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Crime News: सावधाऩ ! FASTag एनुअल पास के नाम पर खाली हो सकता है आपका खाता, पुलिस ने जारी की चेतावनी
Sat, 14 Feb 2026 07:18 PM IST
सौरभ भट्ट
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: सौरभ भट्ट
Updated Sat, 14 Feb 2026 07:18 PM IST
सार
सावधान : FASTag एनुअल पास के नाम पर आपका खाता खाली हो सकता है। राजस्थान पुलिस ने बड़ी चेतावनी जारी की है। पुलिस के अनुसार गूगल पर नंबर 1 दिखने वाली वेबसाइट भी फर्जी हो सकती है। जानिए इनसे कैसे रहें सावधान-
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fastag toll pass
- फोटो : Adobe Stock
विस्तार
यदि आप अपने वाहन के लिए NHAI FASTag का एनुअल पास बनवाने की सोच रहे हैं, तो जरा संभल जाइए। साइबर ठगों ने अब नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) की हुबहू नकल कर लोगों को ठगने का नया तरीका ढूंढ निकाला है। महानिदेशक पुलिस साइबर क्राइम संजय अग्रवाल ने एडवाइजरी जारी करते हुए आमजन को इस नए फिशिंग स्कैम के प्रति आगाह किया है।
गूगल सर्च के टॉप रिजल्ट में छुपा है ठगी का जाल
डीजीपी अग्रवाल ने बताया कि साइबर अपराधी अब तकनीक का सहारा लेकर बेहद शातिर हो गए हैं। ये ठग Google Ads और SEO का इस्तेमाल कर अपनी फर्जी वेबसाइटों को सर्च इंजन में सबसे ऊपर (Rank 1) दिखा रहे हैं। आम तौर पर लोग गूगल पर आने वाले पहले लिंक को असली मान लेते हैं, जबकि अपराधी पैसे देकर अपनी फर्जी साइट को Sponsored टैग के साथ ऊपर दिखाते हैं। इन वेबसाइटों का डिजाइन और लोगो असली NHAI पोर्टल जैसा ही होता है, जिससे पहचान करना मुश्किल हो जाता है।
एडवाइजरी के अनुसार ये फर्जी वेबसाइटें वार्षिक पास के लिए करीब 3000 रुपए के भुगतान की मांग करती हैं। पेमेंट के लिए वहां एक क्यूआर कोड दिया जाता है। जैसे ही कोई व्यक्ति इसे स्कैन करता है, पैसा सरकारी खाते में जाने के बजाय अपराधियों के म्यूल अकाउंट में ट्रांसफर हो जाता है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि सरकारी भुगतान कभी भी किसी व्यक्ति विशेष के नाम पर नहीं मांगे जाते।
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यह भी पढें- Rajasthan: जयपुर में दर्दनाक सड़क हादसा, दो लड़कियों की मौत, पिकअप का टायर फटने से वाहन पलटा
असली और नकली की पहचान: इन बातों का रखें खास ख्याल
आधिकारिक प्लेटफॉर्म: पास खरीदने या रिन्यू करने के लिए केवल Rajmarg Yatra आधिकारिक ऐप या अधिकृत बैंक पोर्टल का ही उपयोग करें।
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गूगल सर्च के टॉप रिजल्ट में छुपा है ठगी का जाल
डीजीपी अग्रवाल ने बताया कि साइबर अपराधी अब तकनीक का सहारा लेकर बेहद शातिर हो गए हैं। ये ठग Google Ads और SEO का इस्तेमाल कर अपनी फर्जी वेबसाइटों को सर्च इंजन में सबसे ऊपर (Rank 1) दिखा रहे हैं। आम तौर पर लोग गूगल पर आने वाले पहले लिंक को असली मान लेते हैं, जबकि अपराधी पैसे देकर अपनी फर्जी साइट को Sponsored टैग के साथ ऊपर दिखाते हैं। इन वेबसाइटों का डिजाइन और लोगो असली NHAI पोर्टल जैसा ही होता है, जिससे पहचान करना मुश्किल हो जाता है।
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एडवाइजरी के अनुसार ये फर्जी वेबसाइटें वार्षिक पास के लिए करीब 3000 रुपए के भुगतान की मांग करती हैं। पेमेंट के लिए वहां एक क्यूआर कोड दिया जाता है। जैसे ही कोई व्यक्ति इसे स्कैन करता है, पैसा सरकारी खाते में जाने के बजाय अपराधियों के म्यूल अकाउंट में ट्रांसफर हो जाता है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि सरकारी भुगतान कभी भी किसी व्यक्ति विशेष के नाम पर नहीं मांगे जाते।
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असली और नकली की पहचान: इन बातों का रखें खास ख्याल
आधिकारिक प्लेटफॉर्म: पास खरीदने या रिन्यू करने के लिए केवल Rajmarg Yatra आधिकारिक ऐप या अधिकृत बैंक पोर्टल का ही उपयोग करें।
- - URL को गौर से देखें: annualtollpass.com या annualtollpasss.com जैसे संदिग्ध लिंक से बचें।
- - प्राप्तकर्ता का नाम जांचें: यदि स्कैन करते समय व्यक्तिगत नाम "सरिता देवी" या किसी अन्य व्यक्ति का नाम आए, तो तुरंत रुक जाएं।
- - सजग रहे: ऑनलाइन भुगतान करते समय विशेष सावधानी बरते और किसी भी संदिग्ध लिंग के माध्यम से अपनी बैंकिंग जानकारी शेयर ना करें।
- - ठगी होने पर तुरंत यहां करें शिकायत