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और धरमाबाई ने बना दिया बांस से शौचालय
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Fri, 10 Mar 2017 05:23 PM IST
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धरमा द्वारा बनाया गया बांस का शौचालय
- फोटो : amar ujala
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नैनवा उपखंड की रजलावता ग्राम पंचायत की धरमा बाई इन दिनों गांव के लिए मिसाल बनी हुई है। उन्होंने मात्र ढाई हजार रुपए में ऐसा शौचालय बनाया है जिस देखने के लिए लोग आते हैं। इसकी खास बात यह है कि यह शौचालय बांस से बनाया गया है।
स्वच्छ भारत मिशन के तहत राजस्थान भले ही अपने जिलों को खुले में शौच से मुक्त बनाने में फिसड्डी रहा हो, लेकिन बूंदी के रालड़ी गांव की महिला ने यह साबित कर दिया है कि शौचालय बनाने के लिए केवल इच्छाशक्ति की जरूरत होती है। रजलावता सरपंच रामघणी बैरवा ने यहां ग्रामीणों को जागरूक करने के मकसद से यह कहा कि शौचालय बनवाने के लिए कोई ज्यादा पैसा नहीं लगता है आप लोग बांस से भी इसका निर्माण कर सकते हैं। यह सुनते ही रालड़ी गांव की धरमा बाई ने बांस, कील और खपच्चियों की मदद से शौचालय का निर्माण कर दिया। यही नहीं, महंगी टाइल्स नहीं लगा सकी तो हाथ से मांडणे बनाकर ही उसकी साज—सज्जा कर दी।
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स्वच्छ भारत मिशन के तहत राजस्थान भले ही अपने जिलों को खुले में शौच से मुक्त बनाने में फिसड्डी रहा हो, लेकिन बूंदी के रालड़ी गांव की महिला ने यह साबित कर दिया है कि शौचालय बनाने के लिए केवल इच्छाशक्ति की जरूरत होती है। रजलावता सरपंच रामघणी बैरवा ने यहां ग्रामीणों को जागरूक करने के मकसद से यह कहा कि शौचालय बनवाने के लिए कोई ज्यादा पैसा नहीं लगता है आप लोग बांस से भी इसका निर्माण कर सकते हैं। यह सुनते ही रालड़ी गांव की धरमा बाई ने बांस, कील और खपच्चियों की मदद से शौचालय का निर्माण कर दिया। यही नहीं, महंगी टाइल्स नहीं लगा सकी तो हाथ से मांडणे बनाकर ही उसकी साज—सज्जा कर दी।
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धरमा से प्रेरित हुए गांव के अन्य लोग
शौचालय की दीवारों पर बनाए गए मांडणे
- फोटो : amar ujala
धरमा के इस कार्य के लिए महिला दिवस पर नैनवा पंचायत मुख्यालय पर उन्हें सम्मानित भी किया गया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि सरकार से मिलने वाली राशि पक्का शौचालय बनवाने के लिए निर्माण सामग्री में कम पड़ती है, साथ ही पहले निर्माण कराने के बाद ये राशि मिल पाती है। इसमें काफी समय भी लगता है।
उधर, धरमा के इस काम की बदौलत वह अन्य ग्रामीणों के लिए रॉल मॉडल बन गई है। गांव के ही सुखलाल ने बताया कि अन्य लोग भी उनसे प्रेरित होकर ऐसा ही शौचालय बनाने की सोच रहे हैं। कुछ लोगों ने इसके लिए काम शुरू भी कर दिया है। सरपंच रामघणी ने बताया कि पक्के निर्माण पर खर्चा अधिक आने के कारण धरमाबाई ने शौचालय बनवाने से मना कर दिया था। इस पर उन्होंने उसे बांस से शौचालय बनाने को कहा। इस पर करीब ढाई हजार रुपए तक ही खर्चा आया।
उधर, धरमा के इस काम की बदौलत वह अन्य ग्रामीणों के लिए रॉल मॉडल बन गई है। गांव के ही सुखलाल ने बताया कि अन्य लोग भी उनसे प्रेरित होकर ऐसा ही शौचालय बनाने की सोच रहे हैं। कुछ लोगों ने इसके लिए काम शुरू भी कर दिया है। सरपंच रामघणी ने बताया कि पक्के निर्माण पर खर्चा अधिक आने के कारण धरमाबाई ने शौचालय बनवाने से मना कर दिया था। इस पर उन्होंने उसे बांस से शौचालय बनाने को कहा। इस पर करीब ढाई हजार रुपए तक ही खर्चा आया।