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Jaipur News: भाजपा अनुशासन समिति से पूर्व प्रवक्ता का सवाल- मेरे लिए अलग नियम, राठौड़ के लिए अलग क्यों?
Thu, 14 Aug 2025 01:00 PM IST
जयपुर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: जयपुर ब्यूरो
Updated Thu, 14 Aug 2025 01:00 PM IST
सार
भाजपा से अनुशासनहीनता के आरोप में निष्कासित पार्टी के पूर्व प्रवक्ता कृष्ण कुमार जानू ने पार्टी की अनुशासन समिति से कुछ सवाल किए हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी में दो अलग-अलग लोगों के लिए अलग-अलग नियम क्यों?
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कृष्ण कुमार जानू
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
राजस्थान भाजपा में अनुशासन को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। हाल ही में पार्टी से निष्कासित किए गए पूर्व प्रवक्ता कृष्ण कुमार जानू ने सोशल मीडिया पर लंबा पोस्ट लिखकर पार्टी की अनुशासन समिति पर गंभीर आरोप लगाए हैं। जानू ने लिखा कि उन्हें मात्र जिला अध्यक्ष को लेकर 6 कार्यकर्ताओं के नाम पूछने पर अनुशासनहीनता के आरोप में पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया, जबकि राजेंद्र राठौड़ ने अखबार में लेख लिखकर केंद्र सरकार की आर्थिक नीति पर सवाल उठाए, राजस्थान को नुकसान होने की बात कही और विपक्ष को मुद्दा दिया। इसके बावजूद उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई।
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व्यंग्य करते हुए जानू ने पूछा कि अगर मुझे उचित मंच पर चर्चा करने की हिदायत दी गई थी, तो राठौड़ साहब किस मंच पर चर्चा कर रहे हैं? क्या उन्हें पार्टी संविधान की किसी धारा में विशेष अधिकार प्राप्त हैं? जानू ने यह भी आरोप लगाया कि अनुशासन समिति में जातीय पक्षपात हो रहा है, राजस्थान भाजपा में जाट के लिए एक कानून और राजपूत के लिए दूसरा कानून है।
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पूर्व प्रवक्ता के अनुसार राठौड़ का आलेख आर्थिक ज्ञान देने से ज्यादा भारत सरकार की आर्थिक नीतियों की असफलताओं को उजागर करने वाला है। उन्होंने सवाल किया कि क्या यह अनुशासन समिति, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, मदन राठौड़ और ओंकारसिंह लाखावत को दिखाई नहीं दे रहा? आखिर पार्टी की मजबूरी क्या है कि राठौड़ पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही, जबकि आज की राजनीति में वे कुछ नहीं होते हुए भी सब कुछ दिखाई देते हैं?
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व्यंग्य करते हुए जानू ने पूछा कि अगर मुझे उचित मंच पर चर्चा करने की हिदायत दी गई थी, तो राठौड़ साहब किस मंच पर चर्चा कर रहे हैं? क्या उन्हें पार्टी संविधान की किसी धारा में विशेष अधिकार प्राप्त हैं? जानू ने यह भी आरोप लगाया कि अनुशासन समिति में जातीय पक्षपात हो रहा है, राजस्थान भाजपा में जाट के लिए एक कानून और राजपूत के लिए दूसरा कानून है।
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पूर्व प्रवक्ता के अनुसार राठौड़ का आलेख आर्थिक ज्ञान देने से ज्यादा भारत सरकार की आर्थिक नीतियों की असफलताओं को उजागर करने वाला है। उन्होंने सवाल किया कि क्या यह अनुशासन समिति, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, मदन राठौड़ और ओंकारसिंह लाखावत को दिखाई नहीं दे रहा? आखिर पार्टी की मजबूरी क्या है कि राठौड़ पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही, जबकि आज की राजनीति में वे कुछ नहीं होते हुए भी सब कुछ दिखाई देते हैं?
