अजमेर: हाई सिक्योरिटी जेल में बिल्लियां बनीं ‘पहरेदार’, कोबरा घुसा तो ऐसे बचाई गैंगस्टर की जान
अजमेर की हाई सिक्योरिटी जेल में करीब 10 से 12 बिल्लियां अब सुरक्षाकर्मियों के साथ गश्त का हिस्सा बन गई हैं। चूहों से निजात पाने के लिए लाई गई इन बिल्लियों ने सितंबर में सेल में घुसे जहरीले कोबरा को देखकर शोर मचाया, जिससे लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े एक गैंगस्टर की जान बच गई।
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अजमेर की हाई सिक्योरिटी जेल में तैनात सुरक्षाकर्मियों और अधिकारियों के साथ अब करीब 10 से 12 बिल्लियां भी रोजाना नियमित रूप से गश्त करती हैं। कुख्यात अपराधियों और हार्डकोर गैंगस्टरों के लिए बनी इस अति-सुरक्षित जेल में चूहों का सफाया करने के उद्देश्य से लाई गई ये बिल्लियां अब परिसर की दैनिक दिनचर्या का अभिन्न हिस्सा बन चुकी हैं। यह न केवल जेल परिसर को चूहों से पूरी तरह मुक्त रख रही हैं, बल्कि अपनी सतर्कता से बंदियों की सुरक्षा में भी मददगार साबित हो रही हैं।
कोबरा सांप से बचाई गैंगस्टर की जान
जेल प्रशासन के अनुसार, इन बिल्लियों की सतर्कता के कारण ही बीते सितंबर महीने में लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े एक कुख्यात गैंगस्टर की जान बच सकी थी। रात के समय उस गैंगस्टर की सेल में नाली के रास्ते एक जहरीला कोबरा सांप घुस आया था। उस वक्त गैंगस्टर बेखबर होकर सो रहा था। तभी वहां मौजूद बिल्लियों की नजर अचानक उस कोबरा पर पड़ी।
बिल्लियों ने बिना समय गंवाए सेल के भीतर जाकर सांप को चारों तरफ से घेर लिया और जोर-जोर से शोर मचाना शुरू कर दिया। बिल्लियों के लगातार मचाए गए शोर को सुनकर सो रहे गैंगस्टर की अचानक नींद खुल गई। अपने सामने बेहद जहरीला कोबरा देखकर उसने तुरंत ड्यूटी पर तैनात संतरी को आवाज लगाई। इसके बाद सुरक्षाकर्मियों ने समय रहते कोबरा का सुरक्षित रेस्क्यू किया, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया।
गश्त में कदमताल और बंदियों का अपनापन
इस हाई सिक्योरिटी जेल में वर्तमान में रोहित गोदारा और लॉरेंस बिश्नोई गैंग के गुर्गों समेत लगभग 90 हार्डकोर अपराधी और बड़े गैंगस्टर बंद हैं। बाहरी दुनिया से पूरी तरह कटे इन कुख्यात बंदियों के बीच भी ये बिल्लियां काफी लोकप्रिय हो चुकी हैं। जेल में बंद कैदी इन बिल्लियों को बेहद पसंद करते हैं और नियमित रूप से उन्हें रोटी चूरकर खिलाते हैं तथा दूध पिलाते हैं। कई बार ये बिल्लियां बंदियों की कोठरियों के आसपास बैठ जाती हैं, जिससे तन्हाई में रह रहे बंदियों को एक तरह के अपनेपन का अहसास होता है। यदि किसी दिन ये बिल्लियां आसपास दिखाई न दें, तो बंदी तुरंत जेल प्रहरियों से उनके बारे में पूछताछ करने लगते हैं और उन्हें अपने पास बुलाते हैं। जब जेल के अधिकारी और प्रहरी सुरक्षा जांच के लिए अलग-अलग हिस्सों में निगरानी करने निकलते हैं, तो ये बिल्लियां भी उनके साथ कदमताल मिलाते हुए चलती हैं। अधिकारी जब किसी सेल के पास रुकते हैं, तो बिल्लियां भी वहीं ठहर जाती हैं और गश्ती दल के आगे बढ़ते ही फिर साथ चल देती हैं।
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चूहों से निजात और सुरक्षा पर कड़ी निगरानी
जेल अधीक्षक पारस जांगिड़ ने बताया कि जेल में शुरुआत में चूहों की समस्या से निपटने के लिए बिल्लियों को लाया गया था। अब करीब 10 से 12 काली और भूरी बिल्लियां यहां बेधड़क घूमती हैं। सुरक्षाकर्मी भी उनके रंग और पहचान के हिसाब से ही उन्हें पुकारते हैं।
हालांकि, अति-संवेदनशील जेल होने के कारण प्रशासन इन बिल्लियों की आवाजाही पर भी लगातार कड़ी नजर रखता है। जेल अधिकारियों का कहना है कि बिल्लियों की गतिविधियों पर सतर्कता इसलिए रखी जाती है, ताकि कोई भी आपराधिक तत्व इनके माध्यम से किसी तरह की प्रतिबंधित सामग्री जेल परिसर के भीतर पहुंचाने का प्रयास न कर सके। अजमेर की जेल में ऐसी कोई भी अवांछित घटना सामने नहीं आई है, लेकिन वर्ष 2013 में ब्राजील की एक जेल में बिल्ली के शरीर पर मोबाइल फोन और औजार बांधकर भीतर भेजने का मामला उजागर हो चुका है। इसीलिए जेल प्रशासन सुरक्षा के मामले में कोई ढील नहीं देता।