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मनमुटाव समाप्त कर क्षमा देने और क्षमा लेना ही है पर्व पर्युषणः साध्वी महीमाश्री
ब्यूरो, अमर उजाला, संगरूर
Updated Sun, 04 Sep 2016 03:02 PM IST
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मालेरकोटला में महापर्व पर्युषण के दौरान तीर्थंकर देव की आरती उतारते श्रद्धालु और जैन साध्वी महीमाश्री प्रवचन करते हुए।
- फोटो : अमर उजाला
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जैन धर्म में सबसे महत्वपूर्ण महापर्व पर्युषण (संवत्सरी) को लेकर तैयारियां चरम पर हैं। जैन मंदिरों, साधना केंद्रों और स्थानकों को सजाया जा रहा है। इस बार यह पर्व पांच और छह सितंबर को मनाया जाएगा।
जैन मंदिरों में पिछले दिनों से तीर्थंकर देव की अष्ट प्रकारी पूजा का आयोजन किया जा रहा है। पंजाब सहित बाहरी राज्यों से भी श्रद्धालु यहां के सदियों पुराने जैन मंदिरों में पहुंच रहे हैं। तीर्थंकर जैन साधना केंद्र की प्रमुख जैनाचार्य साध्वी महीमाश्री ने बताया कि विरोधियों से मन मुटाव समाप्त कर क्षमा देने और क्षमा लेना ही पर्व पर्युषण है। सोमवार 5 सितंबर को सुबह संवत्सरी महापर्व का आयोजन किया जाएगा, जिसमें लुधियाना के सतीश अग्रवाल ध्वजारोहण करेंगे।
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जैन मंदिरों में पिछले दिनों से तीर्थंकर देव की अष्ट प्रकारी पूजा का आयोजन किया जा रहा है। पंजाब सहित बाहरी राज्यों से भी श्रद्धालु यहां के सदियों पुराने जैन मंदिरों में पहुंच रहे हैं। तीर्थंकर जैन साधना केंद्र की प्रमुख जैनाचार्य साध्वी महीमाश्री ने बताया कि विरोधियों से मन मुटाव समाप्त कर क्षमा देने और क्षमा लेना ही पर्व पर्युषण है। सोमवार 5 सितंबर को सुबह संवत्सरी महापर्व का आयोजन किया जाएगा, जिसमें लुधियाना के सतीश अग्रवाल ध्वजारोहण करेंगे।
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