Sardarshahar By election: भाजपा ने अशोक पिंचा को दिया टिकट, बेनीवाल जाट को उतारकर बदल सकते हैं समीकरण
सरदारशहर विधानसभा उपचुनाव में संवेदना का फैक्टर सबसे अधिक हावी रहेगा। भंवरलाल शर्मा के निधन के बाद कांग्रेस उनके बेटे को चुनाव मैदान में उतार सकती है। जिससे पार पाना भाजपा के लिए सबसे मुश्किल टास्क होगा।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
सरदारशहर विधानसभा सीट पर हो रहे उपचुनाव में भाजपा ने पूर्व विधायक अशोक पिंचा को टिकट दिया है। भंवरलाल शर्मा ने पिछले चुनाव में अशोक पिंचा को 16 हजार से ज्यादा वोटों से हराया था। सरदार शहर में भंवर लाल की मृत्यु के बाद उप चुनाव होने जा जा रहा है। जिसमें कांग्रेस भंवर लाल के बेटे अनिल शर्मा को चुनाव लड़ा सकती है।
सरदारशहर कांग्रेस पार्टी की पक्की सीट है। सरदारशहर विधानसभा उपचुनाव इस बार संवेदना का चुनाव बन गया है। जिसका फायदा कांग्रेस के प्रत्याशी के लिए नजर आ रहा है। भाजपा के उम्मीदवार अशोक पिंचा 5वीं बार चुनाव लड़ने जा रहे हैं। जिसमें वे केवल एक ही बार चुनाव जीते हैं। हनुमान बेनीवाल इस चुनाव में किसी जाट को टिकट देकर चुनाव की दिशा बदल सकते हैं। सरदार शहर में 45 हजार ब्राम्हण, 40 हजार जाट, लगभग 40 हजार वोटर बनिया समुदाय से हैं। जिसमें से ब्राह्मण और बनिये और बाकी समाज का वोट भंवर लाल को मिलता आया है।
बेनीवाल के जाट उम्मीदवार से बीजेपी को हो सकता है नुकसान
अगर हनुमान बेनीवाल जाट उम्मीदवार को टिकट देते हैं तो सरदार शहर का चुनाव रोचक हो सकता है क्योंकि जाटों के 40 हजार वोट कांग्रेस और भाजपा से छिटक कर हनुमान बेनीवाल की पार्टी को जा सकते हैं। भंवर लाल को सभी जातियों का समर्थन प्राप्त था। जिसके चलते वो निरंतर चुनाव जीत जाते थे। सरदार शहर सीट कांग्रेस की पारंपरिक सीट रही है। जिसमें भाजपा की सेंधमारी नहीं चली थी।
पिछले चुनाव में भंवरलाल को मिले थे एक लाख वोट
सरदारशहर में 290 हजार वोटर हैं। जिसमें अभी तक के आकड़ों के अनुसार 70 फीसदी ही वोटिंग हुई है यानी कि दो लाख ही वोट पड़ता है। भंवर लाल को पिछले चुनाव में लगभग एक लाख वोट मिले थे और अशोक पिंचा को 80 हजार के आसपास वोट मिले थे। जीत और हार का मार्जिन 16 हजार के आसपास रहा था।
जाट वोट टूटा कांग्रेस की जीत होगी पक्की
अगर कांग्रेस भंवर लाल के बेटे पर दांव खेलती है तो वो वोटर जो भंवर लाल के साथ थें, वो कांग्रेस को वोट कर सकते हैं। भंवर लाल के प्रति एक संवेदना की लहर का भी फायदा कांग्रेस को मिल सकता है लेकिन हनुमान बेनीवाल अगर जाट कार्ड खेलते हैं तो सबसे ज्यादा नुकसान भाजपा को होना तय है। इसके पीछे वजह है कि 40 हजार जाटों का वोट अगर टूटता है तो भाजपा को भारी नुकसान होगा। भंवर लाल के वोटरों में सर्व समाज के वोटर शामिल रहे हैं अगर जाट छिटकता है तो भी बनिया, ब्राम्हण और राजपूत और अन्य समाज का वोट कांग्रेस की जीत के लिए काफी होगा। इस परिस्थिति में भाजपा ने अशोक पिंचा को टिकट देकर जाट नेताओं को नाराज किया है।
दूसरा सबसे बड़ा फैक्टर है एक संवेदना का जो भंवर लाल के साथ है, उससे भी पार पाना भाजपा के लिए बड़ा मुश्किल टास्क है। सरदारशहर के उप चुनाव में मुख्यमंत्री गहलोत की साख भी लगी हुई है। जिसके चलते कांग्रेस भी पूरे दम खम से मैदान में मौजूद है।