Jaipur News: जयपुर हेरिटेज मेयर मुनेश गुर्जर के निलंबन पर संशय बरकरार, एसीबी ने चार्जशीट के लिए मांगी मोहलत
जयपुर हेरिटेज नगर निगम की मेयर मुनेश गुर्जर के निलंबन को लेकर चर्चाओं का नया दौर शुरू हो गया है। हाल ही में यूडीएच मंत्री ने संकेत दिया था कि गुर्जर का निलंबन तब तक नहीं होगा जब तक एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) कोर्ट में चार्जशीट पेश नहीं करती। एसीबी ने अब चार्जशीट पेश करने के लिए 14 दिन का समय मांगा है, जिससे गुर्जर की स्थिति पर अनिश्चितता बनी हुई है।
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जयपुर हेरिटेज नगर निगम की मेयर मुनेश गुर्जर को लेकर एक बार फिर से चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। यूडीएच मंत्री के हालिया बयान के बाद यह संभावना जताई जा रही है कि मुनेश गुर्जर को कुछ समय के लिए राहत मिल सकती है। मंत्री ने स्पष्ट किया था कि जब एसीबी (एंटी करप्शन ब्यूरो) कोर्ट में चार्जशीट प्रस्तुत करेगी, तभी मुनेश गुर्जर का निलंबन होगा। अब एसीबी ने कोर्ट में चार्जशीट पेश करने के लिए 14 दिन का समय मांगा है। इस समयावधि के दौरान मुनेश गुर्जर के भविष्य को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं।
इससे पहले ग्रेटर नगर निगम की पूर्व मेयर सौम्या गुर्जर भी इसी प्रकार की स्थिति का सामना कर चुकी थीं। उन्होंने हाईकोर्ट से स्टे लेकर वापसी की थी, लेकिन सरकार ने उनके स्टे को मान्यता नहीं दी और कार्यवाहक मेयर के रूप में सील दवाई को नियुक्त कर दिया था।
वर्तमान स्थिति में अगर मुनेश गुर्जर भी कोर्ट से स्टे लेकर आती हैं, तो क्या सरकार इस बार भी उनके स्टे को मानने से इंकार करेगी या उन्हें मेयर पद पर बने रहने देगी? यह सवाल महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि आगामी चुनावों में अब सिर्फ सवा साल का समय बचा है।
इसके अलावा, भारतीय जनता पार्टी के आंतरिक राजनीतिक समीकरण भी इस मामले में अहम भूमिका निभा सकते हैं। गुर्जर समुदाय की नाराजगी से बचने के लिए पार्टी के बड़े नेता शायद मुनेश गुर्जर को राहत देने पर विचार कर सकते हैं। साथ ही उत्तर प्रदेश में होने वाले आगामी चुनावों में गुर्जर बाहुल्य क्षेत्रों को ध्यान में रखते हुए, पार्टी किसी भी प्रकार की नाराजगी मोल नहीं लेना चाहेगी। ऐसे में यह देखा जाना बाकी है कि क्या मुनेश गुर्जर को कोर्ट से राहत मिलेगी और क्या भारतीय जनता पार्टी उन्हें हेरिटेज मेयर के पद पर बनाए रखने का निर्णय करेगी।