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Rajasthan: किन्नर नीतू ने कराई 10 गरीब बेटियों की शादी, हिंदू-मुस्लिम एकता की पेश की मिसाल, देखें तस्वीरें
Mon, 27 Nov 2023 06:03 PM IST
अरविंद कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भरतपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भरतपुर
Published by: अरविंद कुमार
Updated Mon, 27 Nov 2023 06:03 PM IST
सार
Bharatpur News: हमारे समाज में किन्नरों को हेय दृष्टि से देखा जाता है, लेकिन कई किन्नर समाज में कुछ ऐसे काम कर रही हैं, जो अच्छे-अच्छे पैसे वाले और प्रतिष्ठित लोग भी नहीं कर पाते हैं। राजस्थान के भरतपुर जिले की किन्नर नीतू मौसी भी अपने सामाजिक कामों की वजह से फिर से सुर्खियों में हैं।
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10 गरीब बेटियों की हुई शादी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
आज भी समाज में किन्नरों को नकारात्मक एवं हेय दृष्टि से देखा जाता है। लोग इन्हें देखकर नजरें चुराते नजर आते हैं। लेकिन भरतपुर शहर की रहने वाली किन्नर नीतू मौसी (80) लोगों के लिए अनूठी मिशाल पेश कर रही हैं। दरअसल, जो घर-घर जाकर बधाई के रूप में नेग मिलता है, उसे एकत्रित कर हर साल गरीब कन्याओं की शादी करवाती हैं। पूरा शहर इन्हें मौसी के नाम से जानता है।
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बता दें कि किन्नर नीतू मौसी ने सोमवार को सामूहिक विवाह समारोह में 10 गरीब बेटियों की शादी करवाई है। जहां समारोह स्थल पर एक ओर मंडप में हिंदू रीति-रिवाज के साथ आठ बेटियों की शादी वैदिक मंत्रों के उच्चारण के साथ कराई जा रही थी तो दूसरी ओर आयतों के बीच दो मुस्लिम बेटियों का निकाह कराया गया।
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किन्नर नीतू मौसी ने कहा कि वैसे तो अब तक 150 से अधिक गरीब बेटियों की शादी करवा चुकी हैं। लेकिन विवाह सम्मेलन के द्वारा उन्होंने 120 गरीब लड़कियों की शादी करवाई है। यह 12वां विवाह सम्मेलन है, जो प्रतिवर्ष करवाती हैं। इस वर्ष भी सोमवार को दस बेटियों की शादी करवाई है, जिनमें में से दो मुस्लिम और आठ हिंदू हैं। लेकिन एक ही मंडप के नीचे शादी संपन्न कराई गई। किन्नरों की इस अनूठी पहल ने न केवल हिंदू-मुस्लिम एकता को बल्कि सभी जाति व धर्मों में भाईचारे का संदेश दिया है।
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उन्होंने कहा कि पूरी शादी समारोह का खर्चा खुद उठाती हैं। वधुओं के लिए शादी का पूरा सामान व सोने के आभूषण के साथ बाराती व घरातियों के लिए दावत का इंतजाम उनकी ही ओर से किया जाता है। साथ ही बाहर के लोगों के द्वारा जो कन्यादान दिया जाता है, उनके हिस्सा करके वह वर-वधु को दे देती हैं।
किन्नर नीतू मौसी ने कहा कि सारी जिंदगी कमाया दिल में कुछ ऐसी भावना उत्पन्न हुई कि हम लोग भी इंसान हैं, चाहे जिस भी रूप में हों। कुछ ऐसा करना चाहिए, जिससे मरने के बाद दूसरे जन्म में फायदा मिले। मेरी नजर में सबसे बड़ा दान कन्यादान है। मुझे यही उपाय समझ में आया और हर साल गरीब बेटियों की शादी स्वयं के खर्चे पर करवाती हूं।
उन्होंने कहा, जब तक अंतिम सांस रहेगी यह कार्य तब तक जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि जब दिल में सोच लेते हैं, बाहर भी समतल दिखाई देता है। अगर सोच लें, यह पहाड़ है कैसे चढ़ा जाएगा फिर वह चढ़ नहीं सकता। मुझे कभी कोई कमी महसूस नहीं हुई। कोई परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा और भगवान से सिर्फ यही प्रार्थना करती हूं और काम पूरा हो जाता है।
पूरे साल जो भी बधाई के रूप में नेग मिलता है, उसी में से कुछ हिस्सा गरीब बेटियों की शादी में प्रतिवर्ष खर्च कर दिया जाता है। इस शादी समारोह में पूरा शहर शामिल होता है और अन्य जगह से भी किन्नर समाज हाथ बटाने के लिए यहां पहुंचता है।