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OBC Reservation: आरक्षण के लिए आंदोलन कर रहे 40 लोगों पर FIR, एक दिन पहले प्रदर्शन खत्म करने का किया था एलान

Wed, 03 May 2023 09:12 PM IST
जलज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भरतपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भरतपुर Published by: जलज मिश्रा Updated Wed, 03 May 2023 09:12 PM IST
सार

था। 21 अप्रैल को समाज के लोग बिना किसी नेतृत्व के हाईवे पर आ गए और सबसे पहली मांग रखी कि मुरारी लाल सैनी सहित समाज के सभी लोगों को छोड़ दिया जाए। समाज की मांग को देखते मुरारी लाल सैनी सहित सभी 26 लोगों को 24 अप्रैल को रिहा कर दिया गया।

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FIR on 40 people agitating for OBC Reservation one day before they announced to end the protest
घटनास्थल। - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

भरतपुर में 12 प्रतिशत आरक्षण की मांग कर रहे भरतपुर के नेशनल हाईवे 21 को जाम करने के बाद अब आंदोलनकारियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। लखनपुर थाना प्रभारी ने फुले आरक्षण संघर्ष समिति के संयोजक मुरारी लाल सैनी सहित 40 लोगों के खिलाफ नामजद मामला दर्ज किया है। इसके अलावा 500 से 600 लोग ऐसे हैं जो अन्य में रखे गए हैं। इसके अलावा NHAI भी हाईवे के नुकसान के संबंध में हाईवे की जांच करवा रहा है, जिससे यह साफ हो सके कि आंदोलनकारियों ने नेशनल हाईवे 21 को कितना नुकसान पहुंचाया है।

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यह है पूरा मामला
भरतपुर जिले में माली, सैनी, कुशवाहा, मौर्य, शाक्य आदि समाज के लोगों ने 12% आरक्षण की मांग करते हुए 21 अप्रैल से हाईवे जमा कर लिया था। 21 अप्रैल को चक्का जाम का एलान फुले आरक्षण संघर्ष समिति के संयोजक मुरारी लाल सैनी ने किया था। जिसके बाद प्रशासन ने मुरारी लाल सैनी सहित 25 लोगों को गिरफ्तार कर लिया था। 21 अप्रैल को समाज के लोग बिना किसी नेतृत्व के हाईवे पर आ गए और सबसे पहली मांग रखी कि मुरारी लाल सैनी सहित समाज के सभी लोगों को छोड़ दिया जाए। समाज की मांग को देखते मुरारी लाल सैनी सहित सभी 26 लोगों को 24 अप्रैल को रिहा कर दिया गया।

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25 अप्रैल को फुले आरक्षण संघर्ष समिति के लोगों की सीएम से वार्ता हुई। सीएम की तरफ से आश्वाशन दिया गया कि, 1 मई को  ओबीसी आयोग से वार्ता की जाएगी। राज्य सरकार ने मांग रखी कि जब तक वह हाईवे को खाली कर दें।

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आंदोलन स्थल के पास मिला था शव
दूसरी तरफ 25 अप्रैल को आंदोलनकारी मोहन सिंह का शव सुबह 6 बजे आंदोलन स्थल से 5 सौ मीटर की दूरी पर एक पेड़ से लटका मिला। जिसके बाद समाज के लोगों ने पहली मांग रखी कि, अब मोहन सिंह के परिवार को 1 करोड़ रुपए, शहीद का दर्जा और एक सरकारी नौकरी नहीं मिलेगी तब तक मोहन सिंह का शव नहीं लिया जाएगा। मोहन सिंह के शव लेने को लेकर आंदोलनकारी और प्रशासन के साथ कई बार वार्ता हुई। जिसके बाद देर रात करीब 11 बजकर 30 मिनट पर मोहन के गांव में उसके शव का अंतिम संस्कार किया गया था। 1 मई को आंदोलनकारियों का एक प्रतिनिधि मंडल जयपुर पहुंचा। जहां ओबीसी आयोग से वार्ता हुई थी, आरक्षण संघर्ष समिति के संयोजक मुरारी लाल सैनी ने 2 अप्रैल को आंदोलन स्थल पर धरना समाप्ति की घोषणा की। उसके बाद वह हाईवे से चले गए। अब लखनपुर थाना प्रभारी ने आंदोलनकारियों के खिलाफ रोड जाम करने सहित सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का मुकदमा दर्ज किया है।



 
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