फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Rajasthan ›   Jaipur auto driver daughter Suhani brought 96 percent marks in 10th Rajasthan Board

Rajasthan: ऑटो ड्राइवर की बेटी बनी दसवीं टॉपर, मुश्किल में परिवार ने दूसरों के कपड़े धोए, जानें सफलता की कहानी

Wed, 15 Jun 2022 09:32 AM IST
रोमा रागिनी न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: रोमा रागिनी Updated Wed, 15 Jun 2022 09:32 AM IST
सार

जयपुर की रहने वाली सुहानी ने बताया कि वे सीए बनना चाहती है। उसके चाचा का लड़का सीए है और उनकी परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी है।

विज्ञापन
Jaipur auto driver daughter Suhani brought 96 percent marks in 10th Rajasthan Board
पिता के साथ सुहानी - फोटो : Social Media

विस्तार

जयपुर के एक ऑटो ड्राइवर की बेटी ने साबित कर दिया कि मेहनत और लग्न के आगे हर बाधा हार जाती है। सुहानी ने दसवीं बोर्ड में 96 फीसदी मार्क्स लाकर अपने परिवार सहित जयपुर का नाम रौशन किया है। परिवार में विषम परिस्थति के बावजूद सफलता का परचम लहराने वाली सुहानी सभी विद्यार्थियों के लिए मिसाल है। पढ़िए सुहानी की संघर्ष की कहानी....

विज्ञापन

अभाव में भी नहीं मानी हार
सुहानी के पिता ऑटो ड्राइवर हैं। कोरोना काल में संकट आया तो परिवार ने कपड़े धोकर गुजारा किया। जैसे-तैसे परिवार का गुजर बसर हो रहा था लेकिन सुहानी ने सुविधाओं के अभाव में हार नहीं मानी। वो दिन-रात पढ़ाई में जुटी रही। इसके साथ वो घर के कामकाज में भी हाथ बंटाती थी।

विज्ञापन
विज्ञापन

मां-पिता अनपढ़

15 साल की सुहानी शक्रवाल सी-स्कीम में श्री केसीजे गुजराती समाज हिंदी मीडियम स्कूल की छात्रा है। मां पिंकी और पिता राजेश दोनों अनपढ़ हैं। घर के आर्थिक हालात ठीक नहीं हैं। परिवार बीपीएल श्रेणी में आता है। फिर माता-पिता ने उसे पढ़ाई के लिए हमेशा प्रेरित किया। 

विज्ञापन

स्कूल ने माफ की ट्यूशन फीस
दसवीं बोर्ड का जब रिजल्ट आया तो सुहानी के माता-पिता की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। स्कूल प्रिंसिपल देवेन्द्र कुमार वाजा ने भी मंगलवार को सुहानी और उसके परिवार का अभिनंदन किया। उन्होंने बताया कि सुहानी ने स्कूल का नाम रोशन किया है। सुहानी पढ़ने में शुरू से होशियार थी। ऐसे में स्कूल ने मानवीय आधार पर गर्ल्स एजुकेशन मोटिवेट करते हुए सुहानी और उसकी बड़ी बहन इशिका की ट्यूशन फीस शुरू से माफ कर रखी है। 

रोज पांच-छह घंटे तक करती थी पढ़ाई
सुहानी ने अपनी सफलता का राज बताते हुए कहा कि उन्होंने दसवीं में अच्छे प्रतिशत लाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी। वो रोज पांच से छह घंटे पढ़ाई करती थी। कोरोना काल में जब ऑनलाइन पढ़ाई शुरू हुई तो उसने मां के मोबाइल से पढ़ाई जारी रखी। उसके पास अपना मोबाइल फोन भी नहीं है। 

सीए और आईएएस बनने का है सपना
सुहानी आगे कहती हैं कि वो पढ़ाई पर पूरी फोकस थी। इसलिए उन्होंने कभी मोबाइल का मिसयूज नहीं किया। सुहानी कॉमर्स लेकर सीए बनना चाहती हैं। वो कहते हैं कि उनके चाचा का लड़का सीए है। ऐसे में उसके परिवार की स्थिति अच्छी है। उन्हीं से प्रेरित हूं। आगे जाकर आईएएस बनने का सपना है।

मां ने कहा-मेरी बेटी पढ़ लिखकर कुछ बनें, मेरी तरह न रहे

सुहानी के पिता राजेश कहते हैं कि उनके पिता की कम उम्र में ही मृत्यु हो गई। ऐसे में 17-18 साल में शादी हो गई लेकिन अपनी बेटी की शादी तभी करेंगे, जब वो अपने पैर पर खड़ी होगी। उन्होंने कहा कि मैं चाहता हूं मेरी बेटियां पढ़-लिखकर खूब नाम कमाएं। वहीं सुहानी की मां कहती हैं कि मैं चाहती हूं कि मेरी बेटी पढ़-लिखकर कुछ बनें। मेरी तरह अनपढ़ न रहे।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed