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पटियाला संगीत घराने के उस्ताद राजा मृगेंदर सिंह नहीं रहे
पटियाला।
Updated Tue, 01 Apr 2014 10:36 PM IST
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पटियाला संगीत घराने के उस्ताद राजा मृगेंदर सिंह के निधन पर पीयू के धर्म अध्ययन विभाग ने शोक जताया है। विभाग के प्रमुख डॉ. राजिंदर कौर रोही ने बताया कि उनके निधन से बड़ी हानि हुई है। विभाग के प्रोफेसर डॉ. हरपाल सिंह पन्नू ने बताया कि उनका निधन 25 मार्च को न्यूयॉर्क में हुआ था।
पीयू को इसकी सूचना मंगलवार को मिली। उन्होंने बताया कि पंजाबी यूनिवर्सिटी की स्थापना में राजा मृगेंदर सिंह का बड़ा योगदान रहा है। वह यूनिवर्सिटी के संगीत और फिलोसिफी विभाग के फाउंडर प्रोफेसर भी थे। उन्होंने ही डॉ. राधाकृष्णन से मिलकर इस यूनिवर्सिटी में धर्म अध्यनन विभाग की स्थापना की। दो दशकों तक वह इस यूनिवर्सिटी के विजिटिंग फैलो रहे। वह उच्चकोटि के सितार और वीणा वादक भी थे। भारतीय संगीत शास्त्र पर उनकी दो पुस्तकें पंजाबी यूनिवर्सिटी पहले ही प्रकाशित कर चुका है।
पीयू ने हाल ही में राजा मृगेंदर सिंह का ग्रंथ जप नीसान भी छापा है। इसमें 1200 पन्ने हैं। 40 साल पहले उन्होंने यह ग्रंथ प्रोफेसर हरबंस सिंह को प्रकाशन के लिए दिया था लेकिन इसके छपने में असाधारण देरी होती रही। डॉ. हरपाल सिंह पन्नू के संपादन में यह ग्रंथ तीन महीने पहले छपा और राजा मृगेंदर सिंह अपनी बहुमूल्य रचना को प्रकाशित हुआ देख सके। यह ग्रंथ खोजी जिज्ञासुओं के लिए बहुत मूल्यवान साबित होगा।
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पीयू को इसकी सूचना मंगलवार को मिली। उन्होंने बताया कि पंजाबी यूनिवर्सिटी की स्थापना में राजा मृगेंदर सिंह का बड़ा योगदान रहा है। वह यूनिवर्सिटी के संगीत और फिलोसिफी विभाग के फाउंडर प्रोफेसर भी थे। उन्होंने ही डॉ. राधाकृष्णन से मिलकर इस यूनिवर्सिटी में धर्म अध्यनन विभाग की स्थापना की। दो दशकों तक वह इस यूनिवर्सिटी के विजिटिंग फैलो रहे। वह उच्चकोटि के सितार और वीणा वादक भी थे। भारतीय संगीत शास्त्र पर उनकी दो पुस्तकें पंजाबी यूनिवर्सिटी पहले ही प्रकाशित कर चुका है।
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पीयू ने हाल ही में राजा मृगेंदर सिंह का ग्रंथ जप नीसान भी छापा है। इसमें 1200 पन्ने हैं। 40 साल पहले उन्होंने यह ग्रंथ प्रोफेसर हरबंस सिंह को प्रकाशन के लिए दिया था लेकिन इसके छपने में असाधारण देरी होती रही। डॉ. हरपाल सिंह पन्नू के संपादन में यह ग्रंथ तीन महीने पहले छपा और राजा मृगेंदर सिंह अपनी बहुमूल्य रचना को प्रकाशित हुआ देख सके। यह ग्रंथ खोजी जिज्ञासुओं के लिए बहुत मूल्यवान साबित होगा।
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