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Patiala News: भारत बंद का पटियाला में नहीं दिखा असर, बसपा का डीसी दफ्तर के आगे रोष मार्च
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डीसी को ज्ञापन देकर सुप्रीम कोर्ट से कोटे के अंदर कोटा देने का विरोध किया
अमर उजाला ब्यूरो
पटियाला। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ दिए भारत बंद की काल का बुधवार को पटियाला में असर नहीं दिखा। आम दिनों की तरह बाजार खुले रहे और स्कूल, कॉलेज व सरकारी व प्राइवेट दफ्तर भी रोजाना की भांति लगे। हालांकि बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने पटियाला में डीसी दफ्तर के आगे रोष मार्च निकाला। इसके बाद डीसी को ज्ञापन देकर आरक्षण के अंदर आरक्षण को मान्यता देने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का विरोध करते इसे वापस लेने की मांग की।
बसपा लोकसभा हलका पटियाला इंचार्ज जगजीत सिंह छडबड़ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में सात जजों की बैंच की ओर से अनुसूचित जाति सूची की उप वर्गीकरण का आया फैसला संविधान विरोधी है। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला आर्टिकल 341 और आर्टिकल 342 का उल्लंघन है। इस फैसले से अनुसूचित जाति सूची को तोड़कर उप वर्गीकरण के साथ देश में आपसी भाईचारक सांझ को तोड़ने वाला फैसला है। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति वर्गों पर क्रीमीलेयर लगाना जहां संविधान विरोधी फैसला है, वहीं अनुसूचित जाति वर्गों को मिल रहे संवैधानिक हकों से वंचित करने की साजिश है। छड़बड़ ने कहा कि अनुसूचित जाति के उप-वर्गीकरण को आंकड़ों के आधार पर राज्यों को अनुसूचित जाति सूची के उप-वर्गीकरण के लिए अधिकारित करना संविधान के आर्टिकल 341 व आर्टिकल 342 का उल्लंघन है।
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अमर उजाला ब्यूरो
पटियाला। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ दिए भारत बंद की काल का बुधवार को पटियाला में असर नहीं दिखा। आम दिनों की तरह बाजार खुले रहे और स्कूल, कॉलेज व सरकारी व प्राइवेट दफ्तर भी रोजाना की भांति लगे। हालांकि बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने पटियाला में डीसी दफ्तर के आगे रोष मार्च निकाला। इसके बाद डीसी को ज्ञापन देकर आरक्षण के अंदर आरक्षण को मान्यता देने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का विरोध करते इसे वापस लेने की मांग की।
बसपा लोकसभा हलका पटियाला इंचार्ज जगजीत सिंह छडबड़ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में सात जजों की बैंच की ओर से अनुसूचित जाति सूची की उप वर्गीकरण का आया फैसला संविधान विरोधी है। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला आर्टिकल 341 और आर्टिकल 342 का उल्लंघन है। इस फैसले से अनुसूचित जाति सूची को तोड़कर उप वर्गीकरण के साथ देश में आपसी भाईचारक सांझ को तोड़ने वाला फैसला है। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति वर्गों पर क्रीमीलेयर लगाना जहां संविधान विरोधी फैसला है, वहीं अनुसूचित जाति वर्गों को मिल रहे संवैधानिक हकों से वंचित करने की साजिश है। छड़बड़ ने कहा कि अनुसूचित जाति के उप-वर्गीकरण को आंकड़ों के आधार पर राज्यों को अनुसूचित जाति सूची के उप-वर्गीकरण के लिए अधिकारित करना संविधान के आर्टिकल 341 व आर्टिकल 342 का उल्लंघन है।
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