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खतरे में पंजाब का सरसों का साग : डा. गांधी
ब्यूरो/अमर उजाला, पटियाला
Updated Fri, 04 Dec 2015 03:34 PM IST
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पटियाला से सांसद डा. धर्मवीर गांधी ने कहा है कि पंजाब का सरसों का साग खतरे में है। केंद्र सरकार ने संसद में उनकी ओर से पूछे गए सवाल के जवाब में माना है कि जीन परिवर्तित सरसों व्यापारिक खेती के स्तर पर पहुंच गई है, लेकिन इसकी सुरक्षा के बारे में जानकारी होने से केंद्र ने इनकार कर दिया।
डा. गांधी ने यहां जारी बयान में कहा कि केंद्रीय वातावरण, जंगलात एवं जलवायु तबदीली के बारे में मंत्रालय ने संसद में रस्मी तौर पर माना कि जीन परिवर्तित सरसों (बीटी सरसों) के लिए एक आवेदन जनेटिक इंजीनियरिंग मूल्यांकन कमेटी पास पहुंचा है। कमेटी किसी भी जीन परिवर्तित फसल को वातावरण पक्ष से जारी करने के लिए मंत्रालय की एक नोडल एजेंसी है।
सरकार ने संसद सामने माना कि यह आवेदन दिल्ली यूनिवर्सिटी के फसली पौधों के जीन परिवर्तन केंद्र की ओर से धारा हाईब्रिड सरसों-11 (डीएमएच 11) के नाम अधीन कमेटी पास पहुंचा है।
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दरअसल डा. गांधी ने संसद में सवाल पूछा था कि क्या यह सच्चाई है कि जीन परिवर्तित सरसों व्यापारिक खेती के लिए जारी करने की सरकार की कोई योजना है। डा. गांधी ने मांग की कि बीटी सरसों के बारे में किए गए जैविक सुरक्षा अध्यननों के नतीजे जारी किए जाएं।
डा. गांधी ने बताया कि वातावरण में किसी भी जीन परिवर्तित फसल को जारी करना किसान विरोधी, लोक विरोधी और राष्ट्र विरोधी फैसला है। वह संसद के बाहर व अंदर इस मुद्दे को तब तक उठाते रहेंगे, जब तक लोगों की बात सरकार नहीं सुनती है।
जीन परिवर्तित सरसों से मानव शरीर में कीड़ेमार दवाएं और भारी धातु इकट्ठा होंगे, जिससे कई बीमारियां लग सकती हैं।
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डा. गांधी ने यहां जारी बयान में कहा कि केंद्रीय वातावरण, जंगलात एवं जलवायु तबदीली के बारे में मंत्रालय ने संसद में रस्मी तौर पर माना कि जीन परिवर्तित सरसों (बीटी सरसों) के लिए एक आवेदन जनेटिक इंजीनियरिंग मूल्यांकन कमेटी पास पहुंचा है। कमेटी किसी भी जीन परिवर्तित फसल को वातावरण पक्ष से जारी करने के लिए मंत्रालय की एक नोडल एजेंसी है।
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सरकार ने संसद सामने माना कि यह आवेदन दिल्ली यूनिवर्सिटी के फसली पौधों के जीन परिवर्तन केंद्र की ओर से धारा हाईब्रिड सरसों-11 (डीएमएच 11) के नाम अधीन कमेटी पास पहुंचा है।
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दरअसल डा. गांधी ने संसद में सवाल पूछा था कि क्या यह सच्चाई है कि जीन परिवर्तित सरसों व्यापारिक खेती के लिए जारी करने की सरकार की कोई योजना है। डा. गांधी ने मांग की कि बीटी सरसों के बारे में किए गए जैविक सुरक्षा अध्यननों के नतीजे जारी किए जाएं।
डा. गांधी ने बताया कि वातावरण में किसी भी जीन परिवर्तित फसल को जारी करना किसान विरोधी, लोक विरोधी और राष्ट्र विरोधी फैसला है। वह संसद के बाहर व अंदर इस मुद्दे को तब तक उठाते रहेंगे, जब तक लोगों की बात सरकार नहीं सुनती है।
जीन परिवर्तित सरसों से मानव शरीर में कीड़ेमार दवाएं और भारी धातु इकट्ठा होंगे, जिससे कई बीमारियां लग सकती हैं।