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राजस्थान: ईएसआईसी कॉलेज में छात्र कल्याण फंड को लेकर विवाद, विद्यार्थियों ने मुख्य द्वार पर की तालाबंदी
Mon, 05 Oct 2026 06:26 PM IST
प्रतीक पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलवर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलवर
Published by: प्रतीक पांडेय
Updated Mon, 05 Oct 2026 06:26 PM IST
सार
अलवर के ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में सोमवार को छात्र कल्याण कोष के इस्तेमाल और अन्य लंबित मांगों को लेकर विद्यार्थियों ने प्रदर्शन किया। विद्यार्थियों ने कॉलेज डीन की कार्यशैली के खिलाफ मुख्य द्वार पर तालाबंदी कर धरना दिया।
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ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में सोमवार को विद्यार्थियों ने कॉलेज डीन की कार्यशैली के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए मुख्य द्वार पर तालाबंदी कर दी। विद्यार्थी अपनी विभिन्न लंबित मांगों को लेकर गेट पर ताला लगाकर धरने पर बैठ गए और प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस तालाबंदी के कारण अस्पताल में इलाज कराने आने वाले मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों की मुख्य मांग है कि उनके छात्र कल्याण कोष की जमा राशि का उपयोग आवश्यकता अनुसार करने की पारदर्शी व्यवस्था बनाई जाए। विद्यार्थियों ने अस्पताल में स्वयं के लिए दवाइयां, जरूरी जांचें तथा संपूर्ण उपचार की सुविधा नियमित रूप से उपलब्ध कराने की भी मांग उठाई। विद्यार्थियों का कहना है कि प्रशासन हर वर्ष फीस के साथ प्रत्येक विद्यार्थी से लगभग 5,000 रुपये छात्र कल्याण कोष के नाम पर जमा करवाता है, लेकिन ढाई वर्ष से इस फंड का उपयोग विद्यार्थियों के हित में नहीं किया जा रहा है।
छात्र कल्याण कोष में जमा राशि का विवाद
प्रदर्शन में शामिल विद्यार्थी करण अलारिया ने बताया कि छात्र कल्याण कोष में प्रत्येक वर्ष विद्यार्थियों से राशि एकत्र की जाती है। इस कोष में अब तक लगभग एक करोड़ रुपये से अधिक की राशि जमा हो चुकी है, लेकिन इसके बावजूद विद्यार्थियों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कॉलेज में किसी कार्यक्रम का आयोजन करने के लिए विद्यार्थियों को अलग से चंदा इकट्ठा करना पड़ता है, जबकि कोष में पर्याप्त धन उपलब्ध है। करण अलारिया ने बताया कि इस फंड के संचालन हेतु एसओपी तैयार करने की प्रक्रिया पिछले ढाई वर्ष से चल रही है, परंतु अभी तक कोई ठोस नीति लागू नहीं की जा सकी है। इसके साथ ही विद्यार्थियों ने आरोप लगाया कि इतना बड़ा मेडिकल सेटअप होने के बाद भी अस्पताल में उन्हें आवश्यक दवाएं, जांच और उपचार सुविधाएं उचित रूप से नहीं मिल रही हैं, जिससे उन्हें बीमारियों के समय भटकना पड़ता है।
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पुलिस के साथ तीखी बहस और चेतावनी
अस्पताल परिसर में विद्यार्थियों द्वारा तालाबंदी किए जाने की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। थाना प्रभारी रामेश्वर लाल ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और विद्यार्थियों को समझा-बुझाकर मुख्य द्वार का ताला खोलने के लिए कहा। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे अस्पताल आने वाले मरीजों और उनके परिजनों को किसी प्रकार से परेशान न होने दें। हालांकि, अपनी मांगों पर अड़े विद्यार्थियों ने मुख्य द्वार का ताला खोलने से इनकार कर दिया। इस दौरान, पुलिस और विद्यार्थियों के बीच तीखी बहस और कहासुनी हो गई। स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए थाना प्रभारी ने प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों को चेतावनी दी कि वे मरीजों के आवागमन में बाधा न डालें। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि यदि अस्पताल का माहौल बिगड़ा या मरीजों को कष्ट हुआ तो पुलिस कड़ी कार्रवाई करने के लिए विवश होगी।
डीन के आश्वासन के बाद समाप्त हुआ धरना
