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दिल्ली मोर्चा हुआ फतेह: पटियाला के तीन किसान नेताओं ने निभाई बड़ी भूमिका, जीत पर कही ये बात

Sat, 11 Dec 2021 05:05 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटियाला (पंजाब)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटियाला (पंजाब) Published by: निवेदिता वर्मा Updated Sat, 11 Dec 2021 05:05 PM IST
सार

पटियाला के पहली कतार के तीन किसान नेताओं ने अपने घर-परिवारों को भूलकर इस आंदोलन की मशाल देश ही नहीं, पूरी दुनिया में जलाई जिससे यह जन आंदोलन बनाया और आखिरकार मोदी सरकार को यह कृषि कानून वापस लेने को मजबूर होना पड़ा।

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Three Farmer Leaders of Patiala plays Important Role in Kisan Andolan
डॉ. दर्शन पाल, जगमोहन सिंह और सतनाम सिंह। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

केंद्र के कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली के बॉर्डरों पर साल भर चले किसान आंदोलन को फतेह कराने में पंजाब का पटियाला जिला सबसे आगे रहा। जिले के पहली कतार के तीन किसान नेताओं ने अपने घर-परिवारों को भूलकर इस आंदोलन की मशाल देश ही नहीं, पूरी दुनिया में जलाई जिससे यह जन आंदोलन बनाया और आखिरकार मोदी सरकार को यह कृषि कानून वापस लेने को मजबूर होना पड़ा। इनमें क्रांतिकारी किसान यूनियन के प्रदेश प्रधान डॉ. दर्शनपाल सिंह, भारतीय किसान यूनियन एकता (डकौंदा) के प्रदेश महासचिव जगमोहन सिंह और इंडियन फार्मर एसोसिएशन के राष्ट्रीय प्रधान सतनाम सिंह बहिरू शामिल हैं।   

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क्रांतिकारी किसान यूनियन के प्रदेश प्रधान डॉ. दर्शन पाल एमबीबीएस डॉक्टर हैं, जिन्होंने सरकारी राजिंदरा अस्पताल में भी अपनी सेवाएं दी हैं। बाद में वह किसान नेता बन गए। कृषि कानूनों के खिलाफ संघर्ष में शुरुआत से ही डॉ. दर्शनपाल सिंह की भूमिका बेहद अहम रही। उन्होंने साल भर अपने घर का मुंह नहीं देखा और लगातार दिल्ली बॉर्डर पर डेरा जमाए रहे। इस दौरान जब भी संयुक्त किसान मोर्चा की तरफ से कोई भी प्रेस कॉन्फ्रेंस या मीटिंग रखी जाती थी, तो उसमें डॉ. दर्शनपाल सिंह की अहम भूमिका रहती थी।
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इनके साथ ही पटियाला से भारतीय किसान यूनियन एकता (डकौंदा) के प्रदेश महासचिव जगमोहन सिंह का भी किसान आंदोलन में सराहनीय योगदान रहा। जगमोहन सिंह भी अपने घर को भूलकर पिछले करीब एक साल से दिल्ली बॉर्डर पर ही जमे थे। इस दौरान जहां उन्होंने किसान आंदोलन की रणनीति बनाने में अपनी भूमिका निभाई, वहीं वह लगातार मीडिया के साथ भी जुड़े रहे। मीडिया के साथ वे पंजाब में होने वाले धरने-प्रदर्शनों और बंद के कार्यक्रमों की जानकारी सांझा करते रहे। अमर उजाला से बातचीत में किसान नेता जगमोहन सिंह ने कहा कि वह घर से यही सोच कर साल भर पहले दिल्ली मोर्चे के लिए रवाना हुए थे कि या तो खेती कानून रद्द कराके लौंटेगे या फिर घर में वापस लाश ही आएगी। उन्होंने कहा कि किसानों को उनकी फसलों के वाजिब दाम मिले और सारे कर्जे माफ हों।
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काफी बुजुर्ग होने के बावजूद इंडियन फार्मर एसोसिएशन के राष्ट्रीय प्रधान सतनाम सिंह बहिरू ने खेती कानूनों के विरोध में दिल्ली मोर्चे में बढ़-चढ़ कर भाग लिया। मोर्चे की जीत पर उन्होंने खुशी जताई है।

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