{"_id":"5afdcbf84f1c1bea408b60bd","slug":"jaipur-businessman-bids-rs-16-lakh-to-get-0001-number-for-his-jaguar","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"16 लाख की बोली लगाकर जगुआर के लिए खरीदा वीआईपी नंबर, पंचर बनाने से किया था कमाना शुरू","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
16 लाख की बोली लगाकर जगुआर के लिए खरीदा वीआईपी नंबर, पंचर बनाने से किया था कमाना शुरू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Updated Fri, 18 May 2018 12:07 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
इरादा हो तो इंसान क्या नहीं कर सकता। कुछ ऐसा ही कर दिखाया जयपुर के राहुल तनेजा ने, जिन्होंने अपनी मेहनत के बलबूते सभी को अपने इरादे पूरे करने की प्रेरणा दी है। 16 साल पहले तक ढाबे पर 150 रुपए महीने की नौकरी करने के बाद फिर पंचर की दुकान पर काम किया। मंगलवार को उसी ने 1.5 करोड़ की जगुआर कार पर अपना मनपसंद वीआईपी नंबर आरटीओ में बोली के जरिए 15 लाख रुपए में खरीदा। ये हौसला ही तो है जिसने राहुल इस काबिल बना दिया है।
विज्ञापन
राहुल ने यह बोली आरजे 45 सीजी 0001 नंबर के लिए लगाई। इतना ही नहीं इस नंबर के लिए 1 लाख 1 हजार रुपए की फीस भी अलग से जमा कराई। इस बोली में तीन फर्मों में भाग लिया था लेकिन आखिरकार राहुल तनेजा ने सबसे महंगी बोली लगाकर नंबर अपने नाम कर लिया। तनेजा इवेंट व वेडिंग मैनेजमेंट कंपनी लाइव क्रिएशन्स के फाउंडर हैं। डीटीओ अनिल सोनी ने बताया कि यह अब तक का प्रदेश का सबसे महंगा नंबर है।
विज्ञापन
इस तरह बना रईस
राहुल ने खुद बताया कि एक दिन उनकी पर्सनालिटी देखकर मोहल्ले के कुछ लड़कों ने मॉडलिंग की सलाह दी। मॉडलिंग में मिस्टर जयपुर, मिस्टर राजस्थान और मेल ऑफ दी ईयर के टाइटल जीते। इसके बाद उन्हें लगातार शो मिलते चले गए। बाद में इवेंट किए। अब वे वेडिंग्स के इवेंट्स कर रहे हैं। राहुल का शुरू से ही एक नंबर से खास लगाव है। उनके मोबाइल और लैंड लाइन के अंतिम सात नंबर और कारों के नंबर भी एक ही हैं।
किसी काम को नहीं समझा छोटा
तनेजा एमपी की मंडला तहसील के एक छोटे गांव में बेहद गरीब परिवार में पैदा हुए। पांच बहन-भाइयों में सबसे छोटे हैं। पिता के साथ टायर पंक्चर लगाने का काम किया। लेकिन छोटी सी उम्र में ही कुछ बड़ा करने की चाहत लिए राहुल ने घर छोड़ दिया। इसके बाद उन्होंने दो साल तक ढाबे पर काम किया। दिवाली के समय फुटपाथ पर पटाखे, होली में रंग और मकर संक्रांति में पतंगे बेची, अखबार डाले। दिन में आदर्श नगर स्थित ढाबे पर नौकरी की और रात को ऑटो चलाया।
किसी काम को नहीं समझा छोटा
तनेजा एमपी की मंडला तहसील के एक छोटे गांव में बेहद गरीब परिवार में पैदा हुए। पांच बहन-भाइयों में सबसे छोटे हैं। पिता के साथ टायर पंक्चर लगाने का काम किया। लेकिन छोटी सी उम्र में ही कुछ बड़ा करने की चाहत लिए राहुल ने घर छोड़ दिया। इसके बाद उन्होंने दो साल तक ढाबे पर काम किया। दिवाली के समय फुटपाथ पर पटाखे, होली में रंग और मकर संक्रांति में पतंगे बेची, अखबार डाले। दिन में आदर्श नगर स्थित ढाबे पर नौकरी की और रात को ऑटो चलाया।