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हिंदू-मुस्लिम भाईचारे की मिसाल: जुनून की सभी हदें पार कर बदल दी आदिवासी इलाके की तस्वीर

Sun, 02 Sep 2018 04:08 PM IST
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, दिल्ली Updated Sun, 02 Sep 2018 04:08 PM IST
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dungarpur: where muslim feet roti to cow,two communities are together in cleanliness programmes
डूंगरपुर

राजस्थान का एक आदिवासी जिला है डूंगरपुर। नाम पढ़कर आप सोच रहे होंगे कि जब आदिवासी जिला है तो यहाँ की ख़ासियत क्या होगी। जी हाँ, डूंगरपुर आज अपने स्वच्छता अभियान और हिंदू-मुस्लिम भाईचारे की मिसाल के चलते दुनिया में जाना जाता है। देश का एकमात्र इलाक़ा है डूंगरपुर, जहाँ मुस्लिम हर सुबह गाय की रोटी निकालते हैं। स्वच्छता अभियान ने यहाँ के हिंदू-मुस्लिम समुदाय को एक-दूसरे का बना दिया है।और वो भी दिल से।

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डूंगरपुर सोता है, मगर ये चालीस कर्मचारी जागते हैं...क्यों और कैसे  

dungarpur: where muslim feet roti to cow,two communities are together in cleanliness programmes
डूंगरपुर

शहर में गंदगी का नामों-निशान तक नहीं है। नियम ही कुछ ऐसे बने हैं कि चाह कर भी कोई गंदगी नहीं फैला सकता। यहाँ सफ़ाई दिन में नहीं होती।जब डूंगरपुर सोता है तो चालीस सफ़ाई कर्मी रोड पर निकलते हैं।

रात दस बजे से लेकर सुबह तीन बजे तक शहर की सड़कों को चमका देते हैं।दिन में भी कोई गंदगी नहीं फैलाता। रात में सफ़ाई पर जुटे कर्मियों का कहना है कि यहाँ मोबाइल डस्टबीन घूमते रहते हैं। जहाँ भी थोड़ा बहुत कूड़ा दिखता है, उसे पहले डस्टबीन में डालते हैं और फिर बड़ी गाड़ी उसे उठा ले जाती है। इस काम में तीन-चार घंटे लग जाते हैं।

कर्मियों ने इस बात को माना कि स्वच्छता अभियान अब यहाँ के लोगों की आदत में शुमार हो गया है। दिन में जब बाज़ार खुलते हैं तो भी कहीं गंदगी नहीं फैलती। यही वजह है कि इस साल के स्वच्छता सर्वेक्षण में डूंगरपुर देश में 5 वें स्थान पर रहा।पहले नम्बर पर साउथ दिल्ली, दूसरे पर इंदौर, तीसरे स्थान पर तिरुचिरपल्ली और चौथे स्थान पर चंडीगढ़ रहा था।

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रविवार से रोटी बैंक भी शुरू हो गया...यह कैसे काम करता है

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डूंगरपुर

शहर के निर्धन और ज़रूरतमंद लोगों को भोजन उपलब्ध कराने के लिए रविवार यानी दो सितम्बर को डूंगरपुर में रोटी बैंक भी शुरू हो गया। सभापति गुप्ता का कहना है कि मुंबई के डिब्बे वाले से प्रेरित होकर हम यह मुहिम शुरू कर रहे हैं।

इसके लिए शहर के लोगों की एक समिति बना दी गई है। शुरू में प्राईवेट स्कूल के बच्चों से कहा गया है कि रोज़ाना एक अतिरिक्त रोटी लेकर आयें।

कोई भी व्यक्ति जो दान या सेवा करना चाहता है, वह भी रोटी बैंक की 31 सौ रुपए देकर मदद कर सकता है। इसके साथ ही मोबाइल रोटी बैंक भी शुरू किया जा रहा है।रोटी वाली गाड़ी शहर में घूमती रहेगी। भूखा व्यक्ति रोटी बैंक से निशुल्क भोजन प्राप्त कर सकता है।

