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चरित्र पर शक ने ली मासूमों की बलि
Pathankot
Updated Wed, 31 Jul 2013 05:35 AM IST
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पठानकोट। जीवन में औलाद के लिए मां-बाप क्या कुछ नहीं करते हैं, लेकिन पठानकोट के गांव छोटेपुर में सुरेश और उसकी पत्नी शीतल की लड़ाई ने दो मासूमों की बलि ले ली। पिता सुरेश कुमार ने जहर देकर अपने दोनों मासूमों को हमेशा के लिए मौत के आगोश में सुला दिया और बाद में उनकी मौत पर कहानी गढ़ता रहा। दिन भर पुलिस को छकाने के बाद उसका झूठ पकड़ा गया और खुलासा हुआ कि उसी ने घरेलू कलह के चलते दोनों मासूमों को जहर देकर मारा है।
शीतल और सुरेश की शादी को तीन साल हुए है, लेकिन तीन साल में दोनों एक सुखद दंपति की तरह नहीं रहे। बेटी के जन्म के बाद उनके बीच झगड़ा बढ़ता गया। सुरेश एक डेयरी फार्म पर काम करता था। बताया जाता है कि सुरेश को शीतल के आचरण पर हमेशा शक था और दोनों बच्चे उसे स्वीकार नहीं थे। सोमवार को गुरदासपुर में पत्नी के साथ झगड़ा कर वापस लौटे सुरेश ने घर आते ही बच्चों को कमरे में बंद किया और छिपकली को मारकर अपने दो मासूमों को उसका जहर दूध में मिलाकर पिला दिया। बच्चों की दादी पुष्पा रानी ने बताया कि सोमवार रात को उनका बेटा और दोनों बच्चे अपने कमरे में सोए हुए थे तथा रात को सब ठीक था। बताया जाता है कि साढ़े 10 बजे के बाद दो माह का मासूम सुमित तो जहर शरीर की नसों में धसने से मौत की नींद सो गया, जबकि डेढ़ साल की मासूम बच्ची बिस्तर पर ही रेंगती रही। लेकिन, जहर देने से पहले पिता को उस मासूम पर कोई तरस नहीं आया। सुबह उसने बच्चों की मौत पर कहानी बना दी कि पत्नी ने गुरदासपुर से दूध में जहर मिलाकर उसे बच्चों को पिलाने को दिया था। दोपहर को शीतल पुलिस के पास पहुंची तो सारी कहानी का पटाक्षेप हो गया। शीतल ने सुरेश को कोई दूध की बोतल दी ही नहीं थी। इस पर अपनी कृत्य पर सुरेश खुद ही बोल पड़ा। उसने बताया कि बच्चों को दूध में छिपकली को मारकर उन्हें जहर दे दिया था।
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शीतल और सुरेश की शादी को तीन साल हुए है, लेकिन तीन साल में दोनों एक सुखद दंपति की तरह नहीं रहे। बेटी के जन्म के बाद उनके बीच झगड़ा बढ़ता गया। सुरेश एक डेयरी फार्म पर काम करता था। बताया जाता है कि सुरेश को शीतल के आचरण पर हमेशा शक था और दोनों बच्चे उसे स्वीकार नहीं थे। सोमवार को गुरदासपुर में पत्नी के साथ झगड़ा कर वापस लौटे सुरेश ने घर आते ही बच्चों को कमरे में बंद किया और छिपकली को मारकर अपने दो मासूमों को उसका जहर दूध में मिलाकर पिला दिया। बच्चों की दादी पुष्पा रानी ने बताया कि सोमवार रात को उनका बेटा और दोनों बच्चे अपने कमरे में सोए हुए थे तथा रात को सब ठीक था। बताया जाता है कि साढ़े 10 बजे के बाद दो माह का मासूम सुमित तो जहर शरीर की नसों में धसने से मौत की नींद सो गया, जबकि डेढ़ साल की मासूम बच्ची बिस्तर पर ही रेंगती रही। लेकिन, जहर देने से पहले पिता को उस मासूम पर कोई तरस नहीं आया। सुबह उसने बच्चों की मौत पर कहानी बना दी कि पत्नी ने गुरदासपुर से दूध में जहर मिलाकर उसे बच्चों को पिलाने को दिया था। दोपहर को शीतल पुलिस के पास पहुंची तो सारी कहानी का पटाक्षेप हो गया। शीतल ने सुरेश को कोई दूध की बोतल दी ही नहीं थी। इस पर अपनी कृत्य पर सुरेश खुद ही बोल पड़ा। उसने बताया कि बच्चों को दूध में छिपकली को मारकर उन्हें जहर दे दिया था।
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