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जयपुर में अवैध कोचिंग सेंटरों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: मुख्य सचिव और डीजीपी को तलब किया, पुलिस की ढिलाई पर खफा
Sat, 26 Sep 2026 09:55 PM IST
प्रिया वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: प्रिया वर्मा
Updated Sat, 26 Sep 2026 09:55 PM IST
सार
जयपुर में आवासीय क्षेत्रों में चल रहे कोचिंग सेंटरों के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मामले से जुड़े एक वरिष्ठ अधिवक्ता को मिली धमकी पर पुलिस कार्रवाई की स्थिति मांगी है। इसके साथ ही मुख्य सचिव व DGP को व्यक्तिगत रूप से पेश होकर जवाब देने को कहा है।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
जयपुर में निर्धारित क्षेत्रों से बाहर चल रहे कोचिंग सेंटरों के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने इस मामले में कोर्ट अधिकारी को मिली धमकी को लेकर पूरे प्रकरण में अब तक की गई कार्रवाई का ब्योरा मांगा है। इसके लिए शीर्ष कोर्ट ने राजस्थान के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने का आदेश दिया है।
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अदालत ने जयपुर में आवासीय और गैर-अनुमत व्यावसायिक इलाकों में अवैध रूप से संचालित हो रहे कोचिंग संस्थानों को स्थानांतरित न किए जाने तथा पुलिस प्रशासन की कथित ढिलाई पर गहरी नाराजगी व्यक्त की है।
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धमकी पर जताई नाराजगी
मामले में सुनवाई के दौरान अदालत की सहायता के लिए उपस्थित वरिष्ठ अधिवक्ता राजदीप रस्तोगी ने अपने साथ घटी घटना की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उनके मोबाइल फोन पर चार मिस्ड कॉल आई थीं। उनके पास मौजूद एक वेलफेयर सोसाइटी के सचिव ने जब फोन उठाकर बात की तो कॉल करने वाले व्यक्ति ने गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी। इस घटना के संबंध में पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई थी। इसके बाद 12 सितंबर 2026 को प्राथमिकी दर्ज की गई लेकिन इसके बावजूद पुलिस प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई देखने को नहीं मिली है।
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लापरवाही का कारण स्पष्ट करें
धमकी का मामला सामने आने पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा ऐतराज जताया। शीर्ष अदालत ने कहा कि अदालत के अधिकारी अथवा न्याय प्रक्रिया में सहायता करने वाले किसी भी व्यक्ति को बिना किसी डर या आशंका के अपना दायित्व निभाने का माहौल मिलना चाहिए। अदालत ने राज्य के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक से व्यक्तिगत रूप से पेश होकर मामले की अद्यतन स्थिति बताने और पुलिस की इस लापरवाही का कारण स्पष्ट करने के लिए कहा है।
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24 घंटे में कार्रवाई का भरोसा
अदालत की सख्त टिप्पणी के बाद राजस्थान सरकार के प्रतिनिधि ने पुलिस महानिदेशक से फोन पर निर्देश प्राप्त करने के लिए समय मांगा। इसके बाद सरकार की तरफ से अदालत को आश्वस्त किया गया कि धमकी देने वाले आरोपी तथा कोचिंग सेंटरों के इस पूरे मामले में 24 घंटे के भीतर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
मामले की पृष्ठभूमि में जयपुर के उन व्यावसायिक क्षेत्रों का मुद्दा शामिल है, जहां बिना अनुमति के कोचिंग सेंटर संचालित किए जा रहे थे। इन संस्थानों को सरकार तथा जयपुर विकास प्राधिकरण द्वारा निर्धारित किए गए क्षेत्रों में स्थानांतरित किया जाना था। सुप्रीम कोर्ट द्वारा संज्ञान लिए जाने के बाद जयपुर विकास प्राधिकरण ने संबंधित कोचिंग सेंटरों को निर्धारित क्षेत्रों में जाने के लिए नोटिस भी जारी किए थे, लेकिन नियमों का पालन कराने में देरी हुई।
व्यावसायिक गतिविधियों और सीलिंग पर सख्त आदेश
यह मामला सुप्रीम कोर्ट द्वारा अवैध निर्माण और भूमि उपयोग की निगरानी के लिए चलाई जा रही व्यापक प्रक्रिया का हिस्सा है। शीर्ष अदालत ने अपनी सुनवाई में स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि जिन क्षेत्रों का निर्धारण केवल आवासीय गतिविधियों के लिए किया गया है, वहां किसी भी प्रकार की व्यावसायिक गतिविधियां संचालित नहीं की जा सकती हैं। यदि किसी भी आवासीय परिसर में इस प्रकार की व्यावसायिक गतिविधि पाई जाती है तो प्राथमिक चरण में ही उस परिसर को सील करने की कार्रवाई की जानी चाहिए।
प्रशासनिक कार्रवाई को नहीं रोका जा सकता
शीर्ष अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि किसी भवन अथवा भूमि के उपयोग को लेकर अदालत में कोई मुकदमा लंबित रहने मात्र से प्रशासनिक कार्रवाई को नहीं रोका जा सकता है। यदि किसी संपत्ति का प्रयोग स्वीकृत उद्देश्य के विपरीत पाया जाता है या बिना वैध मंजूरी के निर्माण किया गया है तो कानून के प्रावधानों के अनुसार उसे सील करने या ध्वस्त करने की कार्रवाई की जाएगी।
साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारियों को किसी भी मामले में पक्षपात या चयनात्मक दृष्टिकोण अपनाने से बचने की हिदायत दी है और बिना किसी भेदभाव के सभी नियम उल्लंघनकर्ताओं पर समान कार्रवाई करने का आदेश दिया है।