फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Rajasthan ›   After defeat BJP can appoint new Rajasthan president

हार से बौखलाई भाजपा राजस्थान में बदल सकती प्रदेश अध्यक्ष, नेता प्रतिपक्ष पर जल्द फैसला

Thu, 13 Dec 2018 05:27 AM IST
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 13 Dec 2018 05:27 AM IST
विज्ञापन
After defeat BJP can appoint new Rajasthan president
अमित शाह और वसुंधरा राजे

राजस्थान में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के इस्तीफे के बाद जहां कांग्रेस सरकार बनाने की तैयारियों में जुटी हुई है। वहीं, जबरदस्त हार के बाद भाजपा अब राज्य यूनिट में बदलाव करने की कवायद में जुट गई। पार्टी कुछ ऐसे चेहरों को तलाश कर रही है, जो राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बन सके। वहीं पार्टी भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन लाल सैनी की जगह किसी और को इस पद पर नियुक्त करने की रणनीति पर भी काम कर रही है।

विज्ञापन


पार्टी सूत्रों के मुताबिक भाजपा राज्य में संगठनात्मक बदलाव करने का मन बना चुकी है। वहीं सदन में नेता प्रतिपक्ष कौन होगा, इस पर भी माथापच्ची जारी है। सूत्रों ने बताया कि वसुंधरा ने विपक्षी दल का नेता बनने से इंकार कर दिया है। जिसके बाद पार्टी कुछ नामों पर गौर कर रही है।
विज्ञापन


इस पद के लिए सबसे आगे नाम पूर्व पंचायती राज मंत्री राजेंद्र राठौड़ का नाम सबसे आगे चल रहा है। राठौड़ के अलावा पहली बार विधायक बने सतीश पूनिया का नाम भी रेस में है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि दोनों ही नेताओं को संगठन में कामकाज का लंबा अनुभव है।
विज्ञापन
विज्ञापन


सूत्रों ने बताया कि सतीश पूनिया को प्रदेश का अध्यक्ष का पद भी दिया जा सकता है। इसके अलावा प्रदेशाध्यक्ष पद में केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत का नाम भी लिया जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि ऐसे में जब 2019 लोकसभा चुनाव में 5 माह ही शेष हैं, ऐसे में किसी वरिष्ठ और अनुभवी व्यक्ति को ही इस पद पर बैठाया जा सकता है।

वहीं सूत्रों ने बताया कि वसुंधरा को केंद्र में भेजा जा सकता है। इससे पहले पूनिया और शेखावत का प्रदेश अद्यक्ष पद की दौड़ में भी शामिल रहा था, लेकिन वसुंधरा की जिद के चलते इन नामों पर सहमति नहीं बन पाई।

सूत्र यह भी बताते हैं कि वसुंधरा और शाह में छत्तीस का आंकड़ा रहा है, ऐसे में वे शायद ही अमित शाह की टीम का हिस्सा बनना पसंद करेंगी। वहीं हार के बाद केंद्र में भेजे जाने के बाद लोकसभा चुनावों के दौरान टिकट बंटवारे में उनकी कितनी भूमिका होगी, इस पर भी संदेह है। क्योंकि विधानसभा चुनावों में टिकट बंटवारे में राजे ने अहम भूमिका निभाते हुए शाह को कई वर्तमान विधायकों को टिकट देना पड़ा था और मात्र उन 23 विधायकों के टिकट काटे गए, जो राजे के विश्वासपात्र नहीं थे।

सूत्रों का कहना है कि 15वीं विधानसभा शुरू होने से पहले ही विपक्षी दल के नेता का नाम घोषित हो जाए। वहीं प्रदेशाध्यक्ष बदलने के नाम पर फैसला लेने में अभी वक्त लग सकता है, क्योंकि पार्टी राज्य के जातिगत समीकरण, अनुभव के साथ केंद्रीय लीडरशीप के साथ सामंजस्य को भी अहमियत देगी।

गौरतलब है कि विधानसभा चुनावों से 10 महीने पहले ही प्रदेशाध्यक्ष रहे अशोक परनामी ने 16 अप्रैल को इस्तीफा दे दिया था और यह पद कई माह तक खाली रहा था। जिसके बाद 29 जून को मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने अपनी जिद पूरी करते हुए माली समुदाय से आने वाले मदल लाल सैनी प्रदेश अध्यक्ष पद पर नियुक्त हुए थे।    
  
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed