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जोधपुर: पाक नागरिकों को भारतीय वीजा दिलाने के लिए तैयार किए फर्जी दस्तावेज, चार गिरफ्तार
Wed, 12 Jan 2022 02:34 PM IST
सुरेंद्र जोशी
पीटीआई, जोधपुर
पीटीआई, जोधपुर
Published by: सुरेंद्र जोशी
Updated Wed, 12 Jan 2022 02:34 PM IST
सार
जोधपुर पुलिस ने बताया कि आरोपियों में दो रिश्तेदार हैं, जबकि एक छात्र और एक एनजीओ का कर्मचारी है। एक सीआईडी इंस्पेक्टर की शिकायत पर केस दर्ज किया गया है। इन लोगों के खिलाफ पिछले माह केंद्रीय गृह मंत्रालय ने जांच का आदेश दिया था।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पाकिस्तानी नागरिकों को भारतीय वीजा दिलाने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार करने के आरोप में जोधपुर में चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
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जोधपुर पुलिस ने बताया कि आरोपियों में दो रिश्तेदार हैं, जबकि एक छात्र और एक एनजीओ का कर्मचारी है। एक सीआईडी इंस्पेक्टर की शिकायत पर केस दर्ज किया गया है। इन लोगों के खिलाफ पिछले माह केंद्रीय गृह मंत्रालय ने जांच का आदेश दिया था।
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एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि फर्जी दस्तावेज तैयार करने के मामले में आरोपी नरेंद्र उर्फ नीमाराम टांक, सोहेल रोहानी, चिरंजीव उर्फ अशोक मेघवाल व शीतल भील को गिरफ्तार किया गया है। इन्हें मंगलवार शाम पकड़ा गया। जांच में पता चला है कि आरोपियों ने फर्जी पहचान पत्र, प्रायोजक प्रमाण पत्र, आवास प्रमाण पत्र आदि तैयार कर लिए थे, ताकि भारत आने के इच्छुक पाकिस्तानी नागरिक भारत आने के लिए वीसा प्राप्त कर सकें। पुलिस ने बताया इन प्रमाण पत्रों के सत्यापन के लिए इन्होंने शिक्षक गौतम पुरी के फर्जी हस्ताक्षर कर लिए थे।
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पूछताछ में पूरी ने बताया कि फर्जी दस्तावेजों पर उनके द्वारा हस्ताक्षर किए जाने की उन्हें कोई जानकारी नहीं है। जांच अधिकारी ने कहा कि तीसरी कक्षा का शिक्षक राजपत्रित अधिकारी नहीं हो सकता, इसलिए वह ऐसे किसी सत्यापन का पात्र नहीं है।
चार आरोपियों में से दो सोहेल व चिरंजीव जोधपुर हाईकोर्ट परिसर में टाइपिंग का काम करते थे। उन्होंने 11 पाकिस्तानी नागरिकों के अब तक फर्जी दस्तावेज तैयार किए हैं। वे इसके लिए 500 रुपये शुल्क लेते थे। सोहेल व चिरंजीव रिश्तेदार हैं। वे इच्छुक पाकिस्तानी नागरिकों के लिए वीजा तैयार करने वाले एजेंट के बतौर काम करते थे।
यह है वीजा प्रक्रिया
प्रक्रिया के अनुसार किसी पाकिस्तानी नागरिक को भारतीय वीजा प्राप्त करने के लिए इस्लामाबाद स्थित भारतीय उच्चायोग में आवेदन करना होता है। इसके लिए भारत के एक प्रायोजक, एक गारंटर की जरूरत होती है। इनके दस्तावेजों का सत्यापन एक गजेटेड या राजपत्रित अधिकारी से कराना होता है।