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Rajasthan: 'चेहरा बचाने के लिए कार्रवाई कर रही ईडी', नेशनल हेराल्ड के दफ्तरों पर पड़े छापे पर बोले सीएम गहलोत
Tue, 02 Aug 2022 05:13 PM IST
उदित दीक्षित
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: उदित दीक्षित
Updated Tue, 02 Aug 2022 05:13 PM IST
सार
सीएम गहलोत ने कहा, जब कोई मनी ट्रांजेक्शन ही नहीं हुआ तो मनी लॉन्ड्रिंग कैसे हो सकती है। ईडी ने जुलाई 2015 में इस केस को बंद कर दिया था, लेकिन केंद्र सरकार के दबाव में कार्रवाई शुरू की। ईडी के जरिए से केंद्र सरकार कांग्रेस को बदनाम करने का कितना भी प्रयास कर ले, लेकिन अंत में जीत सच्चाई की ही होगी।
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मुख्यमंत्री अशोक गहलोत।
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
देश भर में नेशनल हेराल्ड के दफ्तरों पर प्रवर्तन निदेशालय की छापेमारी को लेकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जांच एजेंसी और केंद्र सरकार पर हमला बोला। गहलोत ने ट्वीट कर कहा, ईडी द्वारा हेराल्ड हाउस पर छापेमारी केन्द्र सरकार की बौखलाहट का प्रतीक है। सोनिया गांधी और राहुल गांधी को पूछताछ के नाम पर प्रताड़ित करने के बाद ईडी अब फेस सेविंग (चेहरा बचाने) के लिए इस तरह की कार्रवाई कर रही है।
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उन्होंने कहा, जब कोई मनी ट्रांजेक्शन ही नहीं हुआ तो मनी लॉन्ड्रिंग कैसे हो सकती है। ईडी ने जुलाई 2015 में इस केस को बंद कर दिया था, लेकिन केंद्र सरकार ने उस समय के जांच अधिकारी का तबादला कर नए अधिकारियों पर दबाव बनाया और बदले की भावना से कार्रवाई शुरू की। ईडी के जरिए से केंद्र सरकार चाहे कांग्रेस को बदनाम करने का कितना भी प्रयास कर ले, लेकिन अंत में जीत सच्चाई की ही होगी।
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बता दें कि मंगलवार को प्रवर्तन निदेशालय की टीम ने नेशनल हेराल्ड केस में देश भर में 14 जगह पर छापेमारी की। इन जगहों में दिल्ली स्थित नेशनल हेराल्ड के दफ्तर सहित अन्य ठिकाने भी शामिल हैं। इससे पहले इस मामले में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी से भी लंबी पूछताछ हो चुकी है।
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जानें, क्या है नेशनल हेराल्ड?
देश के पहले प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू ने 20 नवंबर 1937 को एसोसिएटेड जर्नल लिमिटेड यानी AJL का गठन किया था। इसका उद्देश्य अलग-अलग भाषाओं में समाचार पत्रों को प्रकाशित करना था। तब AJL के अंतर्गत अंग्रेजी में नेशनल हेराल्ड, हिंदी में नवजीवन और उर्दू में कौमी आवाज समाचार पत्र प्रकाशित हुए। भले ही AJL के गठन में पं. जवाहर लाल नेहरू की भूमिका थी, लेकिन इसपर मालिकाना हक कभी भी उनका नहीं रहा। क्योंकि, इस कंपनी को 5000 स्वतंत्रता सेनानी सपोर्ट कर रहे थे और वही इसके शेयर होल्डर भी थे। 90 के दशक में ये अखबार घाटे में आने लगे। साल 2008 तक AJL पर 90 करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज चढ़ गया। तब AJL ने फैसला किया कि अब समाचार पत्रों का प्रकाशन नहीं किया जाएगा। अखबारों का प्रकाशन बंद करने के बाद AJL प्रॉपर्टी बिजनेस में उतरी।