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Rajasthan News : दरगाह में मंदिर होने के दावे के बाद मीडिया के सामने आए अजमेर दरगाह के दीवान, जानिये क्या कहा
Fri, 29 Nov 2024 06:59 PM IST
प्रिया वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अजमेर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अजमेर
Published by: प्रिया वर्मा
Updated Fri, 29 Nov 2024 06:59 PM IST
सार
ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह में शिव मंदिर होने के दावे की याचिका स्वीकार होने के बाद अजमेर दरगाह के दीवान ने पहली बार मीडिया के सामने अपनी बात कही है और हिंदू सेना के दावे को खारिज किया है। जानिये क्या बोले दरगाह के दीवान
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राजस्थान
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
अजमेर में ख्वाजा साहब की दरगाह में संकट मोचन महादेव मंदिर होने के दावे वाली याचिका कोर्ट में स्वीकार होने के बाद देशभर में विवाद खड़ा हो गया है। इस फैसले के बाद से भाजपा और कांग्रेस के नेताओं समेत अन्य पार्टियों के नेता अलग-अलग बयान दे रहे हैं और इसी के साथ दरगाह का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है।
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इसी बीच दरगाह से जुड़े लोगों की प्रतिक्रियाएं भी अब सामने आने लगी हैं। ये लोग विष्णु गुप्ता द्वारा किए गए दावे को नकार कर दरगाह को बरसों पुरानी बता रहे हैं। इस सबके बीच आज ख्वाजा गरीब नवाज के वंशज व आध्यात्मिक धर्मगुरु दरगाह के दीवान सैयद जैनुअल अली आबेदीन मीडिया के सामने आए और उन्होंने हिन्दू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता द्वारा दरगाह में मंदिर होने के दावे को सिरे से खारिज करते हुए कुछ पुरानी किताबों का जिक्र किया।
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उन्होंने कहा कि दरगाह का इतिहास 800 साल पुराना है। उस जमाने में यहां कच्चा मैदान था और उसके अंदर उनकी कब्र थी। अब खुद अंदाजा लगा सकते हैं कि वह भी कच्ची होगी। 150 साल तक वहां बिल्कुल भी पक्का कंस्ट्रक्शन नहीं था तो उसके नीचे मंदिर कहां से आ सकता है। उन्होंने कहा कि गवर्नमेंट बॉडी पर कोई केस होता है तो उससे पहले नोटिस देना पड़ता है, लेकिन किसी को भी नोटिस नहीं दिया। इसके साथ ही ख्वाजा साहब के वंशज को पार्टी नहीं बनाया गया। सरकार अपने लिखे हुए को नकार नहीं सकती।
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अजमेर दरगाह अंजुमन कमेटी सचिव सरवर चिश्ती ने कहा कि हम भी 30 करोड़ हैं, हमें दबाने की कोशिश सही नहीं है। उन्होंने कहा कि अजमेर कमांडर ने 1829 में दरगाह को एक्सप्लेन किया था। कर्नल जेम्स टॉड जब अजमेर मेरवाड़ा के कमिश्नर होकर आए थे, इन्होंने भी 1829 में अपनी किताब में लिखा है- मुझे हिंदुस्तान के कई स्टेट में जाने का मौका मिला। जब मैं अजमेर गया तो वहां जाकर देखता हूं कि एक कब्र लोगों के दिलों पर हुकूमत कर रही है। 1716 की एक किताब है, जिसे एनसाइक्लोपीडिया मैट्रिक कहा जाता है। इसमें भी दरगाह का पूरा इतिहास है। यह सिर्फ नई कंट्रोवर्सी सिर्फ एक किताब को लेकर कर दी गई है, यह कहां तक जायज है।
