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राजस्थान: पंचायत चुनाव नेता पुत्रों को टिकट बंटवारे को लेकर मचा बवाल, कांग्रेस में खुलकर सामने आई नाराजगी

Fri, 23 Oct 2026 03:39 PM IST
सौरभ भट्ट न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: सौरभ भट्ट Updated Fri, 23 Oct 2026 03:39 PM IST
सार

राजस्थान में पंचायत चुनाव के टिकट बंटवारे को लेकर कांग्रेस में नाराजगी सामने आई है। पार्टी नेता सीताराम लांबा ने विधायकों और चुनाव हार चुके प्रत्याशियों के टिकटों पर दबदबे पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर पंचायत चुनाव के टिकटों के मालिक वही हैं, तो संगठन और कार्यकर्ताओं पर ताले लगा देने चाहिए।

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Congress Faces Backlash Over Panchayat Tickets as Sitaram Lamba Says, “Lock Up the Organization”
बीजेपी और कांग्रेस - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

परिवारवाद के आरोपों के बीच राजस्थान के पंचायत चुनाव में टिकट वितरण को लेकर भाजपा और कांग्रेस, दोनों में सवाल उठ रहे हैं। नेताओं के रिश्तेदारों को टिकट मिलने के साथ ही कांग्रेस में संगठन के कार्यकर्ताओं की अनदेखी का मुद्दा भी उठने लगा है। एआईसीसी सदस्य और राजस्थान यूथ बोर्ड के पूर्व चेयरमैन सीताराम लांबा ने टिकट बंटवारे पर नाराजगी जताते हुए पार्टी नेतृत्व पर निशाना साधा है।

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लांबा ने सोशल मीडिया पर लिखा, “विधायक और हारे हुए प्रत्याशी ही पंचायत टिकटों के मालिक हैं तो संगठन और कार्यकर्ताओं पर ताले लगा दो।” उनके इस बयान को टिकट वितरण में विधायकों और पिछले चुनावों में प्रत्याशी रहे नेताओं के प्रभाव तथा संगठन के कार्यकर्ताओं की भूमिका को लेकर उठ रही नाराजगी से जोड़कर देखा जा रहा है।

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नेताओं के परिवारों को टिकट, कार्यकर्ताओं में असंतोष

पंचायत चुनाव के पहले और दूसरे चरण के टिकट वितरण से जुड़ी रिपोर्टों के अनुसार, कांग्रेस ने अपने नेताओं के परिवारों के 16 सदस्यों को टिकट दिया है, जबकि भाजपा ने सात नेताओं के परिजनों को उम्मीदवार बनाया है। कांग्रेस ने चार मौजूदा विधायकों के परिवारों को मौका दिया है। भाजपा की ओर से दो मंत्रियों और एक विधायक के परिवार के सदस्यों को टिकट दिए जाने की जानकारी सामने आई है।

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भाजपा में इन नेताओं के परिवार में मिले टिकट

भाजपा में पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ के बेटे पराक्रम सिंह राठौड़ और बहू कनिका सिंह को चूरू जिला परिषद से टिकट मिला है। मंत्री झाबर सिंह खर्रा की पत्नी शांति देवी भी श्रीमाधोपुर पंचायत समिति से चुनाव लड़ रही हैं। वहीं, मावली विधायक पुष्कर लाल डांगी के बेटे शांतिलाल डांगी उदयपुर जिले से जिला परिषद सदस्य के उम्मीदवार हैं।

कांग्रेस में भी विधायक, पूर्व विधायकों के परिवारों को टिकट
कांग्रेस में भी मौजूदा विधायकों और पूर्व मंत्रियों के परिवारों को टिकट दिए जाने के मामले सामने आए हैं। पूर्व मंत्री ममता भूपेश की बेटी को टिकट मिला है। बाड़मेर में पूर्व मंत्री हादी खान के बेटे गफूर अहमद जिला परिषद और उनकी पुत्रवधू शमा बानो धनाऊ पंचायत समिति से चुनाव लड़ रही हैं।

टिकट वितरण पर उठ रहे सवाल

सीताराम लांबा की नाराजगी ने कांग्रेस के भीतर टिकट वितरण की प्रक्रिया और संगठन के कार्यकर्ताओं की भागीदारी को लेकर बहस तेज कर दी है। उनके बयान का निशाना उन परिस्थितियों पर है, जिनमें टिकट तय करने में विधायकों और पहले चुनाव लड़ चुके नेताओं का प्रभाव अधिक दिखाई देता है, जबकि लंबे समय से संगठन में काम कर रहे कार्यकर्ताओं को मौका मिलने पर सवाल उठते हैं।

भाजपा-कांग्रेस की दलील: जीतने की क्षमता के आधार पर टिकट

परिवारवाद के आरोपों पर भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा है कि टिकट जमीनी फीडबैक के आधार पर दिए गए हैं। उनके मुताबिक, किसी नेता का रिश्तेदार क्षेत्र में मजबूत है और उसकी दावेदारी बेहतर है तो उसे उम्मीदवार बनाने में अनुचित कुछ नहीं है।

कांग्रेस के प्रदेश मीडिया विभाग के चेयरपर्सन स्वर्णिम चतुर्वेदी ने भी परिवारवाद के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उम्मीदवारों का चयन जमीनी सर्वे, जीतने की क्षमता और स्थानीय नेताओं की सहमति के आधार पर किया गया है।

 

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