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Ajmer: दरगाह में लाइसेंस अनिवार्यता पर विवाद गरमाया, सरवर चिश्ती बोले- यह तुगलकी फरमान, नहीं मानेंगे नया नियम

Wed, 03 Dec 2025 12:00 PM IST
अजमेर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अजमेर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अजमेर Published by: अजमेर ब्यूरो Updated Wed, 03 Dec 2025 12:00 PM IST
सार

Ajmer: दरगाह में जियारत करवाने वाले खादिमों के लिए लाइसेंस अनिवार्य करने के निर्णय पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। अंजुमन सैयद जादगान के सचिव सरवर चिश्ती ने इसे तुगलकी फरमान बताते हुए नाजिम पर गंभीर आरोप लगाए और आदेश वापस लेने की मांग की। 

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Controversy escalates over the mandatory licensing requirement at Ajmer Dargah; Sarwar Chishti says
अजमेर दरगाह - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अजमेर ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह में जियारत करवाने वाले खादिमों के लिए अब लाइसेंस अनिवार्य करने के दरगाह कमेटी के निर्णय ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। केंद्र सरकार और कोर्ट के निर्देशों के आधार पर लागू की जा रही इस नई व्यवस्था के खिलाफ अंजुमन सैयद जादगान के सचिव सैयद सरवर चिश्ती ने तीखा विरोध दर्ज कराया है। उन्होंने इस फैसले को तुगलकी फरमान बताते हुए साफ कहा है कि खादिम समाज इस आदेश को किसी भी हालत में स्वीकार नहीं करेगा।
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बता दें कि दरगाह नाजिम मोहम्मद बिलाल खान ने 1 दिसंबर को विज्ञापन जारी कर जियारत कराने के लिए लाइसेंस आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है। 5 जनवरी 2026 अंतिम तिथि तय की गई है। नाजिम का कहना है कि यह कदम पूरी तरह नियमों, कोर्ट निर्देशों और प्रशासनिक प्रक्रिया के अनुरूप है, जिससे किसी के हित प्रभावित नहीं होंगे। लेकिन आदेश के जारी होते ही दरगाह में विरोध की लहर दौड़ गई।
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आदेश के विरोध में आयोजित बैठक में सैयद सरवर चिश्ती ने नाजिम पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि नाजिम की नियुक्ति ही अवैध है और दरगाह कमेटी का अस्तित्व भी संदेह के घेरे में है। ये तुगलकी फरमान नहीं चलेंगे। उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि नाजिम ने बिना चर्चा और संवाद के आदेश लागू कर खादिम समुदाय को अपमानित करने की कोशिश की है।
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सैयद सरवर चिश्ती ने बताया कि एक्ट में यह स्पष्ट प्रावधान है कि गरीब खादिमों के लिए मेंटेनेंस व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, लेकिन दरगाह कमेटी इस दिशा में कुछ नहीं करती। चाबियों का रजिस्टर एक साल से गायब है और यहां दादागिरी की जा रही है,” उन्होंने कहा। चेतावनी देते हुए बोल कि आज हमारी बैठक में कुछ लोग ही आए, लेकिन यदि हमने आवाज दी तो 10 हजार खादिम दरगाह में भर जाएंगे। हमारे लाखों अनुयायी हैं, हमारी सहनशीलता को कमजोरी न समझा जाए।”


सरवर चिश्ती ने यह भी आरोप लगाया कि हर साल उर्स से पहले जानबूझकर ऐसे आदेश जारी किए जाते हैं ताकि व्यवस्थाओं में बाधा उत्पन्न हो। “उर्स करीब है और अब नया बखेड़ा खड़ा कर दिया गया है। खादिम समुदाय कमजोर नहीं है। हमें हल्के में लेना बड़ी भूल होगी। दूसरी ओर कलेक्टर लोकबंधु, एसपी वंदिता राणा व अन्य अधिकारियों ने उर्स व्यवस्थाओं का जायजा लेने के दौरान चिश्ती की शिकायतें भी सुनीं।

चिश्ती ने प्रशासन के सामने नाजिम पर कार्रवाई की मांग रखते हुए कहा कि दरगाह कमेटी मनमर्जी चलाने की कोशिश कर रही है, जबकि मंत्रालय से लेकर नियमों तक कहीं भी ऐसे आदेश का सीधा उल्लेख नहीं है। दरगाह में लाइसेंस व्यवस्था को लेकर शुरू हुआ यह विवाद उर्स से पहले बड़ा मुद्दा बन चुका है। देखना होगा कि प्रशासन इस तनातनी को कैसे सुलझाता है और क्या खादिमों की आपत्तियों को ध्यान में रखकर कोई नई पहल की जाती है।

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