जगदीप धनखड़ बोले- राज्यपाल के पद पर बैठा व्यक्ति कमजोर नहीं हो सकता, उसे अपना काम करना ही होगा
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का कोई सुझाव आता है तो मैं बिना सोचे उनके बताए नाम पर सहमति जता देता हूं। इसके बाद भी मुझे 25 कुलपति की नियुक्ति उनके ज्ञान, स्वीकृति और प्राधिकरण के बिना ही करनी पड़ी।
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पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ शुक्रवार को जयपुर पहुंचे। राजस्थान विधानसभा में संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मैं प्रो एक्टिव नहीं है, बल्कि कापी बुक गर्वनर हूं, जो कानून के शासन में भरोसा करते हैं। किसी के इशारे पर मैं कानून का उल्लंघन नहीं करूंगा। उन्होंने कहा कि राज्यपाल को कुलपति की नियुक्ति करने का अधिकार दिया गया है। ऐसे में यहां टकराव होना स्वभाविक है, क्योंकि बहुमत राज्य के मुख्यमंत्री के पास है।
मेरे सामने जब भी इस तरह का मुद्दा आता है तो मैं अपने विवेक से काम करता हूं। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का कोई सुझाव आता है तो मैं बिना सोचे उनके बताए नाम पर सहमति जता देता हूं। इसके बाद भी मुझे 25 कुलपति की नियुक्ति उनके ज्ञान, स्वीकृति और प्राधिकरण के बिना ही करनी पड़ी। उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ अपने संबंधों पर कहा कि उन दोनों के बीच एक भाई-बहन की तरह गहरा रिश्ता है।
राज्यपाल के पद पर बैठा व्यक्ति स्पाइनलेस (कमजोर) नहीं हो सकता, उसे अपना कार्य करना है। राज्यपाल जगदीप धनखड़ धनखड़ विधानसभा भवन में कॉमनवेल्थ पार्लियामेंट्री एसोसिएशन के राजस्थान चैप्टर द्वारा आयोजित लोकतंत्र के विकास में राज्यपालों और विधायकों की भूमिका विषय पर आयोजित सेमिनार को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे।
प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री सर्वोपरि
जगदीप धनकड़ ने विधायक संविधान के दायरे में काम करने और राज्यपाल संविधान के संरक्षण की शपथ लेते हैं। राज्यपाल पर संविधान की मर्यादा को बचाए रखने की भी जिम्मेदारी होती है। भारतीय राजनीति में प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री सर्वोपरि होते हैं। उन्होंने कहा कि जो संसदीय परंपराओं के सर्वश्रेष्ठ मापदंड हो सकते हैं वे राजस्थान विधानसभा में हैं।
राज्यपाल की भूमिका एक्टिव और पेसिव दो तरह की होती है
विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी ने कहा कि राष्ट्रमंडल संसदीय संघ ने संसदीय परंपराओं को समझाने की एक श्रृंखला बनाई है। इस क्रम में संघ ने गणमान्यजन को आंमत्रित कर कई सेमिनारों का आयोजन किया है। उन्होंने कहा कि डॉ. आंबेडकर ने कहा था कि कानून कुछ भी बना लो, व्यक्ति जो उस जगह पर बैठा, उसकी भूमिका भी होती है। राज्यपाल की दो तरह की भूमिका होती है- एक्टिव और पेसिव। उन्होंने कहा कि धनकड़ एक्टिव भूमिका को संसदीय लोकतंत्र के सामने रख रहे हैं।
विस अध्यक्ष ने दिए नए आयाम
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि लोकतंत्र में सांसद और विधायकों पर एक जनप्रतिनिधि के रूप में अपने दायित्वों का निर्वहन करने के साथ ही विधि निर्माण की भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। राजस्थान में पक्ष और प्रतिपक्ष के बीच सौहार्द्रपूर्ण संबंध रहे हैं। इससे विधानसभा में विधायी कार्यों के संपादन और जनहित से जुडे़ विषयों पर निर्णय लेने में आसानी होती है। उन्होंने कहा कि जब से डॉ. सीपी जोशी विधानसभा अध्यक्ष बने हैं तब से उन्होंने सदन की गतिविधियों को नए आयाम दिए हैं।
लोकतंत्र को मजबूत करना हमारा कर्तव्य
प्रतिपक्ष के नेता गुलाब चंद कटारिया ने कहा कि सर्वश्रेष्ठ विधायकों का चयन उनकी योग्यता को देखते हुए किया गया है। उन्होंने कहा कि जनता के निर्णय के आधार पर इस देश के लोकतंत्र को मजबूत करना सदन के सभी सदस्यों का कर्तव्य है। संसदीय कार्य मंत्री शांती कुमार धारीवाल ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि संघ द्वारा आयोजित इस प्रकार के आयोजनों से सदस्यों को संसदीय परंपराओं का ज्ञान होता है।
विधानसभा में आयोजित सेमिनार में सर्वश्रेष्ठ विधायकों का सम्मान भी किया गया। वर्ष 2019 के लिए विधायक ज्ञानचन्द पारख, 2020 के लिए विधायक संयम लोढा और 2021 के लिए विधायक बाबूलाल व विधायक मंजू देवी को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड ने विधायकों को स्मृति भेंट कर सम्मानित किया। इस दौरान डॉ. जोशी ने मुख्य अतिथि धनकड़ को स्मृति चिन्ह भेंट किया। इससे पूर्व अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।