{"_id":"64795381bbaaf42409058d2c","slug":"rajasthan-missing-hanuman-saini-returned-home-after-33-years-relatives-had-got-death-certificate-made-2023-06-02","type":"story","status":"publish","title_hn":"Rajasthan: 33 साल बाद घर लौटा महिला की 'मांग का सिंदूर', घर वाले डेथ सर्टिफिकेट भी बनवा लिए थे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Rajasthan: 33 साल बाद घर लौटा महिला की 'मांग का सिंदूर', घर वाले डेथ सर्टिफिकेट भी बनवा लिए थे
Fri, 02 Jun 2023 07:57 AM IST
अरविंद कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलवर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलवर
Published by: अरविंद कुमार
Updated Fri, 02 Jun 2023 07:57 AM IST
सार
राजस्थान में अलवर जिले के बानसूर में एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है। यहां 33 साल पहले गायब हुए 75 साल के शख्स की घर वापसी पर परिजन हक्के-बक्के रह गए। मृत समझकर परिजनों ने उसके लौटने की आस छोड़ दी थी और 2022 में डेथ सर्टिफिकेट भी बनवा लिया था।
विज्ञापन
33 साल बाद घर लौटा हनुमान सैनी
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
अलवर के बानसूर में मृत घोषित एक शख्स अचानक 33 साल बाद 75 साल की उम्र में अपने घर लौट आया। परिजन उसके जीवित होने की आस छोड़ चुके थे और साल 2022 में डेथ सर्टिफिकेट भी बनवा लिया था। एक सुहागिन महिला ने 33 साल तक बेवा की जिंदगी बिताने के बाद जब पति को जीवित देखा तो उसके भी होश उड़ गए। जब पूरा माजरा समझ में आया तो परिजन के जीवित लौटने पर पूरे घर में खुशी का माहौल हो गया।
विज्ञापन
बता दें कि साल 1989 में घर से दिल्ली गए हनुमान सैनी खारी बावली इलाके में काम करते समय अचानक गायब हो गए थे। परिजनों ने कई साल तक तलाश किया, लेकिन कोई सुराग नहीं लगा। आखिरकार मृत मानते हुए 2022 में डेथ सर्टिफिकेट जारी करवा लिया गया। लेकिन करीबन 33 साल बीत जाने पर हनुमान सैनी जीवित घर पर लौटे, तो परिजनों में खुशी का माहौल है। हनुमान सैनी के पांच संतान हैं, जिसमें तीन लड़की और दो लड़के हैं। सभी अब शादीशुदा हैं। बहन-बेटियां उनका हाल-चाल जानने के लिए घर पहुंची हैं। अपने बच्चों को छोटी सी उम्र में ही छोड़कर चले जाने के बाद 30 मई को अपने घर पहुंचे हनुमान सैनी को देखने जमावड़ा लगा हुआ है। उनके पुराने दोस्त, परिचित, पड़ोसी, गांव के लोग बड़ी संख्या में हालचाल और पूरा घटनाक्रम पूछने के लिए उनके घर पहुंच रहे हैं।
विज्ञापन
हनुमान सैनी बोले- कांगड़ा माता ने मुझे बुलाया था...
हनुमान सैनी ने बताया कि 1989 में दिल्ली के खारी बावली की एक दुकान पर काम करते समय अचानक से वह हिमाचल के कांगड़ा माता मंदिर पहुंच गए और करीबन 33 साल तक माता के मंदिर में अपनी आराधना-तपस्या की और 33 साल बीत जाने के बाद माता के आदेश पर ही घर वापसी की है। हनुमान सैनी दिल्ली से 29 मई की रात को खैरथल पहुंचे। जहां बानसूर का कोई साधन नहीं मिलने पर रात को पैदल चलकर ततारपुर चौराहे तक पहुंचे। उसके बाद सुबह किसी साधन से बानसूर के स्वास्तिया हनुमान मंदिर तक पहुंचे। फिर मंदिर में धोक लगाकर अपने घर का रास्ता बदल जाने पर किसी दूसरे व्यक्ति की सहायता ली। वह व्यक्ति उन्हें पहचान गया। उसने हनुमान सैनी को उनके घर ले जाकर परिजनों के बीच छोड़ा। परिजन अचानक प्रकट हुए हनुमान सैनी को देखकर अचंभित हो गए। एक बार तो अपनी आंखों पर भरोसा नहीं हुआ। लेकिन जब हनुमान सैनी ने पूरा घटनाक्रम बताया तो घर में खुशी का माहौल हो गया।
विज्ञापन
हनुमान सैनी की बहन और बेटियों को इस बारे में पता चला तो ससुराल से आकर उन्होंने भी अपने पिता और भाई का हालचाल जाना और पूछा आप इतने दिनों तक कहां थे। हनुमान सैनी की रिश्तेदारियों में जैसे ही पता चला कि हनुमान घर वापस आ गए। तो उनकी कुशलक्षेम पूछने के लिए घर आने का सिलसिला लगातार जारी है।
हनुमान सैनी के बेटों ने 2022 में बनवाया पिता का मृत्यु प्रमाण पत्र...
हनुमान सैनी के बड़े बेटे रामचंद्र सैनी बताया कि 33 साल अपने पिता की याद में गुजर जाने के बाद पिता की जिंदा होने की आस छोड़ चुके थे। हमने आखिरकार न्यायालय का सहारा लेकर पिताजी का मृत्यु प्रमाण पत्र 2022 में बनवाया था। क्योंकि जमीन संबंधित समस्याओं से परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। लेकिन पिताजी के घर आने पर हमें बहुत खुशी हुई है। भगवान का शुक्र अदा करते हैं कि हम छोटे-छोटे थे और हमने अपने पिता की सूरत तक नहीं देखी थी। आज हमें वह पूरी खुशी मिल गई और हमारे पिता परिवार के बीच पहुंचे हैं।
हनुमान सैनी का सफर यह रहा...
हनुमान सैनी ने बताया कि मैं दिल्ली से एक ट्रेन में बैठकर हिमाचल की ओर जा रहा था। तब मुझे पठानकोट उतरना था। लेकिन मैं उस वक्त ट्रेन के फर्स्ट क्लास के डिब्बे में बैठा हुआ था और मेरी जेब में मात्र 20 रुपये थे। मेरे पास टीटी आया, उसने मुझे किराए के लिए कहा, तो मेरे पास 20 रुपये थे। रुपये कम होने पर टीटी ने मना कर दिया। किराया ज़्यादा होने की बात कही। लेकिन उस वक्त ट्रेन के टीटी ने ही मुझे पूरा टिकट अपनी जेब के पैसे से बना कर दिया और मैं पठानकोट उतर कर हिमाचल के कांगड़ा माता मंदिर पहुंच गया। जहां मैंने माता की सेवा और पूजा में 33 साल बिता दिए। 33 साल के बीच में मैं एक बार गंगासागर गया और कोलकाता वाली काली मैया के मंदिर में भी धोक लगाने पहुंचा था। लेकिन मुझे मेरी तपस्या और मेरी पूजा-अर्चना पूरी होने के बाद कांगड़ा माता ने घर भेजने का आदेश दिया। तो मैं वहां से मेरे घर और मेरे परिवार के बीच आ गया।