पुलिस की चेतावनी के बाद विद्यार्थी मुख्य द्वार से हटकर डीन के चैंबर के बाहर जाकर धरने पर बैठ गए। वहां विद्यार्थियों ने डीन के खिलाफ लगातार नारेबाजी करते हुए विरोध दर्ज कराया। कुछ समय बाद डीन डॉ. ओमप्रकाश लखवानी ने लगभग 10 विद्यार्थियों के प्रतिनिधिमंडल को वार्ता के लिए अपने चैंबर में बुलाया। चैंबर में प्रतिनिधिमंडल के साथ विभिन्न मांगों पर विस्तृत चर्चा की गई। इसके पश्चात डीन स्वयं बाहर आए और उन्होंने धरने पर बैठे सभी प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों से सीधे बातचीत की। डीन ने विद्यार्थियों की समस्याओं को ध्यानपूर्वक सुना और उनकी उचित मांगों पर सकारात्मक आश्वासन दिया। डीन से आश्वासन मिलने के बाद विद्यार्थियों ने अपना धरना और प्रदर्शन समाप्त कर दिया।
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प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों की मुख्य मांग है कि उनके छात्र कल्याण कोष की जमा राशि का उपयोग आवश्यकता अनुसार करने की पारदर्शी व्यवस्था बनाई जाए। विद्यार्थियों ने अस्पताल में स्वयं के लिए दवाइयां, जरूरी जांचें तथा संपूर्ण उपचार की सुविधा नियमित रूप से उपलब्ध कराने की भी मांग उठाई। विद्यार्थियों का कहना है कि प्रशासन हर वर्ष फीस के साथ प्रत्येक विद्यार्थी से लगभग 5,000 रुपये छात्र कल्याण कोष के नाम पर जमा करवाता है, लेकिन ढाई वर्ष से इस फंड का उपयोग विद्यार्थियों के हित में नहीं किया जा रहा है।
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छात्र कल्याण कोष में जमा राशि का विवाद
प्रदर्शन में शामिल विद्यार्थी करण अलारिया ने बताया कि छात्र कल्याण कोष में प्रत्येक वर्ष विद्यार्थियों से राशि एकत्र की जाती है। इस कोष में अब तक लगभग एक करोड़ रुपये से अधिक की राशि जमा हो चुकी है, लेकिन इसके बावजूद विद्यार्थियों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कॉलेज में किसी कार्यक्रम का आयोजन करने के लिए विद्यार्थियों को अलग से चंदा इकट्ठा करना पड़ता है, जबकि कोष में पर्याप्त धन उपलब्ध है। करण अलारिया ने बताया कि इस फंड के संचालन हेतु एसओपी तैयार करने की प्रक्रिया पिछले ढाई वर्ष से चल रही है, परंतु अभी तक कोई ठोस नीति लागू नहीं की जा सकी है। इसके साथ ही विद्यार्थियों ने आरोप लगाया कि इतना बड़ा मेडिकल सेटअप होने के बाद भी अस्पताल में उन्हें आवश्यक दवाएं, जांच और उपचार सुविधाएं उचित रूप से नहीं मिल रही हैं, जिससे उन्हें बीमारियों के समय भटकना पड़ता है।
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पुलिस के साथ तीखी बहस और चेतावनी
अस्पताल परिसर में विद्यार्थियों द्वारा तालाबंदी किए जाने की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। थाना प्रभारी रामेश्वर लाल ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और विद्यार्थियों को समझा-बुझाकर मुख्य द्वार का ताला खोलने के लिए कहा। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे अस्पताल आने वाले मरीजों और उनके परिजनों को किसी प्रकार से परेशान न होने दें। हालांकि, अपनी मांगों पर अड़े विद्यार्थियों ने मुख्य द्वार का ताला खोलने से इनकार कर दिया। इस दौरान, पुलिस और विद्यार्थियों के बीच तीखी बहस और कहासुनी हो गई। स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए थाना प्रभारी ने प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों को चेतावनी दी कि वे मरीजों के आवागमन में बाधा न डालें। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि यदि अस्पताल का माहौल बिगड़ा या मरीजों को कष्ट हुआ तो पुलिस कड़ी कार्रवाई करने के लिए विवश होगी।
डीन के आश्वासन के बाद समाप्त हुआ धरना
पुलिस की चेतावनी के बाद विद्यार्थी मुख्य द्वार से हटकर डीन के चैंबर के बाहर जाकर धरने पर बैठ गए। वहां विद्यार्थियों ने डीन के खिलाफ लगातार नारेबाजी करते हुए विरोध दर्ज कराया। कुछ समय बाद डीन डॉ. ओमप्रकाश लखवानी ने लगभग 10 विद्यार्थियों के प्रतिनिधिमंडल को वार्ता के लिए अपने चैंबर में बुलाया। चैंबर में प्रतिनिधिमंडल के साथ विभिन्न मांगों पर विस्तृत चर्चा की गई। इसके पश्चात डीन स्वयं बाहर आए और उन्होंने धरने पर बैठे सभी प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों से सीधे बातचीत की। डीन ने विद्यार्थियों की समस्याओं को ध्यानपूर्वक सुना और उनकी उचित मांगों पर सकारात्मक आश्वासन दिया। डीन से आश्वासन मिलने के बाद विद्यार्थियों ने अपना धरना और प्रदर्शन समाप्त कर दिया।