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Hanuman Janmotsav: राजस्थान के इस चमत्कारिक मंदिर में होता है भूत-प्रेत का इलाज, पीछे मुड़कर देखना बिल्कुल है मना

Sat, 16 Apr 2022 11:56 AM IST
रोमा रागिनी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दौसा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दौसा Published by: रोमा रागिनी Updated Sat, 16 Apr 2022 11:56 AM IST
सार

आपने मंदिरों में आरती, मंत्रों और घंटियों की आवाज सुनी होगी लेकिन राजस्थान में एक मंदिर है, जहां प्रवेश करने पर चीखने-चिल्लाने की आवाजें आती हैं। यहां से प्रसाद भी घर लेकर जाना मना है। 

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मेहंदीपुर बालाजी - फोटो : Social Media

विस्तार

राजस्थान में सालासर बालाजी, मोती डूंगरी, ब्रह्माजी मंदिर जैसे कई चमत्कारी मंदिर हैं लेकिन एक ऐसा सिद्ध मंदिर है, जहां पहली बार आने में भक्त डर जाते हैं। मंदिर से चीखने-चिल्लाने की आवाजें आती रहती हैं। हम बात कर रहे हैं राजस्थान के दौसा जिले में स्थित मेहंदीपुर बालाजी मंदिर की।

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मेहंदीपुर बालाजी - फोटो : Social Media

जयपुर से करीब 100 किलोमीटर दूर मेहंदीपुर बालाजी का मंदिर स्थित है। ये धाम भगवान के दस प्रमुख सिद्दपीठों में गिना जाता है। लोगों का कहना है कि इस स्थान पर हनुमानजी जागृत अवस्था में विराजते हैं। यही वजह है कि अगर किसी भक्त पर भूत-प्रेत का साया हो तो वह मंदिर आने से दूर हो जाता है। 

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मेहंदीपुर बालाजी का मंदिर - फोटो : Social Media

यहां आते ही भाग जाते हैं भूत
यहां आने वाले भक्त बताते हैं कि जिन व्यक्तियों पर बुरी आत्माओं या भूत-प्रेत का वास होता है, वे यहां मंदिर में प्रवेश करते ही चिखने-चिल्लाने लगते हैं। फिर बुरी आत्मा उस व्यक्ति को छोड़कर शरीर से बाहर निकल जाती है। लोग कई सालों से भूत-प्रेत से मुक्ति के दूर-दूर से यहां आते हैं। कहा जाता है कि बालाजी महाराज के हजारों गण यहां बालाजी के नित्य लगने वाले भोग की खुशबू से तृप्त हो रही हैं। इसलिए भूत-प्रेत से परेशान लोग आते हैं और ठीक होकर जाते हैं। 

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बालाजी की मूर्ति - फोटो : Amar Ujala Digital
यहां प्रकट हुए थे बालाजी

मंदिर के इतिहास से जुड़ी एक कहानी प्रचलित है। कहा जाता है कि मंदिर में श्री बालाजी महाराज, श्री प्रेतराज सरकार और श्री कोतवाल (भैरव), यह तीन देव यहां आज से लगभग 1000 साल पहले प्रकट हुए थे। यहां की मूर्ति किसी ने नहीं बनाई नहीं है। 

महंत को सपने में दिखे भगवान

यह भी माना जाता है कि मंदिर के पुराने महंत को एक दिन सपना आया। उसने सपने में तीन देवताओं को देखा था। महंत ने इसे बालाजी के मंदिर निर्माण का संकेत माना। उसके बाद इस जगह पर भगवान हनुमान की पूजा-अर्चना शुरू कर दी गई। फिर मंदिर में तीनों देवता बालाजी महाराज, श्री प्रेतराज सरकार और श्री कोतवाल को स्थापित करवाया गया। 


भक्तों को होता है यहां अलग एहसास

मंदिर की सबसे खास बात यहां का वातावरण है। मंदिर में जाने वाले भक्त बताते हैं कि उन्होंने मंदिर में अलग-अलग तरह का वातावरण महसूस किया है। यहां आने के बाद भक्त को रीढ़ की हड्डी में ठंड का एहसास होता है। 

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बालाजी मंदिर - फोटो : Social Media
मंदिर की बनावट भी अलग

कहा जाता है कि यह मंदिर आम मंदिरों से बिल्कुल अलग है। यहां मंदिर की घंटी की जगह लोगों की चीख-पुकार सुनाई देती है। मंदिर की बनावट अपने आप में अलग है। यहां चार हॉल बने हुए हैं। पहले दो में हनुमान जी और भैरव जी की मूर्ति है। जबकि आखिरी हॉल में बहुत सारे महिलाएं और पुरुष होते हैं, जिनपर भूतों का साया होता है। 


 
 

मान्यता है कि जब भी मंदिर जाए, वहां से खाने की कोई भी चीज जैसे प्रसाद या पानी की एक बूंद भी वापस न लेकर आएं। यहां लोगों से बात नहीं की जाती है और उन्हें छुआ भी नहीं जाता है। माना जाता है कि बहुत से लोग में भूत प्रेत होते हैं, वो आपको प्रभावित कर सकते हैं। 

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हनुमान जी का गदा - फोटो : Social Media
          मेहंदीपुर बालाजी के अनिवार्य नियम
  • मंदिर के अंदर अजनबियों को न छुए और ना बातचीत करें
  • मंदिर के अंदर कुछ भी खाना-पीना है मना 
  • मंदिर जाने से पहले प्याज या नॉन वेज ना खाएं
  • घर वापस जाते समय कोई भी प्रसाद या सामग्री ने ले जाएं
  • मंदिर से लौटते समय पीछे मुड़कर न देखें
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