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संगीत सम्मेलन में चक्रवर्ती और गगनदीप ने समां बांधा
ब्यूरो, अमर उजाला, पटियाला
Updated Fri, 04 Nov 2016 03:15 PM IST
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पटियाला की पंजाबी यूनिवर्सिटी में आयोजित संगीत सम्मेलन में शास्त्रीय गायक नभोदीप चक्रवर्ती अपनी कला का प्रदर्शन करते हुए।
- फोटो : अमर उजाला
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पंजाबी यूनिवर्सिटी के कला भवन में संगीत विभाग की ओर से चौथे प्रोफेसर तारा सिंह पटियाला संगीत सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस मौके पर पटियाला घराने के शास्त्रीय गायक नभोदीप चक्रवर्ती (कोलकाता) के शास्त्रीय गायन और इमदादखानी घराने के डा. गगनदीप होठी (नैनीताल) के सितार वादन ने समां बांध दिया। सम्मेलन में मुख्य मेहमान सूफी गायक हंस राज हंस रहे, जबकि विशेष मेहमान के तौर पर गुरमत संगीताचार्य प्रोफेसर तारा सिंह की पत्नी सुरजीत कौर पहुंचीं।
इस मौके पर पटियाला घराने के शास्त्रीय गायक एवं उस्ताद बड़े गुलाम अली खान के पौते मजहर अली और जवाद अली खान के शार्गिद नभोदीप चक्रवर्ती ने पटियाला घराने की खास रचनाएं पेश कीं। जिसमें उन्होंने राग बहार, बिहाग में अब से रट लागी मोरी द्रुत ख्याल, ठुमरी और पहाड़ी राग में दादरा और बड़े गुलाम अली खान साहिब की गाई ठुमरी याद पिया की आए की बड़े सुरीले अंदाज में पेशकारी की।
इस मौके पर उनके साथ तबले पर संगत पंजाब घराने के नौजवान तबला वादक जैदेव ने और हारमोनियम पर अली अकबर की ओर से की गई। इसी तरह से इमदादखानी घराने के सितार वादक डा. गगनदीप होठी ने राग हमीर में अलाप, जोड़ अलाप, विलंबित गत, मध्य लय और द्रुत गत और झाला की सुरीली पेशकारी की।
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वीसी डा. जसपाल सिंह ने इस मौके पर कहा कि इन कलाकारों की पेशकारियां देखकर जो स्टूडेंट्स की ओर से रिस्पांस मिल रहा है, उससे लग रहा है कि शास्त्रीय संगीत के भविष्य को कोई खतरा नहीं है।
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इस मौके पर पटियाला घराने के शास्त्रीय गायक एवं उस्ताद बड़े गुलाम अली खान के पौते मजहर अली और जवाद अली खान के शार्गिद नभोदीप चक्रवर्ती ने पटियाला घराने की खास रचनाएं पेश कीं। जिसमें उन्होंने राग बहार, बिहाग में अब से रट लागी मोरी द्रुत ख्याल, ठुमरी और पहाड़ी राग में दादरा और बड़े गुलाम अली खान साहिब की गाई ठुमरी याद पिया की आए की बड़े सुरीले अंदाज में पेशकारी की।
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इस मौके पर उनके साथ तबले पर संगत पंजाब घराने के नौजवान तबला वादक जैदेव ने और हारमोनियम पर अली अकबर की ओर से की गई। इसी तरह से इमदादखानी घराने के सितार वादक डा. गगनदीप होठी ने राग हमीर में अलाप, जोड़ अलाप, विलंबित गत, मध्य लय और द्रुत गत और झाला की सुरीली पेशकारी की।
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वीसी डा. जसपाल सिंह ने इस मौके पर कहा कि इन कलाकारों की पेशकारियां देखकर जो स्टूडेंट्स की ओर से रिस्पांस मिल रहा है, उससे लग रहा है कि शास्त्रीय संगीत के भविष्य को कोई खतरा नहीं है।