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Mohali News: दुष्कर्म का आरोपी सबूतों की कमी के चलते बरी
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मोहाली। लोकल कोर्ट ने एक लड़की से दुष्कर्म के आरोप में गिरफ्तार व्यक्ति को बरी कर दिया। एडिशनल डिस्ट्रिक्ट और सेशंस जज की कोर्ट ने जांच में गंभीर कमियों और भरोसेमंद सबूतों की कमी का हवाला देकर बरी करने का फैसला सुनाया। आरोपी पर पीड़िता के पिता की एफआईआर के आधार पर मुकदमा चल रहा था।
आरोपी की ओर से पेश वकील ने दलील दी कि सरकारी वकील का केस असंभव बातों से भरा है। उन्होंने बताया कि पीड़िता ने आरोप लगाया कि उसे सुबह करीब 10:30 बजे बलटाना में एक गुरुद्वारे के पास एक कार में चार लड़कों ने जबरन किडनैप कर लिया था। यह एक व्यस्त पब्लिक इलाका था। दिन के उजाले में फिर भी इस दावे को साबित करने के लिए कोई गवाह या सबूत नहीं मिला। चार लोगों का नाम लेने के बावजूद, पुलिस ने सिर्फ एक युवक सुजल को ही आरोपी बनाया है।
बचाव पक्ष ने पीड़िता की गवाही में विरोधाभासों को उजागर किया। उसने बताया कि उसे दिल्ली में एक महीने तक एक कमरे में बंद रखा और आरोपियों ने कई बार उसके साथ दुष्कर्म किया। उसने माना कि उसने इस दौरान कभी शोर नहीं मचाया। कोर्ट ने कहा कि बिना पता चले घनी आबादी वाले इलाके में इतने लंबे समय तक गैर-कानूनी तरीके से बंद रखना बहुत ही नामुमकिन लगता है। इसी तरह पीड़िता ने बताया कि बाद में उसे बिहार ले जाया गया, लेकिन वह यह नहीं बता सकी कि वह दिल्ली से वहां कैसे पहुंची। जज ने सरकारी वकील की कहानी में कई कमियां देखीं। पुलिस अधिकारियों ने दावा किया कि उन्होंने 9 जुलाई 2024 को बिहार के गोपालगंज में छापा मारा और अगले दिन जीरकपुर लौट आए।
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कोर्ट ने देखा कि लगभग 2,200 किलोमीटर की आने-जाने की दूरी ने दिए गए समय में ऐसी यात्रा को नामुमकिन बना दिया। पीड़िता के पिता ने भी गवाही दी कि जब वह अपनी बेटी को बिहार से वापस लाने गए तो उनके साथ पुलिस नहीं थी, जो पुलिस की बात से अलग है। कोर्ट ने यह भी दर्ज किया कि लौटने के बाद पीड़िता को कथित तौर पर हरदोई यूपी से दूसरी किडनैपिंग का सामना करना पड़ा और उसे लुधियाना ले जाया गया, जहां से बाद में उसे बरामद किया गया। लेकिन, आरोपी की लोकेशन का पता लगाने के लिए इस्तेमाल किया गया मोबाइल फोन कभी जब्त नहीं किया गया।
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आरोपी की ओर से पेश वकील ने दलील दी कि सरकारी वकील का केस असंभव बातों से भरा है। उन्होंने बताया कि पीड़िता ने आरोप लगाया कि उसे सुबह करीब 10:30 बजे बलटाना में एक गुरुद्वारे के पास एक कार में चार लड़कों ने जबरन किडनैप कर लिया था। यह एक व्यस्त पब्लिक इलाका था। दिन के उजाले में फिर भी इस दावे को साबित करने के लिए कोई गवाह या सबूत नहीं मिला। चार लोगों का नाम लेने के बावजूद, पुलिस ने सिर्फ एक युवक सुजल को ही आरोपी बनाया है।
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बचाव पक्ष ने पीड़िता की गवाही में विरोधाभासों को उजागर किया। उसने बताया कि उसे दिल्ली में एक महीने तक एक कमरे में बंद रखा और आरोपियों ने कई बार उसके साथ दुष्कर्म किया। उसने माना कि उसने इस दौरान कभी शोर नहीं मचाया। कोर्ट ने कहा कि बिना पता चले घनी आबादी वाले इलाके में इतने लंबे समय तक गैर-कानूनी तरीके से बंद रखना बहुत ही नामुमकिन लगता है। इसी तरह पीड़िता ने बताया कि बाद में उसे बिहार ले जाया गया, लेकिन वह यह नहीं बता सकी कि वह दिल्ली से वहां कैसे पहुंची। जज ने सरकारी वकील की कहानी में कई कमियां देखीं। पुलिस अधिकारियों ने दावा किया कि उन्होंने 9 जुलाई 2024 को बिहार के गोपालगंज में छापा मारा और अगले दिन जीरकपुर लौट आए।
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कोर्ट ने देखा कि लगभग 2,200 किलोमीटर की आने-जाने की दूरी ने दिए गए समय में ऐसी यात्रा को नामुमकिन बना दिया। पीड़िता के पिता ने भी गवाही दी कि जब वह अपनी बेटी को बिहार से वापस लाने गए तो उनके साथ पुलिस नहीं थी, जो पुलिस की बात से अलग है। कोर्ट ने यह भी दर्ज किया कि लौटने के बाद पीड़िता को कथित तौर पर हरदोई यूपी से दूसरी किडनैपिंग का सामना करना पड़ा और उसे लुधियाना ले जाया गया, जहां से बाद में उसे बरामद किया गया। लेकिन, आरोपी की लोकेशन का पता लगाने के लिए इस्तेमाल किया गया मोबाइल फोन कभी जब्त नहीं किया गया।