Rajasthan politics: विस चुनाव में इस बार दो नई पार्टियां, कांग्रेस के लिए यह मुश्किल, जानें भाजपा का प्लान
Rajasthan politics: राजस्थान में 2023 में विधानसभा चुनाव होने हैं, लेकिन इसकी तैयारी सवा साल पहले ही शुरू हो गई है। भाजपा के बाद एआईएमआईएम (AIMIM) ने भी प्रदेश में सभाएं और रैलियां शुरू कर दी है। आप भी जल्द चुनावी मोड में आ सकती है। ऐसे में इस बार का विधानसभा चुनाव रोचक होने वाला है।
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Rajasthan politics: राजस्थान विधानसभा (Rajasthan Assembly Elections) का चुनाव इस बार और ज्यादा रोचक होने वाला है। 2023 में होने वाले चुनाव के मैदान में इस बार दो और पार्टियां नजर आएंगीं। दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी (AAP) और दूसरी असदुद्दीन ओवैसी की ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) चुनाव मैदान में उतरने के लिए पूरी तरह से तैयार है।
हांलाकि, इन पार्टियों का भविष्य क्या होगा यह तो आने वाला समय ही बताएगा, लेकिन दोनों पार्टियों ने चुनाव के लिए तैयारी शुरू कर दी है। सियासी जमीन तलाशने के लिए असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) बीते दिन राजस्थान आए थे। जहां उन्होंने प्रदेश के जयपुर और सीकर जिले में सभाएं की थीं। वह आज भी सभाएं और शोखावटी इलाकों का दौरा करेंगे।
Live: Barrister @asadowaisi addressing a public meeting in Nawalgarh, Rajasthan https://t.co/SqtQPKQ7xU
विज्ञापन विज्ञापन— AIMIM (@aimim_national) September 14, 2022
इधर, सीएम अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) लंबे समय से अपनी पार्टी के लिए केंद्र शासित प्रदेश दिल्ली के बाहर सियासी जमीन तलाश रहे हैं। पंजाब विधानसभा चुनाव जीतकर केजरीवाल ने पहला पड़ाव तो पार कर लिया है। अब उनकी नजर भाजपा का गढ़ माने जाने वाले राज्य गुजरात पर है। यहां इस साल के अंत में चुनाव होने हैं।
बताया जा रहा है कि गुजरात में चुनाव खत्म होने के बाद केजरीवाल राजस्थान (Rajasthan) में एक्टिव होंगे। आम आदमी पार्टी (Aam Aadmi Party) को दिल्ली और पंजाब बॉर्डर से सटे राज्य राजस्थान से काफी उम्मीदें हैं। पार्टी के नेताओं का कहना है कि दिल्ली और पंजाब की जनता की तरह राजस्थान की जनता भी विकास के लिए उनका साथ देगी। आप के प्रदेश स्तरीय नेता लोगों के बीच पकड़ बनाने का लगातार प्रयास कर रहे हैं। संगठन का विस्तार कर जिताऊ और टिकाऊ उम्मीदवारों की तलाश की जा रही है।
गुटबाजी से जूझ रहीं कांग्रेस की और बढ़ेगी चिंता
राजस्थान में ओवैसी की एंट्री कांग्रेस (Congress) के लिए परेशानी बन सकती है। ओवैसी का पूरा फोकस अल्पसंख्यक वोटर्स पर रहेगा। प्रदेश के 15 जिलों की 36 विधानसभा सीट ऐसी हैं जहां मुस्लिमों का प्रभाव है। अब इस सीटों से एआईएमआईएम के प्रत्याशी चुनाव मैदान में होंगे। वहीं, अब तक प्रदेश का अल्पसंख्यक वर्ग कांग्रेस का परंपरागत वोट बैंक माना जाता रहा है, लेकिन ओवैसी की एंट्री से कांग्रेस के वोट बैंक में सेंध लग सकती है। जिससे आने वाले चुनाव में कांग्रेस का समीकरण गड़बड़ा सकता है।
भाजपा में भी एकजुटता नहीं
राजस्थान भाजपा में भी सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। सबसे बड़ी खींचतान सीएम फेस को लेकर है। हालांकि, आलाकमान ने लगभग यह तय कर दिया है कि चुनाव मोदी के चहरे पर ही लड़ा जाएगा। इसके बाद भी अलग-अलग मौकों पर भाजपा नेताओं की गुटबाजी सामने आ जाती है। यह तो हुई भाजपा की बात अब चलते हैं चुनावी रणनीति पर।
भाजपा का हिंदुत्व के मुद्दे पर जोर रहता है। सबका साथ और सबका विकास, परिवारवाद और वंशवाद सहित अन्य मुद्दों पर फोकस करती है। कांग्रेस शासन काल की बात करें तो हिंदुत्व को लेकर भाजपा के पास कई मुद्दे हैं। कन्हैयालाल हत्याकांड, करौली दंगा, जोधपुर हिंसा सहित कई ऐसे मुद्दे हैं जिन्हें लेकर भाजपा अशोक गहलोत सरकार पर हमलावर रहती है। हाल ही में राजस्थान आए अमित शाह ने इन सब मुद्दों का जिक्र किया था। इससे साफ है कि विधानसभा चुनाव में भी इनकी गूंज सुनाई देगी।
नई पार्टियों के लिए कितनी आसान होगी राह
राजस्थान में केजरीवाल और ओवैसी का सियासी सफर कैसा रहेगा और उन्हें कितनी सफलता मिलेगी। इस पर अभी कुछ नहीं कहा जा सकता, यह तो आने वाला समय ही बताएगा। लेकिन, प्रदेश में पिछले विधानसभा चुनाव में पहली बार चुनाव लड़ने वाली हनुमान बेनीवाल की राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी को चार सीटों पर सफलता मिली थी।