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लोगों को योगा कराते हैं और केसर का दूध पिलाते हैं...एक रोचक किस्सा

dungarpur: where muslim feet roti to cow,two communities are together in cleanliness programmes
डूंगरपुर
हुआ ये कि डूंगरपुर नगर परिषद ने योगा कराने के लिए लोगों को बुलाया लेकिन कोई नहीं आया। नगर परिषद ने लोगों के घर गाड़ी भेज दी कि आप उसमें बैठ कर आ जाओ। लोग फिर भी नहीं आए तो परिषद के अधिकारी चिंता में पड़ गए कि अब क्या होगा।

एक आइडिया निकाला कि जो व्यक्ति हमारी गाड़ी में बैठकर योगा करने आएगा, उसे रोजाना एक गिलास केसर का दूध पिलाएँगे।फिर क्या था, योगा करने वालों का हुजूम उमड़ आया।

 

कमी बताओ और ईनाम जीतो...

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कूपन

डूंगरपुर में लोगों को स्वच्छता अभियान से जोड़ने के लिए नए नए प्रयोग हुए हैं। अगर बिजली एक दस सेकेंड के चली जाए और जो उसकी सूचना सबसे पहले नगर परिषद को देगा, उसे 25 रुपए ईनाम मिलेगा।किसी गलती से बिजली गई, उस पर दो सौ रुपए जुर्माना लगेगा।

चूँकि डूंगरपुर खुले में शौच करने की प्रथा को सौ फीसदी खत्म करने वाला पहला जिला है, इसलिए परिषद ने ऐलान कर रखा है कि अगर कोई आदमी इस नियम को तोड़ने वाले किसी व्यक्ति का फोटो परिषद को भेजता है तो उसे ईनाम मिलेगा।

सभी स्कूली बच्चों और उनके अभिभावकों को स्वच्छता अभियान के स्टीकर बाँटे गए हैं। इन्हें घर के मुख्य स्थान पर लगाना होता है।हर स्टीकर के साथ एक कूपन देते हैं। इसका ड्रॉ निकाला जाता है और विजेता को फ्रिज, टीवी और दूसरे कई अन्य ईनाम दिए जाते हैं।साफ-सफाई से जुड़ी दर्जनभर योजनाओं की केवल कमी बताने के लिए ईनाम मिलता है।

पहले तो मुस्लिमों ने मना कर दिया कि हम गाय की रोटी नहीं निकालेंगे...

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डूंगरपुर

डूंगरपुर नगर परिषद के सभापति केके गुप्ता ने 2016 में जुनून की सभी हदें पार कर स्वच्छता अभियान शुरू किया था।उन्होंने इस आदिवासी इलाके की तस्वीर बदल दी।बिल गेट्स से लेकर देश-दुनिया की कई हस्तियाँ यहाँ आ चुकी हैं।

स्वच्छता के मामले में राजस्थान का नम्बर-1 तो देश में पाँचवे पायदान पर है।गुप्ता का कहना है कि शुरू में मुस्लिमों ने स्वच्छता अभियान में ख़ास रूचि नहीं दिखाई।जब गाय की रोटी निकालने की बात आई तो उन्होंने साफ मना कर दिया।

समझाने-बुझाने के दौर चले, लेकिन वे मानने को तैयार नहीं।नगर परिषद सभापति ने यहाँ तक भी कह दिया कि कूड़ा गाड़ी उनके घरों के बाहर नहीं जाएगी।तनावपूर्ण माहौल में नगर परिषद के उपसभापति फकरूद्दीन आगे आए।

उन्होंने अपने लोगों को समझाया, उन्हें स्वच्छता अभियान की विस्तृत जानकारी दी।गाय की रोटी भी इसी अभियान का हिस्सा थी।कई दिन बाद मुस्लिम मान गए और उन्होंने न केवल गाय की रोटी निकालनी शुरू कर दी, बल्कि स्वच्छता अभियान को भी अपना लिया।

फकरूद्दीन कहते हैं, अब सभी लोग डूंगरपुर को देश का नम्बर वन शहर बनाने की मुहिम में जुट गए हैं।बता दें कि इस शहर की आबादी करीब पचास हजार है। इसमें दस-बारह हजार मुस्लिम और बाकी हिंदू हैं, लेकिन दोनों समुदायों में भाईचारे की मिसाल दी जाती है।

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