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Mohali News: निगम में शामिल नानूमाजरा और संभालकी के लोग पानी को तरसे, चार दिन से नलके सूखे
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मोहाली। नगर निगम में शामिल किए गए नानूमाजरा और संभालकी गांवों में चार दिनों से पीने के पानी की आपूर्ति पूरी तरह ठप है। ग्रामीणों को रोजमर्रा के कामों के लिए भी पानी का इंतजाम करना पड़ रहा है, जिससे उनमें गहरा रोष है। पिछले चार महीने से इन गांवों में पानी की आपूर्ति कभी कम दबाव पर तो कभी पूरी तरह बंद रहने से परेशानी बनी हुई है।
ग्रामीणों का कहना है कि जब उनके गांवों को नगर निगम में शामिल किया गया था, तब उन्हें बेहतर विकास और सुविधाओं की उम्मीद थी। हालांकि, मौजूदा हालात में उन्हें पीने का पानी तक उपलब्ध नहीं हो रहा है। संभालकी निवासी हरबंस लाल और गौरव शर्मा ने बताया कि चार महीने से पानी की समस्या बनी हुई है। कभी पानी कम दबाव पर आता है और कभी बिल्कुल नहीं आता। अब पिछले चार दिनों से आपूर्ति पूरी तरह बंद है, जिससे घरों में पीने और अन्य जरूरी कामों के लिए दिक्कत हो रही है। ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि यदि निगम नियमित पानी की आपूर्ति नहीं दे सकता, तो गांवों को निगम में शामिल करने का क्या लाभ हुआ।
ग्रामीणों का आक्रोश
पानी की समस्या को लेकर ग्रामीणों में नगर निगम के प्रति भारी रोष है। उनका कहना है कि निगम में शामिल होने के बाद भी बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। ग्रामीणों को उम्मीद थी कि निगम में आने से उनके जीवन स्तर में सुधार होगा। लेकिन पीने के पानी जैसी मूलभूत आवश्यकता भी पूरी नहीं हो पा रही है।
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पार्षद ने लगाए आरोप
पार्षद गुरप्रीत कौर उब्बा ने निगम अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारी ग्रामीणों की शिकायतों को अनदेखा कर रहे थे। बार-बार कहने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं किया गया। अंततः उन्हें जल आपूर्ति विभाग के अधिकारियों से गुहार लगानी पड़ी, जिसके बाद मोटर की मरम्मत का काम शुरू करवाया गया। पार्षद ने स्पष्ट किया कि निगम में शामिल होने से पहले गांव में पानी की आपूर्ति जल आपूर्ति विभाग के पास ही थी।
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ग्रामीणों का कहना है कि जब उनके गांवों को नगर निगम में शामिल किया गया था, तब उन्हें बेहतर विकास और सुविधाओं की उम्मीद थी। हालांकि, मौजूदा हालात में उन्हें पीने का पानी तक उपलब्ध नहीं हो रहा है। संभालकी निवासी हरबंस लाल और गौरव शर्मा ने बताया कि चार महीने से पानी की समस्या बनी हुई है। कभी पानी कम दबाव पर आता है और कभी बिल्कुल नहीं आता। अब पिछले चार दिनों से आपूर्ति पूरी तरह बंद है, जिससे घरों में पीने और अन्य जरूरी कामों के लिए दिक्कत हो रही है। ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि यदि निगम नियमित पानी की आपूर्ति नहीं दे सकता, तो गांवों को निगम में शामिल करने का क्या लाभ हुआ।
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ग्रामीणों का आक्रोश
पानी की समस्या को लेकर ग्रामीणों में नगर निगम के प्रति भारी रोष है। उनका कहना है कि निगम में शामिल होने के बाद भी बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। ग्रामीणों को उम्मीद थी कि निगम में आने से उनके जीवन स्तर में सुधार होगा। लेकिन पीने के पानी जैसी मूलभूत आवश्यकता भी पूरी नहीं हो पा रही है।
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पार्षद ने लगाए आरोप
पार्षद गुरप्रीत कौर उब्बा ने निगम अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारी ग्रामीणों की शिकायतों को अनदेखा कर रहे थे। बार-बार कहने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं किया गया। अंततः उन्हें जल आपूर्ति विभाग के अधिकारियों से गुहार लगानी पड़ी, जिसके बाद मोटर की मरम्मत का काम शुरू करवाया गया। पार्षद ने स्पष्ट किया कि निगम में शामिल होने से पहले गांव में पानी की आपूर्ति जल आपूर्ति विभाग के पास ही थी।