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Rajasthan: अंग्रेजी शराब-बीयर सस्ती और देसी पव्वा होगा महंगा, जानें क्यों हो रहा नई आबकारी नीति का विरोध

Tue, 24 Jan 2023 08:57 PM IST
उदित दीक्षित न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: उदित दीक्षित Updated Tue, 24 Jan 2023 08:57 PM IST
सार

राजस्थान की गहलोत सरकार ने नई आबकारी नीति में बदलाव किए हैं। जिसके तहत देश में बनने वाली अंग्रेजी शराब पर लगने वाली अतिरिक्त आबकारी ड्यूटी को खत्म करने का फैसला किया गया है। वहीं, दूसरी तरह देसी शराब की कीमते बढ़ाई हैं।

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English liquor cheap and desi pavva will be expensive in rajasthan Objection to new excise policy
नई आबकारी नीति का हो रहा विरोध। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजस्थान में नई आबकारी नीति लागू होने से पहले विवादों में आ गई है। नई नीति में प्रदेश में शराब और बार कल्चर को बढ़ा दिया गया है। इसके तहत अंग्रेजी शराब और बियर सस्ती हो जाएगी, वहीं देसी शराब की कीमतों में इजाफा होगा।

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अब बार लाइसेंस तीन महीने के लिए जारी होगा इसे शॉर्ट टर्म लाइनसेंस नाम दिया गया है। एक अप्रैल से लागू होने वाली नई आबकारी नीति में ये बदलाव किए गए हैं। राजस्थान लिकर वेलफेयर सोसायटी और जस्टिस फॉर छाबड़ा संगठन सम्पूर्ण शराबबंदी आंदोलन के लोग इसके विरोध में खड़े हो गए हैं।   
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मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार राजस्थान की गहलोत सरकार ने नई आबकारी नीति में बदलाव किए हैं। जिसके तहत देश में बनने वाली अंग्रेजी शराब पर लगने वाली अतिरिक्त आबकारी ड्यूटी को खत्म करने का फैसला किया गया है। वहीं, दूसरी तरह देसी शराब की कीमते बढ़ाई हैं।

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क्या बदलाव किए गए?
संशोधित नियम के तहत एक अप्रैल से राजस्थान निर्मित और देसी शराब के पव्वे पर 2 रुपये का इजाफा होगा। वहीं, देश में बनने वाली अंग्रेजी शराब 20 रुपये तक सस्ती मिलेगी। इसी तरह बियर के दाम में भी काटौती की गई है। अब तक प्रदेश में बार चलाने वालों को एक साल का लाइसेंस दिया जाता, लेकिन अब ये लाइसेंस तीन महीने के लिए दिया जाएगा। इससे उन लोगों को फायदा होगा, जिन्हें बार शुरू करने के बाद रेवेन्यू नहीं मिलता है और वे पूरी साल घाटा उठाते रहते हैं। अब अगर बार शुरू करने के तीन महीने तक रेवेन्यू नहीं आता है तो उसका मालिक लाइसेंस रिन्यू नहीं कराने का फैसला भी ले सकता है। 

लाइसेंस रिन्यू शुल्क में कटौती
नए संसोधित नियम में लाइसेंस रिन्यू शुल्क में भी कटौती की गई है। अब तक बार चलाने वाले संचालकों को एक साल का लाइसेंस दिया जाता था। अगर, वह एक साल छोड़कर लाइसेंस रिन्यू कराते थे तो उन्हें बीते साल का भी पूरा शुल्क देना पड़ता था, लेकिन अब इसमें कटौती कर सिर्फ 25 फीसदी कर दिया गया है। 

युवाओं का भविष्य होगा खराब
आबकारी नीति में नए बदलावों को लेकर जस्टिस फॉर छाबड़ा संगठन सम्पूर्ण शराबबंदी आंदोलन की अध्यक्ष और राजस्थान लिकर वेलफेयर सोसायटी ने आपत्ति जताई है। शराबबंदी आंदोलन की अध्यक्ष पूनम अंकुर छाबड़ा ने कहा कि शराबबंदी करने की जगह प्रदेश में इसे बढ़ावा दिया जा रहा है। ये प्रदेश के युवाओं का भविष्य खराब करने वाली नीति है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।  

ज्यादा शराब बेचने का होगा दबाव
राजस्थान लिकर वेलफेयर सोसायटी के अध्यक्ष निलेश मेवाड़ा ने कहा नई आबकारी नीति से बार कल्चर को बढ़ावा दिया जा रहा है। वर्तमान में जो शराब दुकानें चल रही हैं, उनकी रिन्यूअल फीस 15 फीसदी बढ़ाई जा रही है। 15 फीसदी की गारंटी बढ़ते ही दुकान संचालकों पर ज्यादा शराब बेचने का दबाव बनेगा, लेकिन हम बेच नहीं पाएंगे।

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