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जीरकपुर : रात के कर्फ्यू के विरोध में बोले कामगार- कैप्टन सरकार सुनो पुकार... मत छीनो हमारा रोजगार

Thu, 08 Apr 2021 01:37 AM IST
Mohali Bureau मोहाली ब्‍यूरो
Updated Thu, 08 Apr 2021 01:37 AM IST
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Workers protest against night cerfew in Zirakpur
पंजाब सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते कामगार। - फोटो : MOHALI
जीरकपुर। होटलों और मैरिज पैलेसों में काम करने वाले कामगारों ने प्रदेश सरकार की ओर से लगाए गए नाइट कर्फ्यू और कड़े प्रतिबंधों का बुधवार को जमकर विरोध किया। इस दौरान विरोध कर रहे कामगारों ने ‘कैप्टन सरकार सुनो पुकार... मत छीनो हमारा रोजगार’ के नारे लगाए। इस रैली में वेटर, कुक्स, कैटरर्स और बड़ी संख्या में दूसरे कामगार शामिल थे। इन कामगारों का कहना है कि जीरकपुर के साथ सटे हुए हरियाणा के शहर पंचकूला में शादी समारोहों पर कोई पाबंदी नहीं और इनमें 200 तक लोग शामिल हो रहे हैं। लेकिन पंजाब में 20 ही लोगों को शामिल होने की अनुमति है। प्रदेश सरकार ने शादी समारोहों को लेकर पाबंदियां लगा रखी हैं, अब ऊपर से नाइट कर्फ्यू लगा दिया गया है। इस कारण होटल और मैरिज पैलेस व्यवसाय से जुड़े लोगों का रोजगार पूरी तरह से छिन गया है और उनके पास कोई काम नहीं है। उन्होंने सड़कों पर उतर कर सरकार के इस तुगलकी फरमानों के खिलाफ प्रदर्शन कर कड़े प्रतिबंधों में ढील देने की मांग की। कामगारों ने मांग की है कि कड़े प्रतिबंधों के नाम पर राज्य में रात के समय लॉकडाउन की ही स्थिति है। इससे उन्हें अपने परिवारों को पालना मुश्किल हो रहा है और वे भुखमरी के कगार पर पहुंच गए हैं।
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लाइटिंग और बैंड वाले भी परेशान...
ज्यादातर शादियों के लिए सिर्फ एक से दो बाजे वाले ही जा रहे हैं। 60 प्रतिशत लोग तो शादी समारोह में घोड़ियां भी नहीं ले रहे हैं। इस वजह से शादियों के सीजन के बावजूद काम नहीं मिल पा रहा है। वहीं शादियों के लिए पहले जैसी लाइटिंग की भी डिमांड नहीं है। कोरोना काल के दौरान फेज-1 में घाटा झेल चुके फूल कारोबारियों को इस नवरात्र में व्यवसाय पटरी पर लौटने की उम्मीद जगी थी, लेकिन अब उनमें मायूसी छाई हुई है। प्रशासन की सख्ती के कारण इस बार भी शहर में चैत्र नवरात्र के भव्य आयोजन नहीं किए जा रहे हैं। कामगार सवाल कर रहे थे कि रात में कर्फ्यू लगाने का क्या औचित्य है ? उन्होंने सरकार से सवाल किया है कि अगर देर रात तक शराब के ठेके खोले जा सकते हैं तो फिर उनके रोजगार पर पाबंदी क्यों लगाई जा रही है ? उन्होंने पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह से गुहार लगाते हुए इन पाबंदियों में ढील देने की अपील करते हुए कहा है कि अब तो अन्य खर्चों के साथ-साथ बच्चों के दाखिले का भी समय आ गया है। ऊपर से वे बेरोजगारी के कगार पर पहुंच गए हैं। इस कारण लगाई गई पाबंदियों पर पुनर्विचार कर इनमें ढील दी जाए। अगर सरकार ने ऐसा नहीं किया तो वे कोरोना से शायद बच जाएं लेकिन उनके परिवार भुखमरी से जरूर मर जाएंगे।
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इस अवसर पर प्रदर्शन करने वालों में सैमुअल मसीह, संजीव घोष, देवीन शर्मा, राजू, काका, दीपेश, विनोद, नरिंदर, राजू, शशि, अनुपम सहित सैकड़ों होटल और मैरिज पैलेस में काम करने वाले कामगार मौजूद थे।
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हमारी अपील... रात का कर्फ्यू खोल दिया जाए
हम रोष प्रदर्शन कर अपनी आवाज कैप्टन सरकार तक पहुंचाना चाहते हैं। सरकार ने नाइट कर्फ्यू लगाकर हमारे रोजगार बंद कर दिए हैं और हमारी दाल-रोटी तक बंद करवा दी है। उनके रोजगार बंद होने से वह भुखमरी के कगार पर हैं। उनके जैसा कारोबार करने वाले लोग नाइट कर्फ्यू लगने के कारण घर पर बैठ गए हैं। जबकि सरकार की ओर से अन्य सभी कारोबारोें पर पाबंदी नहीं लगाई गई। इसलिए वह अपील करते हैं कि नाइट कर्फ्यू को खोल दिया जाए या मैरिज पैलेस में 200 लोगों के शामिल होने की अनुमति दी जाए, जिससे वह अपना रोजगार कर सकें और अपने परिवारों का पेट पाल सकें ओर अपने बच्चों को पढ़ा सकें। -देवेन शर्मा, स्थानीय निवासी
नाइट कर्फ्यू से बने लॉकडाउन जैसे हालात
केंद्र सरकार ने लॉकडाउन तो खोल दिया है, लेकिन यहां पंजाब में नाइट कर्फ्यू लगने से कामकाज बंद हो गए हैं और हालात दोबारा लॉकडाउन जैसे ही हो गए हैं। इस कारण उनके होटल और मैरिज पैलेस में विभिन्न कामगार साथियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। नाइट कर्फ्यू लगने से उनके रोजगार बंद होने से वह दयनीय स्थिति में हैं। वहीं, बच्चों के दाखिले भी शुरू हो गए हैं और स्कूलों ने फीस और अन्य खर्चे मांगने शुरू कर दिए हैं। -अनुपम, स्थानीय निवासी

फैसले पर किया जाए पुनर्विचार
हमारे शहर जीरकपुर के पड़ोस में ही हरियाणा का पंचकूला शहर बसा है। यहां शादी समारोह में 200 से अधिक लोग शामिल हो सकते हैं। जबकि जीरकपुर में सरकार केवल 20 ही व्यक्तियों को ही शामिल होने दे रही है। इससे उनके जैसे हजारों कामगारों को जीवन यापन में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हमारे सभी भाई बेरोजगार हो चुके हैं और परिवारों सहित सड़क पर आने की कगार पर हैं। पंजाब सरकार से हमारी गुजारिश है की कृपया अपने फैसले पर पुनर्विचार करें ताकि वे अपने परिवार को पाल सकें। -कृष्ण कुमार, स्थानीय निवासी
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