फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Rajasthan ›   Ajmer News ›   Controversy on Ajmer Masjid Adhai Din Ka Jhopra BJP MP Bohra wrote letter to Modi government

Controversy: 'अढ़ाई दिन का झोपड़ा समाज पर कलंक', MP बोहरा ने केंद्र को लिखा पत्र, क्या है इस मस्जिद का इतिहास?

Wed, 10 Jan 2024 02:57 PM IST
उदित दीक्षित न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: उदित दीक्षित Updated Wed, 10 Jan 2024 02:57 PM IST
सार

Ajmer Masjid Adhai Din Ka Jhopra: 1192 ईस्वी में अफगान सेनापति मोहम्मद गोरी के आदेश पर कुतुबुद्दीन ऐबक ने 'अढ़ाई दिन का झोंपड़ा' बनवाया था। इससे पहले यहां संस्कृत विद्यालय और मंदिर थे, जिन्हें तोड़कर मस्जिद में बदल दिया गया था।

विज्ञापन
Controversy on Ajmer Masjid Adhai Din Ka Jhopra BJP MP Bohra wrote letter to Modi government
भाजपा सांसद रामचरण बोहरा ने केंद्र सरकार को लिखा पत्र। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

Ajmer News: अजमेर के अढ़ाई दिन का झोपड़ा (मस्जिद) को लेकर भाजपा सांसद रामचरण बोहरा ने पहले विवादित बयान दिया और अब इसे लेकर केंद्र सरकर को पत्र भी लिख दिया है। जिसमें सरकार से इसे मूल स्वरूप में परिवर्तित करने की मांग की गई है। बोहरा ने कहा कि अढ़ाई दिन का झोपड़ा (Adhai Din Ka Jhopra) वेद पुराणों के प्रसारक का केंद्र रहा है, जिसे मोहम्मद गौरी के कहने पर कुतुबुद्दीन ऐबक ने तोड़ दिया था।  इस्लामिक दासता यह चिह्न आज भी भारतीय समाज के लिए कलंक है।  

विज्ञापन


झलकती है गुलामी की मानसिकता  
इससे पहले सांसद बोहरा ने राजस्थान विश्वविद्यालय के एक कार्यक्रम इसे लेकर बयान भी दिया था। उन्होंने कहा था- अढ़ाई दिन के झोपड़े से गुलामी की मानसिकता झलकती है। अब इससे मुक्ति पाने के दिन आ गए हैं। अब वह दिन दूर नहीं जब इस इमारत में फिर से संस्कृत के मंत्र गूंजेंगे और संस्कृत के मंत्रों का पाठ किया जाएगा। इस कार्यक्रम में राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र भी मौजूद थे।  

विज्ञापन

क्या है अढ़ाई दिन के झोपड़े का इतिहास?
1192 ईस्वी में अफगान सेनापति मोहम्मद गोरी के आदेश पर कुतुबुद्दीन ऐबक ने 'अढ़ाई दिन का झोंपड़ा' बनवाया था। इससे पहले यहां संस्कृत विद्यालय और मंदिर थे, जिन्हें तोड़कर मस्जिद में बदल दिया गया था। इस झोपड़े के मुख्य द्वार पर संगमरमर से बना एक शिलालेख भी है, जिस पर संस्कृत विद्यालय का जिक्र किया गया है।



इस झोपड़े में 70 स्तंभ हैं, जो उन मंदिरों के हैं जिन्हें धवस्त किया गया था। इन स्तंभों पर खूबसूरत नक्काशी की गई है और इनकी ऊंचाई 25 फीट के करीब है। झोपड़े का कुछ हिस्सा आज भी अंदर से मंदिर की तरह लगता है, हालांकि यहां बनाई गईं नई दीवारों पर कुरान की आयतें लिख दी गईं हैं, जिससे पता चलता है कि ये एक मस्जिद है।  90 के दशक में यहां मंदिरों की प्राचीन मूर्तियां बिखरी पड़ी थीं, जिन्हें बाद में संरक्षित किया गया था।

कहा जाता है कि इस मस्जिद को बनाने में 60 घंटे यानी ढाई दिन का समय लगा था, इसलिए इसका नाम 'अढ़ाई दिन का झोंपड़ा' पड़ गया। हालांकि, कुछ लोग इसके नाम को ढाई दिन के उर्स मेले से भी जोड़ते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed