, ज़मीन पर जवाबदेह बने, तभी ऐसी घटनाएं रुकेंगी।"