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बागी अड़े, भाजपा-कांग्रेस के होश उड़े
अमर उजाला,जयपुर
Updated Mon, 18 Nov 2013 12:59 PM IST
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राजस्थान में भाजपा-कांग्रेस की मुश्किलें आसान होती नहीं दिख रहीं। बागियों को मनाने की सारी कोशिशें नाकाम रहीं। नाम वापसी के बाद राजस्थान में करीब 70 ऐसी सीटें हैं, जहां जीत-हार का फैसला बागियों के हाथों में हैं।
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भाजपा की 34 ऐसी सीटें हैं, जहां बागी मैदान में हैं, जबकि कांग्रेस की 29 सीटें हैं। इन्हें छोड़कर छह सीटें ऐसी हैं, जहां दोनों ही दलों के बागी ताल ठोंक रहे हैं। इस बार 168 महिलाएं चुनाव मैदान में हैं।
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बागियों की चुनौती को लेकर सबसे ज्यादा मंडावा में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष चंद्रभान घिरे हैं, जहां उनकी पार्टी की विधायक रीटा चौधरी चुनाव मैदान में डटी हुई हैं।
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कांग्रेस के बागी राज्य मंत्री राजकुमार शर्मा व भाजपा की बागी पूर्व विधानसभा अध्यक्ष व राजस्थान विधानसभा में पहली महिला अध्यक्ष के रूप में अपना नाम दर्ज करवाने वाली सुमित्रा सिंह मुख्य हैं।
राजस्थान विधानसभा में सीटों के मुकाबले दस गुना अधिक उम्मीदवार मैदान में डटे हुए हैं। प्रदेश 200 सीटों पर 2096 प्रत्याशियों के बीच मुकाबला होगा। करीब 540 उम्मीदवारों ने नाम वापस ले लिए हैं, जिनमें कोई मुख्य बागी शामिल नहीं हैं।
अकेले जयपुर जिले में 19 सीटों पर 303 प्रत्याशी मैदान में डटे हुए हैं। चूरू सीट से बसपा उम्मीदवार जगदीश मेघवाल की मौत हो जाने के कारण अब इस सीट पर चुनाव टल गया है। अब पहली दिसंबर को 199 सीटों पर मतदान होगा।
कांग्रेस ने भंवरी प्रकरण में जेल बंद विधायक महिपाल मदेरणा की पत्नी लीला मदेरणा को ओसियां से और विधायक मलखान सिंह की मां अमरी देवी को लूणी से उम्मीदवार बनाया हैं।
यहां से कांग्रेस के पूर्व मंत्री राजेंद्र चौधरी पार्टी छोड़कर निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं। दुष्कर्म के मामले में जेल में बंद पूर्व मंत्री बाबूलाल नागर के भाई हजारी लाल नागर को दूदू से उम्मीदवार बनाए गए हैं।
कांग्रेस ने बागियों को दिया 24 घंटे का वक्त
राजस्थान में एक दिसंबर को होने वाले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने अपने बागी उम्मीदवारों को पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी के समर्थन में आने के लिए चौबीस घंटे का समय दिया हैं।
कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशियों के खिलाफ निर्दलीय प्रत्याशी के पक्ष में नामांकन पत्र दाखिल कर बगावत करने वाले कांग्रेसजनों को प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने चौबीस घंटे का समय देते हुए चेताया है कि इस दौरान वे पार्टी उम्मीदवार के समर्थन में नहीं आते हैं तो उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाएगी।