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पंजाबी संगीत में आ रही अश्लीलता पर चिंता जताई

Sat, 10 Dec 2016 03:29 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, पटियाला
ब्यूरो, अमर उजाला, पटियाला Updated Sat, 10 Dec 2016 03:29 PM IST
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Punjabi University, Punjabi prose Conference, Department of Punjabi literature studies,  Patiala
पटियाला की पंजाबी यूनिवर्सिटी में कांफ्रेंस के समापन पर वीसी डा. जसपाल सिंह और अन्य। - फोटो : अमर उजाला
पंजाबी यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर डा. जसपाल सिंह ने कहा कि गद्य की भाषा सरल होनी चाहिए जिससे यह पाठकों को अंदर तक छू सके। इसके साथ पाठकों की गिनती में इजाफा हो। इसके साथ वीसी ने पंजाबी संगीत में आ रही अश्लीलता पर चिंता जताई। वह यूनिवर्सिटी के पंजाबी साहित्य अध्यन की ओर से पंजाबी गद्य संबंधी आयोजित कांफ्रेंस के समापन पर बोल रहे थे। 
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वीसी ने कहा कि कांफ्रेंस विचारों के आदान-प्रदान का बड़ा मंच है जो अकादमिक सफलता का आधार बनता है। यूनिवर्सिटी की ओर से विभिन्न विषयों पर आयोजित की जा रही कांफ्रेंस इस दिशा में विशेष योगदान कर रही है। इस मौके पर डा. गुरनायब सिंह ने कांफ्रेंस की रिपोर्ट पेश की। उन्होंने बताया कि कांफ्रेंस में दो सौ से ज्यादा शोध पत्र पढ़े गए। इस मौके पर गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी अमृतसर के पूर्व प्रो वाइस चांसलर डा. सतिंदर सिंह ने कहा कि पंजाबी गद्य में विज्ञान, तर्क और ज्ञान की गहराई है। 
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उन्होंने कहा कि इस अनमोल खजाने को परिपक्व करने की आवश्यकता है। मुख्य मेहमान श्री गुरु ग्रंथ साहिब वर्ल्ड यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर डा. गुरमोहन सिंह वालिया ने कहा कि गद्य समाज को हर प्रकार के ज्ञान विज्ञान के साथ जोड़ती है। बदल रहे जीवन ढंग के साथ साहित्य में नई विधाएं पेश होने की संभावना है। इन पर ध्यान देने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि हमको पंजाबी भाषा के साथ जुड़े रहने और अधिक से अधिक साहित्य के अच्छे आलोचक पैदा करने की जरूरत है। 
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इस मौके पर विशेष मेहमान साहित्यकार डा. दलीप कौर टिवाना ने कहा कि गद्य रचना गहरे अनुभव की मांग करती है। इसके साथ ही भाषाई इस्तेमाल की जुगत इसमें अहम रोल अदा करती है। उन्होंने कहा कि अच्छे लेखक सिर्फ भाषा इस्तेमाल ही नहीं भाषा सृजन करते हैं। साहित्य की आलोचना आवश्यक जरूरी है, पर यह सृजनात्मक रूप में की जानी चाहिए। इस कार्यक्रम में मेहमानों को सम्मानित किया गया। इसके साथ डा. गुरमीत सिंह की एक पुस्तक भी रिलीज की गई। 
 
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