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राजस्थान में गरमाई सियासत: विजय कौशिक का बड़ा आरोप- सरकार प्रायोजित कॉकरोच पार्टी चला रही

Thu, 27 Aug 2026 01:46 PM IST
जयपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: जयपुर ब्यूरो Updated Thu, 27 Aug 2026 01:46 PM IST
सार

Rajasthan News: राजस्थान में स्वर्ण समाज के आंदोलन और यूजीसी से जुड़े मुद्दों को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। राष्ट्रीय हिंदू महासभा के अध्यक्ष विजय कौशिक ने सरकार पर कथित तौर पर दोहरे रवैये और समाज को बांटने की रणनीति अपनाने का आरोप लगाया।

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Government Did Not Want Dharmendra Pradhan to Resign Due to Swarna Movement: Vijay Kaushi
विजय कौशिक - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजस्थान में आगामी पंचायती राज और शहरी निकाय चुनावों के बीच स्वर्ण समाज से जुड़े आंदोलन ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। राष्ट्रीय हिंदू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष विजय कौशिक ने अमर उजाला से बातचीत के दौरान सरकार और राजनीतिक दलों पर तीखा हमला बोलते हुए एक कथित आंदोलन को ‘सरकार द्वारा प्रायोजित कॉकरोच पार्टी’ करार दिया। कौशिक ने आरोप लगाया कि जिस आंदोलन में कथित तौर पर देशविरोधी, मनुवाद विरोधी और ब्राह्मण विरोधी नारे लगाए गए, उसके खिलाफ सरकार ने अपेक्षित कार्रवाई नहीं की, जबकि स्वर्ण समाज की ओर से यूजीसी के प्रावधानों के विरोध में चल रहे आंदोलन पर सख्ती की जा रही है।
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आंदोलन को लेकर सरकार की भूमिका पर उठाए सवाल
कौशिक ने कहा कि एक व्यक्ति के बाहर से आकर एयरपोर्ट पर अनुमति लेने और इसके बाद भूख हड़ताल पर बैठने से लेकर कई दिनों तक आंदोलन जारी रहने तक सरकार की भूमिका पर सवाल खड़े होते हैं। उनके अनुसार, उस दौरान कथित तौर पर कई प्रकार के विवादित नारे लगाए गए, लेकिन सरकार ने संबंधित लोगों के खिलाफ वैसी कार्रवाई नहीं की, जैसी स्वर्ण समाज के आंदोलनकारियों के खिलाफ की जा रही है।
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‘सरकार समाज को बांटने की रणनीति पर काम कर रही’
कौशिक ने इसी संदर्भ में ‘सरकार द्वारा प्रायोजित कॉकरोच पार्टी’ शब्द का इस्तेमाल करते हुए आरोप लगाया कि सरकार की रणनीति समाज को अलग-अलग वर्गों में बांटने की है। उनका कहना था कि सरकार को यह अंदाजा था कि यदि स्वर्ण समाज के आंदोलन के दबाव में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लिया जाता है, तो सामाजिक समीकरण प्रभावित हो सकते हैं। कौशिक ने दावा किया कि जिस मुद्दे को लेकर स्वर्ण समाज आंदोलन कर रहा था, उस पर सरकार ने उनकी मांग स्वीकार नहीं की, जबकि दूसरे आंदोलन के दबाव में कार्रवाई की गई।

यूजीसी रोलबैक की मांग पर आंदोलन जारी
उन्होंने यूजीसी से जुड़े प्रावधानों को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। कौशिक का कहना है कि उनका मुख्य मुद्दा यूजीसी रोलबैक है और इसी मांग को लेकर आंदोलन आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राजस्थान से लेकर चंडीगढ़ तक पैदल यात्राएं की गई हैं और आंदोलनकारियों के पैरों में पड़े छालों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह पीड़ा आंदोलन की गंभीरता को दर्शाती है। उन्होंने दावा किया कि आने वाले समय में दिल्ली में बड़ी संख्या में लोगों को एकत्र कर आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर ले जाया जाएगा।

आंदोलन के साथ टिकट की तलाश पर उठाए सवाल
विजय कौशिक ने आंदोलन से जुड़े उन नेताओं पर भी सवाल उठाए, जो एक तरफ स्वर्ण समाज के मुद्दों और यूजीसी रोलबैक की मांग के समर्थन में दिखाई देते हैं, वहीं दूसरी तरफ राजनीतिक दलों से चुनावी टिकट मांग रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि कोई नेता वास्तव में यूजीसी के मुद्दे पर सरकार और राजनीतिक दलों का विरोध कर रहा है तो उसे यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि वह उन्हीं दलों से टिकट लेने की कोशिश क्यों कर रहा है। कौशिक के मुताबिक, आंदोलन का उद्देश्य राजनीतिक टिकट हासिल करना नहीं, बल्कि नीतिगत बदलाव के लिए दबाव बनाना है।

‘आंदोलन के नाम पर दोनों हाथों में लड्डू नहीं’
उन्होंने दावा किया कि जयपुर में मौजूदगी के दौरान उनके पास भी कई लोगों के फोन आए, जिनमें राजनीतिक दलों से टिकट के लिए सिफारिश करने का आग्रह किया गया। कौशिक ने कहा कि उन्होंने ऐसे लोगों से स्पष्ट कर दिया कि यदि वे यूजीसी रोलबैक की मुहिम का समर्थन करते हैं तो वह उनके पक्ष में बात करने को तैयार हैं, लेकिन केवल टिकट हासिल करने के लिए आंदोलन का इस्तेमाल करने वालों का समर्थन नहीं किया जाएगा। उनके मुताबिक, कुछ लोग दोनों हाथों में लड्डू रखना चाहते हैं- आंदोलन का समर्थन भी और राजनीतिक दलों से टिकट भी।


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चुनाव में नेताओं से जवाब मांगेगी जनता
कौशिक ने कहा कि लोकतंत्र में चुनाव लड़ना और राजनीतिक दल से टिकट मांगना प्रत्येक व्यक्ति का अधिकार है, लेकिन आंदोलन के मंच से किसी नीति का विरोध करने वाले नेताओं की राजनीतिक भूमिका भी जनता के सामने स्पष्ट होनी चाहिए। उन्होंने संकेत दिया कि जनता आने वाले चुनावों में ऐसे नेताओं और उम्मीदवारों से उनके रुख को लेकर सवाल करेगी। उनका कहना था कि केवल पर्दे के पीछे आंदोलन का समर्थन करने से काम नहीं चलेगा, बल्कि सार्वजनिक रूप से भी यूजीसी के मुद्दे पर स्पष्ट रुख लेना होगा।

‘प्रमुख दलों ने नहीं लिया स्पष्ट रुख’
उन्होंने यह भी दावा किया कि अब तक किसी भी प्रमुख राजनीतिक दल के सभी नेताओं ने यूजीसी के मुद्दे पर जिस तरह का स्पष्ट विरोध अपेक्षित था, वह नहीं किया। कौशिक के अनुसार, आगामी चुनाव जनता को यह तय करने का अवसर देंगे कि कौन-सा उम्मीदवार उनके मुद्दों के साथ खड़ा है और कौन केवल चुनावी राजनीति कर रहा है।
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