उन्होंने 1961 में सुप्रीम कोर्ट के जजमेंट का हवाला देते हुए कहा कि इसमें दरगाह का पूरा इतिहास दिया गया है। फरवरी 2002 में गवर्नमेंट ऑफ इंडिया ने दरगाह के एडमिनिस्ट्रेटर और प्रॉपर्टी को लेकर जेपीसी बैठाई थी। 20 दिसंबर 2002 को राज्यसभा में भी इसे रखा है, जिसमें दरगाह को लेकर पूरी कहानी है। इसमें ख्वाजा साहब की दरगाह कैसी थी और कोई वहां मंदिर था या नहीं यह सब क्लियर है।
उन्होंने कहा कि हरविलास शारदा की किताब 1910 में लिखी गई है, जिसमें दरगाह की बातों का जिक्र करते हुए- ऐसा कहा जाता है, ऐसा सुना जाता है, जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया है। उन्होंने कहा कि हरविलास शारदा इतिहासकार नहीं हैं, वे एक एजुकेटेड व्यक्ति थे और उनकी किताब में क्लियर लिखा हुआ है कि ऐसा कहा जाता है, ऐसा सुना जाता है। इसके अलावा वादी को जो कहना है, वह उसने कोर्ट में कह दिया।
दरगाह दीवान ने मजार के पक्का बनने की बात बताते हुए कहा कि मालवा के बादशाह के पोते ख्वाजा हुसैन नागौरी को किसी कार्यक्रम में इनाम मिला था। उन्होंने उस पैसे से ख्वाजा साहब का गुंबद और जन्नती दरवाजा बनवाया था। दो कच्चे मजार थे, जिन्हें 150-200 साल के बाद पक्का किया गया था।
दरगाह दीवान सैयद जैनुअल अली आबेदीन ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने भी आज संभल को लेकर जो ऑर्डर दिया उसे लेकर मैं धन्यवाद देता हूं। लोगों से यही अपील करता हूं कि हम लोग शांति बनाए रखें और अपनी ओर से ऐसा कोई काम नहीं करें, जिससे कंट्रोवर्सी पैदा हो। हमारे पास लीगल अधिकार हैं, हम कोर्ट में जाएं। हमारी बात को कोर्ट ने आज माना भी है। हम कानूनी रूप से कोर्ट में इसका जवाब देंगे।
किसने क्या कहा
इधर पीडीपी चीफ मेहबूबा मुफ्ती ने प्रेस के साथ अपनी बातचीत में कहा कि अजमेर शरीफ 800 साल पुरानी दरगाह है। और यहां हिन्दू और मुस्लिम दोनों ही धर्मों के लोग जियारत करने आते हैं। इस तरह की बातें हिन्दू-मुस्लिम के बीच दरारें पैदा करने वाली हैं।
अजमेर शरीफ दरगाह के भीतर शिव मंदिर पर दावा करने वाले मुकदमे पर राजस्थान के मंत्री मदन दिलावर का कहना है कि ''मैं इस पर कुछ नहीं कहूंगा, इस पर फैसला कोर्ट करेगा लेकिन यह सच है कि औरंगजेब और बाबर ने ज्यादातर मंदिरों को तोड़कर मस्जिदें बनवाई हैं। जांच के बाद सच्चाई सामने आ जाएगी।
मंत्री जोगाराम पटेल ने इस मामले में कहा कि अजमेर दरगाह मामले में अदालत ने संज्ञान लिया है, और सभी पक्षों को बुलाया गया है, जो मामला विचाराधीन है, उस पर अदालत के बाहर सवाल नहीं उठाया जा सकता। हर एक व्यक्ति अपना पक्ष रख सकता है इसके बाद फिर कोर्ट उचित कार्रवाई करेगा। उन्होंने कहा कि जहां तक पूर्व सीएम अशोक गहलोत द्वारा बताए गए 1947 के कानून की बात है तो हमारा संविधान 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ था। ऐसा कोई कानून नहीं है जो अदालत के यह तय करने के अधिकार में बाधा डालता हो कि किस मामले की सुनवाई की जाए और किसकी नहीं…।